सूफी संत हाजी वारिस अली शाह की नगरी में सांस्कृतिक विरासत और कौमी एकता के प्रतीक प्रसिद्ध देवा मेले का मंगलवार को भव्य आगाज हो गया। शेख मोहम्मद हसन गेट पर जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह की पत्नी और आईएएस अधिकारी रिया केजरीवाल ने फीता काटकर मेले का औपचारिक उद्घाटन किया। उद्घाटन के तुरंत बाद सफेद कबूतर उड़ाकर अमन, शांति और भाईचारे का संदेश दिया गया, जबकि इस दौरान गूंजती शहनाई की मधुर धुनों और पीएसी बैंड की प्रस्तुतियों ने पूरे परिसर में उत्सव का माहौल बना दिया।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) पंकज वर्मा, अपर जिलाधिकारी (ADM) निरंकार सिंह, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गुंजिता अग्रवाल सहित जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी और मेला कमेटी के सदस्य उपस्थित रहे। मेले के शुभारंभ के साथ ही देवा परिसर में रौनक छा गई। रंग-बिरंगी दुकानें, आकर्षक झूले, मनोरंजन के विभिन्न साधन और पशु बाजार लोगों के विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। जायरीनों और सैलानियों की भारी आवाजाही से पूरा मेला क्षेत्र जीवंत नजर आ रहा है।
गंगा-जमुनी तहजीब और सर्वधर्म समभाव की अनूठी मिसाल
देवा मेला केवल मनोरंजन और खरीदारी का केंद्र नहीं है, बल्कि यह देश की साझा सांस्कृतिक विरासत, कौमी एकता और सर्वधर्म समभाव की जीवंत मिसाल है। महान सूफी संत हजरत हाजी वारिस अली शाह की प्रेम, करुणा और इंसानियत की शिक्षाओं से जुड़ा यह आयोजन विभिन्न धर्मों, जातियों और समुदायों के बीच आपसी मोहब्बत व भाईचारे का संदेश प्रसारित करता है। मेला परिसर में आयोजित सांस्कृतिक संध्या का उद्घाटन जिला अधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया।
सांस्कृतिक मंच पर कला, संगीत और नृत्य की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दी गईं। इस दौरान एएसपी उत्तरी विवेक तिवारी, सीएमओ डॉ. रंजन गौतम, जॉइंट मजिस्ट्रेट विद्यांशु शेखर झा और तहसीलदार भूपेंद्र विक्रम सिंह सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रवक्ता आशीष पाठक ने किया।
जिला प्रशासन की प्राथमिकता और सूचना विभाग की प्रदर्शनी
जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने इस मौके पर कहा कि देवा मेला हमारी साझा सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता का बड़ा प्रतीक है। जिला प्रशासन की मुख्य प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि मेले में आने वाले प्रत्येक जायरीन, श्रद्धालु और पर्यटक को पूरी तरह सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित वातावरण मिले।
मेले के दौरान सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा एक विशेष चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जिसका उद्घाटन एडीएम व देवा मेला कमेटी के सचिव निरंकार सिंह ने फीता काटकर किया। यह प्रदर्शनी आगंतुकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र है, जिसमें प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, विकासपरक कार्यों और प्रमुख उपलब्धियों को बेहद सुंदर एवं सरल चित्रों के माध्यम से दर्शाया गया है। क्षेत्रीय प्रदर्शनी अधिकारी मयंक तिवारी ने जनपदवासियों और सैलानियों से इस प्रदर्शनी का अवलोकन करने की अपील की है।
सांस्कृतिक संध्या में बहार और भक्तिमय प्रस्तुतियां
मेला परिसर में सजी सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत बहार सुगम संगीत प्रभाग के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत गणेश वंदना से हुई। इसके बाद संस्था के संस्थापक प्रभात नारायण दीक्षित द्वारा रचित कव्वाली ‘तेरे जलवों के चर्चे सुन-सुनकर मैं आया हूं बाबा’ की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई, जिसमें 33 छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
इसके पश्चात शिवराजे म्यूजिकल बैंड के निर्देशक कार्तिकेय कैलाश दीक्षित और उनकी टीम के कलाकारों—अस्मित, आदि व कृष्णा—ने शानदार बॉलीवुड गीतों का मैशअप पेश कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान संगीत प्रेमियों को अंजित द्विवेदी (ऑक्टोपैड), आनंद यादव (नाल), सत्येंद्र दास (सिंथेसाइजर), कार्तिकेय कैलाश दीक्षित (गिटार) और शुभांकर साहू (बांसुरी) की बेहतरीन संगत का आनंद मिला। इसके अलावा, अरुणोदय पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने ‘महिषासुर मर्दिनी’ गीत पर एक मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर भक्ति, शक्ति और नारी सामर्थ्य का संदेश दिया।
स्थानीय कारोबार और सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव
देवा मेले में आगामी दिनों के दौरान खेलकूद प्रतियोगिताओं, सुगम संगीत और देश-प्रदेश के नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहेंगी। इन आयोजनों से नई खेल प्रतिभाओं को मंच मिलने के साथ-साथ स्थानीय कला, लोक परंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। मेले की व्यावसायिक गतिविधियां स्थानीय कारोबार को गति प्रदान करती हैं, जिससे दुकानदारों, कलाकारों और छोटे व्यापारियों को अपनी आजीविका चलाने व व्यवसाय के विस्तार का सुअवसर प्राप्त होता है। परंपरा, अध्यात्म और आधुनिकता के इस अनूठे संगम के जरिए नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में यह मेला महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।