न्याय की राह को आसान और सुलभ बनाने की दिशा में एक बार फिर बड़ा कदम उठाया गया है। वाराणसी में आगामी 12 सितंबर को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी तेजी के साथ चल रही हैं। आम जनता तक इस महाअभियान की जानकारी पहुंचाने और अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ उठाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से मंगलवार को विशेष प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
जनपद न्यायालय परिसर से हुई शुरुआत
मंगलवार को वाराणसी जनपद न्यायालय परिसर में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। माननीय जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष संजीव शुक्ला ने खुद हरी झंडी दिखाकर इन प्रचार वाहनों को शहर और ग्रामीण इलाकों के लिए रवाना किया। इस दौरान न्यायालय परिसर में न्यायिक अधिकारियों और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी रही, जो इस अभियान को सफल बनाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद नजर आए।
जिला जज संजीव शुक्ला ने इस मौके पर मौजूद लोगों और मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा कि लोक अदालत भारतीय न्याय व्यवस्था का एक ऐसा सशक्त माध्यम है, जहां बिना किसी मुकदमेबाजी के लंबे समय से अटके मामलों का आपसी समझौते के आधार पर त्वरित और स्थायी समाधान किया जाता है। उन्होंने अपील की कि जिले के नागरिक इस अवसर का लाभ उठाएं और अपने पुराने विवादों को हमेशा के लिए खत्म करें।
किन-किन मामलों का होगा निस्तारण?
राष्ट्रीय लोक अदालत का दायरा बेहद व्यापक होता है, जिसमें विभिन्न प्रकृति के लंबित मामलों को आपसी सहमति से सुलझाया जाता है। इस बार की लोक अदालत में मुख्य रूप से निम्नलिखित मामलों को सूचीबद्व किया गया है:
- यातायात चालान: वाहन चालकों के पेंडिंग चालान और उससे जुड़े जुर्माने।
- पारिवारिक और वैवाहिक विवाद: पति-पत्नी के बीच के घरेलू और आपसी विवाद, भरण-पोषण के मामले।
- मोटर दुर्घटना दावे: सड़क हादसों से जुड़े मुआवजे के लंबित मामले।
- कमर्शियल और चेक बाउंस: एन.आई. एक्ट (Negotiable Instruments Act) के तहत चेक बाउंस के मामले और व्यापारिक विवाद।
- उपभोक्ता फोरम और भूमि अधिग्रहण: उपभोक्ता मामलों से जुड़ी शिकायतें और जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के विवाद।
- बैंक ऋण वसूली: बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लोन रिकवरी से जुड़े मामले।
- आपराधिक शमनीय मामले: ऐसे क्रिमिनल केस जिनमें कानून के तहत समझौता संभव है।
गाँव-गाँव और शहर के हर कोने तक पहुँचेगी जानकारी
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के पूर्णकालिक सचिव एवं सिविल जज (सीनियर डिविजन) राजीव मुकुल पाण्डेय ने इस पूरी मुहिम की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि इन प्रचार वाहनों का मुख्य उद्देश्य न्याय की पहुंच को समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित करना है। कई बार जागरूकता के अभाव में लोग लोक अदालत के फायदों से वंचित रह जाते हैं, लेकिन अब इन हाई-टेक प्रचार वाहनों के जरिए जिले के चप्पे-चप्पे पर संदेश पहुंचाया जा रहा है।
ये वाहन माइक और लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को लोक अदालत की तिथि, समय और इसके फायदों के बारे में जागरूक करेंगे। साथ ही, पैरा लीगल वालंटियर्स (PLV) की टीमें भी लोगों को पंपलेट बांटकर व्यक्तिगत रूप से संपर्क कर रही हैं ताकि कोई भी जरूरतमंद इस अवसर को न चूके।
कार्यक्रम में दिग्गज अधिकारियों की रही मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण अवसर पर न्यायपालिका के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। मोटर दावा दुर्घटना अधिकरण के पीठासीन अधिकारी रामकेश, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश, राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी एवं अपर जनपद न्यायाधीश आलोक कुमार ने कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई। इसके साथ ही जनपद न्यायालय के तमाम न्यायिक अधिकारी और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समर्पित पैरा लीगल वालंटियर्स भी इस दौरान अपनी भूमिका निभाते दिखे।
लोक अदालत क्यों है आम जनता के लिए वरदान?
भारतीय न्याय प्रणाली में मुकदमों की लंबी फेरहिस्ट और तारीख पर तारीख मिलने की समस्या से हर कोई वाकिफ है। ऐसे में राष्ट्रीय लोक अदालत एक राहत भरी सांस की तरह है। यहाँ न केवल अदालतों का बोझ कम होता है, बल्कि आम जनता का समय, धन और मानसिक तनाव भी बचता है। लोक अदालत में फैसला दोनों पक्षों की सहमति से होता है, इसलिए इसमें हार-जीत का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। फैसले के बाद कोई अपील भी नहीं होती, जिससे विवाद हमेशा के लिए समाप्त हो जाते हैं।
प्रशासन की यह पहल निश्चित रूप से वाराणसी के नागरिकों के लिए एक सुनहरा मौका लेकर आई है। यदि आपका भी कोई मामला लंबे समय से अदालतों की फाइलों में उलझा हुआ है, तो आगामी 12 सितंबर को लगने वाली इस राष्ट्रीय लोक अदालत का हिस्सा बनकर अपने विवादों का सुखद अंत कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कार्यालय या अपने नजदीकी न्यायालय से संपर्क किया जा सकता है।