वाराणसी की पावन धरा पर गंगा तट का हर कोना अपनी एक अलग कहानी समेटे रहता है। कभी यह घाट आस्था का केंद्र बनते हैं, तो कभी इंसानी साहस और बहादुरी की ऐसी अनूठी मिसालें पेश करते हैं जो हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में अमर हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही विहंगम और दिल को छू लेने वाला नजारा हाल ही में सिंधिया घाट पर देखने को मिला, जहां मौत के मुंह में समा रहे एक शख्स के लिए खाकी वर्दी पहने कुछ सिपाही किसी फरिश्ते से कम साबित नहीं हुए।
सिंधिया घाट पर मची अफरा-तफरी
घटना के समय सिंधिया घाट पर आम दिनों की तरह चहल-पहल थी। लोग गंगा स्नान कर रहे थे और कुछ किनारे पर बैठकर इस अलौकिक छटा का आनंद ले रहे थे। तभी अचानक गहरे पानी की तरफ से चीख-पुकार की आवाजें गूंज उठीं। वहां मौजूद लोगों ने देखा कि एक करीब 40 वर्षीय व्यक्ति तेज बहाव और गहरे पानी की चपेट में आकर लगातार डूब रहा था। वह पानी की सतह पर संघर्ष कर रहा था और देखते ही देखते उसकी सांसें टूटने लगी थीं।
यह खौफनाक मंजर देखकर घाट पर मौजूद लोगों की सांसें थम गईं। कुछ ही पलों में वहां भारी भीड़ जमा हो गई। लोग अपनी जान जोखिम में डालने से कतरा रहे थे क्योंकि गंगा का वह हिस्सा अपनी गहराई और तेज अंडरकरेंट (निचले बहाव) के लिए कुख्यात है। चीख-पुकार के बीच किसी को समझ नहीं आ रहा था कि आखिर इस डूबते हुए इंसान को कैसे बचाया जाए।
देवदूत बनकर आए 36वीं वाहिनी पीएसी के जवान
ठीक उसी वक्त, सुरक्षा और कानून व्यवस्था संभालने के लिए तैनात 36वीं वाहिनी पीएसी, रामनगर के जवान अपनी मुस्तैदी के साथ वहां मौजूद थे। स्थिति की नजाकत को भांपते हुए जवानों ने एक पल की भी देरी नहीं की। उनके लिए वह क्षण किसी लंबे विचार-विमर्श का नहीं, बल्कि त्वरित निर्णय लेने का था।
कर्तव्यनिष्ठा और मानवता का परिचय देते हुए पीएसी के जवानों ने बिना अपनी जान की परवाह किए गंगा के उफनते और गहरे पानी में छलांग लगा दी। ठंडी और तेज धाराओं के बीच जवानों का एकमात्र लक्ष्य उस डूबती हुई जान को सुरक्षित बाहर निकालना था।
तय की गई संघर्ष की वेला
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पानी का बहाव इतना तेज था कि किसी भी प्रशिक्षित तैराक के लिए भी उस स्थिति में तैरना आसान नहीं था। लेकिन जवानों के हौसले के आगे कुदरत की वह चुनौती भी छोटी पड़ गई। वे तेजी से तैरते हुए उस डूबते हुए व्यक्ति के पास पहुंचे। उस व्यक्ति ने दहशत में आकर लगभग होश खो दिए थे और वह बचाने वाले जवानों को भी जकड़ने लगा था, जिससे स्थिति और अधिक जोखिम भरी हो गई थी।
इसके बावजूद, पीएसी के जवानों ने गजब का संयম और पेशेवर कौशल दिखाया। उन्होंने डूब रहे व्यक्ति को पूरी सावधानी से संभाला और उसे अपनी गिरफ्त में लेकर सुरक्षित तरीके से घाट के किनारे की तरफ खींचना शुरू किया। कुछ ही मिनटों की कड़ी मशक्कत के बाद जवानों ने उसे सकुशल बाहर खींच लिया।
प्राथमिक उपचार और बची हुई सांसें
जब उस व्यक्ति को बाहर निकाला गया, तब तक वह बेहोशी की हालत में पहुंच चुका था और उसके पेट में काफी मात्रा में पानी भर चुका था। जवानों ने बिना वक्त गंवाए मौके पर ही उसे सीपीआर (CPR) देना और प्राथमिक उपचार शुरू किया। उनकी इस सूझबूझ का नतीजा यह हुआ कि कुछ ही देर में उस व्यक्ति ने उल्टी की और उसकी सांसें फिर से सामान्य होने लगीं।
तुरंत ही एम्बुलेंस की मदद से उसे नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने पुष्टि की कि अब वह खतरे से पूरी तरह बाहर है और उसकी हालत में तेजी से सुधार हो रहा है। यदि पीएसी के जवान थोड़ी सी भी देर कर देते, तो यह घटना एक बड़े हादसे में बदल सकती थी।
चारों तरफ हो रही है जवानों की सराहना
इस साहसिक घटना के बाद से ही वाराणसी के घाटों और स्थानीय नागरिकों के बीच इन पीएसी जवानों की चर्चा हर जुबान पर है। लोग सोशल मीडिया और आम बातचीत में इन जवानों की दिलेरी की जमकर तारीफ कर रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि वर्दी सिर्फ कानून का पालन कराने के लिए नहीं होती, बल्कि जरूरत पड़ने पर वह आम जनता की रक्षक भी बनती है, और इसे इन जवानों ने एक बार फिर साबित कर दिखाया है।
यह वाकया एक बार फिर याद दिलाता है कि खाकी वर्दी के पीछे एक धड़कता हुआ इंसान और एक समर्पित रक्षक होता है, जो हर परिस्थिति में नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपनी जान दांव पर लगाने को तैयार रहता है। सिंधिया घाट पर हुई इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि इंसानियत अभी भी जिंदा है और जब हौसले बुलंद हों, तो मौत को भी हराया जा सकता है।