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इमरान खान की सेहत पर अमेरिका की पैनी नज़र, पाकिस्तान में हाई अलर्ट और बढ़ गई हलचल

इमरान खान की सेहत पर अमेरिका की पैनी नज़र, पाकिस्तान में हाई अलर्ट और बढ़ गई हलचल

पाकिस्तान की सियासत में एक बार फिर भूचाल आया हुआ है। देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की अदियाला जेल में बंद सेहत और उनके कानूनी मामलों को लेकर अब दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका ने भी खुलकर अपनी बात रखी है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने साफ किया है कि वॉशिंगटन इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब पाकिस्तान की राजनीति में तनाव अपनी चरम सीमा पर है और अदालत से लेकर सड़कों तक गहमागहमी का माहौल है।

अमेरिकी विदेश विभाग का बड़ा बयान

अमेरिकी विदेश विभाग के एक शीर्ष अधिकारी ने मीडिया से बातचीत के दौरान इमरान खान के मामलों और उनकी शारीरिक स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है। अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "हम उनके मामले पर बेहद बारीकी से नज़र रखे हुए हैं। हम उनकी सेहत की स्थिति पर भी लगातार नजर रख रहे हैं। लेकिन, कूटनीतिक सीमाओं के तहत इस मामले में हमारा दखल यहीं तक सीमित है।"

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की तरफ से आया यह बयान पाकिस्तान की सरकार और सैन्य तंत्र के लिए एक संकेत की तरह है। हालांकि अमेरिका ने इसमें सीधे तौर पर दखल देने से इनकार किया है, लेकिन उसकी पैनी नजर इस बात का सुबूत है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इमरान खान का मामला अभी भी एक संवेदनशील कूटनीतिक मुद्दा बना हुआ है।

अदियाला जेल में कैद हैं पूर्व प्रधानमंत्री

गौरतलब है कि साल 2023 में तोशाखाना मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी वाली अदियाला जेल में बंद हैं। इसके बाद उन्हें जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार के अन्य मामलों में भी दोषी करार दिया जा चुका है। उनकी पार्टी पीटीआई लगातार यह आरोप लगाती रही है कि उनके नेता को राजनीतिक बदले की भावना के तहत फर्जी मामलों में फंसाया गया है और उन्हें जेल में अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।

परिजनों की चेतावनी और 27 सितंबर का मार्च

इस बीच, हाल ही में एक नया मोड़ तब आया जब इमरान खान के बेटे कासिम खान ने अपने समर्थकों को एक अहम संदेश दिया। उन्होंने अपील की थी कि 27 सितंबर को होने वाले प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के दौरान कोई भी समर्थक अदियाला जेल की तरफ मार्च न करे। कासिम खान ने आशंका जताई थी कि पाकिस्तानी अधिकारी इस विशाल भीड़ का इस्तेमाल जेल पर 'जवाबी' हमले या किसी हिंसक बहाने के तौर पर कर सकते हैं, जिससे उनके पिता की जान को सीधा खतरा पैदा हो सकता है।

पंजाब प्रांत में धारा 144 और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

इमरान खान की पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन के आह्वान को देखते हुए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार पूरी तरह सतर्क हो चुकी है। राज्य प्रशासन ने 23 सितंबर से लेकर 5 अक्टूबर तक पूरे प्रांत में धारा 144 लागू कर दी है। इसके तहत किसी भी सार्वजनिक स्थान पर पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई है।

तनाव की स्थिति को भांपते हुए रावलपिंडी, अटक, झेलम और मियांवाली जैसे संवेदनशील जिलों में पाकिस्तान रेंजर्स की तैनाती की मांग की गई है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके।

इमरान खान की बहनों की हिरासत और कानूनी लड़ाई

प्रदर्शनों के ऐलान से ठीक पहले पाकिस्तानी पुलिस ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इमरान खान की तीन बहनों को हिरासत में ले लिया है। शुरुआती कार्रवाई में अलीमा खान को हिरासत में लिया गया, जबकि उजमा खान और नोरिन को 'पब्लिक ऑर्डर ऑर्डिनेंस' के तहत 30 दिनों की एहतियातन हिरासत में रखा गया है।

इस कार्रवाई के खिलाफ अदालत का दरवाजा भी खटखटाया गया। लाहौर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत ने उजमा और नोरिन के खिलाफ दिए गए हिरासत आदेशों को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने से साफ इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर इस मामले में उनका जवाब तलब किया है। पाकिस्तानी प्रशासनिक अधिकारियों का तर्क है कि यह गिरफ्तारियां और प्रतिबंध किसी राजनीतिक दुर्भावना के तहत नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी थीं।

पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति पर वैश्विक असर

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह अंदरूनी राजनीतिक उठापटक किसी बड़े संकट से कम नहीं है। एक तरफ जहां अंतरराष्ट्रीय बिरादरी, विशेष तौर पर अमेरिका की इस मामले पर पैनी नजर है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर पुलिस और न्यायपालिका के बीच खींचतान जारी है। पीटीआई कार्यकर्ताओं का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है, और आने वाले दिनों में यह टकराव और ज्यादा गहरा सकता है।

अब देखना यह होगा कि अदालतें इस मामले में क्या रुख अपनाती हैं और क्या अमेरिका के इस बयान के बाद पाकिस्तानी हुक्मरान इमरान खान के मामलों में कोई नरमी बरतते हैं या नहीं। फिलहाल, पूरे देश में हाई अलर्ट घोषित है और हर कोई आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टकटकी लगाए बैठा है।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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