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विकसित भारत का निर्माण मजबूत वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार की नींव पर होगा: प्रधानमंत्री मोदी

विकसित भारत का निर्माण मजबूत वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार की नींव पर होगा: प्रधानमंत्री मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में 'उभरता विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार सम्मेलन (इमर्जिंग साइंस, टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन कॉन्क्लेव) 2026' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने देश के युवाओं के आत्मविश्वास और व्यापक सोच की सराहना करते हुए कहा कि 'विकसित भारत' का निर्माण वैज्ञानिक अनुसंधान, मौलिक खोजों और नवाचार की मजबूत नींव पर किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप संस्थापकों के साथ अपनी बातचीत का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब विदेशी नवाचारों का अनुसरण करने के बजाय मौलिक तकनीकें विकसित करने और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कोविड-19 स्वदेशी टीकाकरण अभियान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग जैसे उदाहरणों का हवाला देते हुए इस बात पर जोर दिया कि भारत को भविष्य की तकनीकों को आकार देने में दुनिया का नेतृत्व करना चाहिए।

परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता

आगामी 30 अक्टूबर को डॉ. होमी जहांगीर भाभा की जयंती से पहले प्रधानमंत्री ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि देश की ऊर्जा सुरक्षा और दीर्घकालिक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए 'फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' तकनीक को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। कुछ महीने पहले ही स्वदेशी 500-मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर ने 'फर्स्ट क्रिटिकलिटी' हासिल की है। इसके साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स द्वारा 'मेड-इन-इंडिया' रॉकेट के जरिए उपग्रहों को कक्षा में स्थापित करने और 'सैटेलाइट डॉकिंग' की क्षमता प्राप्त करने जैसी उपलब्धियों का भी उल्लेख किया गया।

एआई, सेमीकंडक्टर और 'समाज के लिए विज्ञान'

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने इस वर्ष 'एआई इम्पैक्ट समिट' की मेजबानी करने के साथ अपना खुद का एआई मॉडल लॉन्च किया है और सेमीकंडक्टर चिप्स का निर्यात भी शुरू कर दिया है। उन्होंने विज्ञान और तकनीक को मानवता की सेवा से जोड़ते हुए कहा कि वैज्ञानिक प्रगति का मुख्य पैमाना 'समाज के लिए विज्ञान' होना चाहिए। इस दिशा में आईआईटी मद्रास के आधुनिक 'ब्रेन सेंटर' का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकें मानव मस्तिष्क की 3D तस्वीरें बनाने और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को समझने में सहायक हैं।

अनुसंधान और बौद्धिक संपदा में भारी वृद्धि

शोध और विकास के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने 'अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन' की तेज प्रगति का जिक्र किया। पिछले वर्ष शोध और नवाचार के लिए घोषित एक लाख करोड़ रुपये के संकल्प के तहत सरकार और निजी निवेशकों दोनों की ओर से 12-12 हजार करोड़ रुपये यानी कुल 24,000 करोड़ रुपये की नई प्रतिबद्धता सामने आई है। इसके अलावा, देश में पेटेंट फाइलिंग सालाना 50,000 से बढ़कर अब लगभग 1.5 लाख तक पहुंच गई है, जो एक गहरे संरचनात्मक बदलाव को दर्शाती है।

एआई के दौर में वैज्ञानिक निर्णय और भविष्य की प्राथमिकताएं

एआई की भूमिका पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने आगाह किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस त्वरित उत्तर दे सकती है और उत्पादकता बढ़ा सकती है, लेकिन उन जवाबों की सत्यता और सटीकता की जांच करने की जिम्मेदारी केवल वैज्ञानिक की होनी चाहिए। उन्होंने सेमीकंडक्टर, क्वांटम तकनीक, बायोटेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों के लिए समर्पित राष्ट्रीय मिशनों पर जोर दिया।

सम्मेलन के समापन पर प्रधानमंत्री ने शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के नेताओं और विद्यार्थियों से अगले तीन वर्षों के लिए ठोस लक्ष्य तय करने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत का युवा केवल उभरते विज्ञान में भागीदार नहीं बनेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर इसका नेतृत्व भी करेगा।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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