वाराणसी में साइबर ठगों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन इनसे निपटने के लिए खाकी भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रही है। ताजा मामला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के राजातालाब थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस ने तकनीकी कौशल और सूझबूझ का परिचय देते हुए एक पीड़ित के बैंक खाते से उड़े 80 हजार रुपये सकुशल वापस करा दिए हैं। इस कार्रवाई के बाद से एक बार फिर पुलिस की कार्यप्रणाली पर आम जनता का भरोसा मजबूत हुआ है।
ऑपरेशन साइ-वज्र बना मददगार
वर्तमान समय में साइबर अपराध सेू निपटने के लिए वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस द्वारा विशेष अभियान ऑपरेशन साइ-वज्र चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य साइबर ठगी के मामलों में तुरंत एक्शन लेना और पीड़ितों की डूबी हुई रकम को किसी तरह सुरक्षित वापस लाना है। राजातालाब थाने की साइबर हेल्प डेस्क ने इसी अभियान के तहत अपनी कार्यकुशलता का शानदार उदाहरण पेश किया है, जिसकी चर्चा अब हर तरफ हो रही है।
क्या था पूरा मामला?
घटना इसी वर्ष मई महीने की है। 14 मई को राजातालाब थाना अंतर्गत आने वाले ग्राम जगरदेवपुर काशीपुर के रहने वाले ओमप्रकाश सिंह के बैंक खाते से कुछ अज्ञात साइबर ठगों ने चालाकी से कुल 80 हजार रुपये की रकम उड़ा ली थी। अचानक खाते से मोटी रकम कट जाने के बाद पीड़ित के पैरों तले जमीन खिसक गई। बिना देर किए ओमप्रकाश सिंह ने समझदारी दिखाते हुए तुरंत राजातालाब थाने की साइबर हेल्प डेस्क से संपर्क साधा और अपनी आपबीती सुनाई।तत्परता दिखाते हुए एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत
शिकायत मिलते ही राजातालाब थाने की विशेष साइबर टीम हरकत में आ गई। टीम ने बिना एक पल गंवाए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP Portal) पर तत्काल शिकायत दर्ज की। साइबर सेल के जानकारों के अनुसार, ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में शुरुआती कुछ घंटे बेहद अहम होते हैं, जिन्हें 'गोल्डेन आवर्स' कहा जाता है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाती है, उतनी ही तेजी से ठगों के बैंक खातों तक पहुंचना आसान होता है।
"शिकायत मिलते ही हमारी टीम ने तकनीकी साक्ष्यों का संकलन किया और संबंधित बैंकों से संपर्क साधकर तुरंत फ्रॉड की गई पूरी राशि को होल्ड करवा दिया गया। इसके बाद कानूनी और बैंकिंग प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए 7 सितंबर 2026 को पूरी 80 हजार की धनराशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस ट्रांसफर करा दी गई।" - थाना राजातालाब पुलिस
किन-किन पुलिसकर्मियों ने निभाई अहम भूमिका?
इस पूरे मिशन को सफल बनाने वाली पुलिस टीम की चारों तरफ सराहना हो रही है। इस सराहनीय कार्य को अंजाम देने वाली टीम में निम्नलिखित पुलिसकर्मी शामिल रहे:
- उपनिरीक्षक जितेन्द्र कुमार (थानाध्यक्ष, राजातालाब)
- उपनिरीक्षक सूरज कुमार चौरसिया (साइबर नोडल प्रभारी)
- आरक्षी संजीव कुशवाहा
- हेड कांस्टेबल पूनम यादव
- कंप्यूटर ऑपरेटर एवं आरक्षी मंजू देवी
उच्च अधिकारियों ने इस पूरी टीम की मुस्तैदी, तत्परता और पेशेवर अंदाज की खुलकर तारीफ की है।
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस की सलाह
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी तरह के ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत उचित कदम उठाएं। पुलिस अधिकारियों ने कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है:
- किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना बैंक खाता विवरण, ओटीपी (OTP), यूपीआई पिन या पासवर्ड बिल्कुल शेयर न करें।
- लालच में आकर किसी भी अनधिकृत लिंक पर क्लिक न करें जो भारी भरकम कैशबैक या लॉटरी का दावा करते हों।
- यदि आप किसी साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं, तो बिना किसी देरी के तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्प लाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
राजातालाब पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही समय पर सही कदम उठाया जाए, तो साइबर ठगों के मंसूबों पर आसानी से पानी फेरा जा सकता है। पीड़ित ओमप्रकाश सिंह ने अपनी गाढ़ी कमाई वापस मिलने पर पूरी पुलिस टीम का आभार व्यक्त किया है।