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प्रयागराज में TGT के 17,735 पदों पर भर्ती का ऐलान, आयोग की सबसे बड़ी नियुक्ति

प्रयागराज में TGT के 17,735 पदों पर भर्ती का ऐलान, आयोग की सबसे बड़ी नियुक्ति

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के 17,735 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया है। आयोग के गठन के बाद यह अब तक की सबसे बड़ी नियुक्ति प्रक्रिया है, जिसके तहत प्रदेश के 4,512 एडेड माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती का यह नया विज्ञापन ऐसे समय में आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। इस स्थिति को लेकर अभ्यर्थियों के बीच राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। छात्रों का एक वर्ग इस भर्ती को चुनावी एजेंडे के रूप में देख रहा है और उनका मानना है कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी संख्या में पद निकालकर राजनीतिक लाभ हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके साथ ही, भर्ती की नई नियमावली और पात्रता शर्तों को लेकर भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं।

1982 से अब तक का सफर और पदों का इतिहास

उत्तर प्रदेश में माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों के चयन के लिए वर्ष 1982 में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का गठन किया गया था। बोर्ड ने अपनी पहली भर्ती का विज्ञापन 1983-84 के सत्र में निकाला था, जिसमें टीजीटी और पीजीटी के कुल 2,500 से 3,000 पद शामिल थे। शुरुआती दशकों में सीमित विज्ञापनों और तदर्थ नियुक्तियों के कारण भर्तियों का दायरा सीमित रहा। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 1982 से 1992 के बीच विज्ञापित और तदर्थ आधार पर सृजित टीजीटी पदों की कुल संख्या लगभग आठ हजार के आसपास थी।

नब्बे के दशक के बाद से समय-समय पर पदों की संख्या में उतार-चढ़ाव देखा गया। वर्ष 1992 में लगभग 1,500 पद, 1996 में 2,200 पद, 1999 में 1,800 पद और 2001 में करीब 2,100 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे। इसके बाद के वर्षों में 2002 में 1,650, 2004 में 2,400, 2005 में 2,800, 2009 में 3,400 और 2011 में 1,450 पदों पर भर्तियां निकलीं। पिछले कुछ विज्ञापनों पर नजर डालें तो वर्ष 2012 में करीब 4,600, वर्ष 2016 में 7,950 और वर्ष 2021 में 12,603 पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ था। अब 17,735 पदों के साथ यह प्रक्रिया पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए आयोग के इतिहास की सबसे बड़ी भर्ती बन गई है।

पात्रता और टीईटी की अनिवार्यता पर विवाद

भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही इसकी नई नियमावली और पात्रता शर्तों पर विवाद शुरू हो गया है। वर्ष 1982 के बाद पहली बार भर्ती की पात्रता में बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं, जिसके विरोध में छात्र आंदोलित नजर आ रहे हैं। विशेष रूप से शारीरिक शिक्षा विषय के अभ्यर्थियों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है।

शारीरिक शिक्षा के अभ्यर्थियों का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने इस विषय की भर्ती के लिए टीईटी को अनिवार्य नहीं किया है। उनका कहना है कि जिन अभ्यर्थियों के पास बीपीएड या बीपीई की योग्यता है, उनके लिए टीईटी प्रमाणपत्र की अनिवार्यता लागू करना न्यायसंगत नहीं है।

आयोग का पक्ष

टीजीटी भर्ती परीक्षा के नए नियमों को लेकर उठे विवाद और अभ्यर्थियों के विरोध पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव डॉ. संजय सिंह ने स्पष्टीकरण दिया है। उनका कहना है कि भर्ती की नियमावली में संशोधन बहुत लंबे समय के बाद किया गया है और नियमावली तैयार करने व उसमें बदलाव करने का अधिकार पूरी तरह से माध्यमिक शिक्षा विभाग के पास सुरक्षित है।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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