क्या हर मामले में पॉक्सो एक्ट की गंभीरता को एक ही तराजू में तौला जा सकता है? वाराणसी की एक अदालत ने हाल ही में एक ऐसे ही मामले में बेहद अहम टिप्पणी करते हुए आरोपी को राहत दी है। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नितिन पांडेय की अदालत ने जैतपुरा थाना क्षेत्र में दर्ज एक मामले में आरोपी आशीष कुमार को जमानत दे दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया इस पूरे प्रकरण को प्रेम-प्रसंग से जुड़ा हुआ माना है।
क्या था पूरा मामला और कैसे शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया?
यह पूरा मामला इस साल 24 मई का है, जब मिर्जापुर जिले के अहरौरा थाना क्षेत्र के पैगम्बरपुर निवासी आशीष कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादिनी की 17 वर्ष 6 माह की बेटी 24 मई को अचानक बिना किसी को बताए घर से चली गई थी। परिवार वालों ने काफी तलाश की, लेकिन जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तब जैतपुरा थाने में गुमशुदगी और फिर गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने मामले की विवेचना पूरी करते हुए आरोपी आशीष कुमार के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य सुसंगत धाराओं में आरोप-पत्र (चार्जशीट) अदालत में दाखिल कर दिया था।
बचाव पक्ष की दलीलें और अदालत का रुख
अदालत में सुनवाई के दौरान आरोपी के अधिवक्ता मोहम्मद आक़िब ने मजबूती से अपना पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि उनके मुवक्किल को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। बचाव पक्ष का कहना था कि आरोपी का कोई भी आपराधिक इतिहास नहीं रहा है और न ही उसका कोई आपराधिक मंशा थी।
अदालत ने केस डायरी, पुलिस के साक्ष्यों और सबसे महत्वपूर्ण—पीड़िता के बयानों का बारीकी से अवलोकन किया। न्यायिक दस्तावेजों के अनुसार, पीड़िता की स्कूल के प्रमाण पत्रों के आधार पर जन्मतिथि 1 जनवरी 2009 दर्ज है। घटना के वक्त उसकी उम्र करीब 17 वर्ष 4 महीने थी। पीड़िता ने अपने बयानों में यह स्वीकार किया था कि वह अपनी मर्जी से आशीष के साथ गई थी।
किन आधारों पर मिली जमानत?
- जांच पूरी: अदालत ने माना कि पुलिस इस मामले में विवेचना पूरी कर चुकी है और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल हो चुकी है, इसलिए अब हिरासत में रखने की आवश्यकता नहीं है। साक्ष्यों की स्थिति: विवेचक द्वारा भविष्य में किसी अन्य मुख्य साक्ष्य के संकलन की आवश्यकता नहीं बताई गई थी। प्रेम-प्रसंग की संभावना: बयानों और परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया आपसी सहमति और प्रेम-प्रसंग का मामला माना।
तमाम परिस्थितियों और पक्षों को ध्यान में रखते हुए, न्यायाधीश ने एक-एक लाख रुपए के दो बंधपत्र और उतनी ही धनराशि की दो जमानतों पर आरोपी को रिहा करने का आदेश जारी किया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1. अदालत ने किस आधार पर आरोपी को जमानत दी?
अदालत ने केस डायरी, पीड़िता के बयानों और इस तथ्य को आधार बनाया कि विवेचना पूरी हो चुकी है और मामला प्रथम दृष्टया प्रेम-प्रसंग का प्रतीत होता है।
Q2. आरोपी को जमानत के लिए क्या शर्तें पूरी करनी होंगी?
आरोपी आशीष कुमार को एक-एक लाख रुपए के दो जमानतों और बन्धपत्र को अदालत में प्रस्तुत करना होगा।
Q3. घटना के समय पीड़िता की उम्र क्या थी?
स्कूल के दस्तावेजों के अनुसार घटना के वक्त पीड़िता की उम्र लगभग 17 वर्ष 4 महीने थी।