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वाराणसी में बुजुर्ग महिलाओं के लिए वरदान बनी रोडवेज की मुफ्त यात्रा, 11 दिनों में 4500 ने उठाया लाभ

वाराणसी में बुजुर्ग महिलाओं के लिए वरदान बनी रोडवेज की मुफ्त यात्रा, 11 दिनों में 4500 ने उठाया लाभ

जीवन की संध्या बेला में अपनों से मिलने की चाह, किसी धार्मिक स्थल के दर्शन की लालसा या फिर रोजमर्रा के छोटे-मोटे जरूरी काम—इन सबके बीच अक्सर एक बड़ी रुकावट बनकर सामने आता था सफर का खर्च। मध्यम और सामान्य वर्गीय परिवारों में उम्र के इस पड़ाव पर पहुंच चुकी महिलाओं के लिए बस का किराया भी कई बार घरेलू बजट पर भारी पड़ जाता था। लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस मूक समस्या को गहराई से महसूस करते हुए एक ऐसा कदम उठाया, जिसने बुजुर्ग महिलाओं के जीवन में खुशियों की एक नई लहर दौड़ दी है। हम बात कर रहे हैं 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना' की, जो अब वाराणसी परिक्षेत्र की वरिष्ठ महिलाओं के लिए एक बड़ा संबल बन चुकी है।

महज 11 दिनों में 4,500 बुजुर्ग महिलाओं ने भरी मुफ्त उड़ान (सफर)

इस कल्याणकारी योजना के जमीन पर उतरने के बाद से ही इसके उत्साहजनक परिणाम सामने आने लगे हैं। आंकड़ों पर गौर करें तो वाराणसी परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी आठ डिपो से महज 11 दिनों के भीतर करीब 4,500 बुजुर्ग महिला यात्रियों ने रोडवेज बसों में पूरी तरह निशुल्क यात्रा का लाभ उठाया है। परिवहन विभाग से मिले आंकड़ों के अनुसार, इन महिलाओं की सुगम और मुफ्त यात्रा पर सरकार की ओर से 7,30,339 रुपये का वहन किया गया है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि किस तरह जरूरतमंद महिलाएं इस योजना का बढ़-चढ़कर लाभ उठा रही हैं और उनके जीवन में आवागमन कितना सुगम हो गया है।

वाराणसी परिक्षेत्र के क्षेत्रीय प्रबंधक परशुराम पांडेय ने इस सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विभाग द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि हर पात्र महिला तक इस सुविधा की पहुंच आसानी से हो सके। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरी चौकियों तक, हर डिपो पर बुजुर्ग महिलाओं का यह सफर अब किराए की फिक्र से पूरी तरह आजाद हो चुका है।

डिपोर्टवार आंकड़ों पर एक नजर: किस जिले में दिखा सबसे ज्यादा उत्साह

वाराणसी परिक्षेत्र के सभी आठों डिपो से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद दिलचस्प हैं और यह दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश के इस पूर्वांचल हिस्से में बुजुर्ग महिलाओं के बीच इस योजना को लेकर कितना भारी क्रेज और जागरूकता है। पिछले 11 दिनों में विभिन्न डिपो से यात्रा करने वाली वरिष्ठ महिलाओं की डिपो-वार स्थिति कुछ इस प्रकार रही:

  • जौनपुर डिपो: 960 बुजुर्ग महिलाएं
  • गाजीपुर डिपो: 859 बुजुर्ग महिलाएं
  • रूरल डिपो: 524 बुजुर्ग महिलाएं
  • काशी डिपो: 493 बुजुर्ग महिलाएं
  • कैंट डिपो: 479 बुजुर्ग महिलाएं
  • चंदौली डिपो: 444 बुजुर्ग महिलाएं
  • सोनभद्र डिपो: 437 बुजुर्ग महिलाएं
  • विंध्यनगर डिपो: 304 बुजुर्ग महिलाएं

इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि जौनपुर और गाजीपुर जैसे जिलों में वरिष्ठ महिलाओं ने इस योजना का सबसे अधिक लाभ उठाया है। इन जिलों की बुजुर्ग माताओं और बहनों के लिए अब सफर करना न केवल आसान हुआ है, बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी एक नया आयाम मिला है।

किराए की चिंता से मुक्ति और आत्मनिर्भरता का अहसास

बुजुर्ग महिलाओं के लिए यह सुविधा केवल एक बस पास या मुफ्त टिकट भर नहीं है, बल्कि यह उन्हें अपनों के करीब जाने की आज़ादी देता है। अक्सर ऐसा होता था कि रिश्तेदारी में किसी वैवाहिक कार्यक्रम, शोक संदेश या पारिवारिक आयोजन में शामिल होने के लिए महिलाओं को अपने बेटों या पतियों की जेब की तरफ देखना पड़ता था। कई बार पैसों के अभाव में वे चाहकर भी सफर नहीं कर पाती थीं।

अब स्थिति बदल चुकी है। इस योजना के दायरे में आने वाली 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की साधारण बसों में आजीवन निशुल्क यात्रा की सुविधा मिल रही है। इससे उनके आत्मसम्मान में वृद्धि हुई है और वे अपनी छोटी-मोटी यात्राओं के लिए पूरी तरह स्वतंत्र महसूस कर रही हैं।

योजना का लाभ लेने की बेहद आसान प्रक्रिया

इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने किसी लंबी कागजी कार्रवाई या जटिल फॉर्मेलिटी की शर्त नहीं रखी है। प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सरल है:

  • महिला की आयु कम से कम 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए।
  • यात्री महिला उत्तर प्रदेश की मूल निवासी होनी चाहिए।
  • बस यात्रा के दौरान कंडक्टर (परिचालक) को अपनी आयु और निवास की पुष्टि के लिए केवल अपना आधार कार्ड (Aadhaar Card) या मतदाता पहचान पत्र (Voter ID Card) दिखाना अनिवार्य है।

दस्तावेज़ दिखाते ही परिचालक द्वारा बिना किसी शुल्क के टिकट जारी कर दिया जाता है, जिससे महिलाओं को सफर के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ता।

सामाजिक बदलाव की एक मजबूत बानगी

भारतीय समाज में बुजुर्गों की देखभाल हमेशा से नैतिक जिम्मेदारी रही है, लेकिन जब सरकारें नीतिगत स्तर पर इस तरह के कदम उठाती हैं, तो उसका प्रभाव वृहद स्तर पर दिखाई देता है। 'लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना' केवल एक परिवहन सुविधा नहीं है, बल्कि यह उन माताओं के प्रति एक सम्मान है जिन्होंने अपना पूरा जीवन परिवार और समाज के निर्माण में खपा दिया।

वाराणसी और उसके आसपास के जिलों में इस योजना की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि यदि नीयत साफ हो और योजना धरातल पर ठीक से लागू हो, तो उसका सीधा लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचता है। आने वाले दिनों में उम्मीद जताई जा रही है कि जैसे-जैसे इस योजना के बारे में और अधिक प्रचार-प्रसार होगा, वाराणसी परिक्षेत्र सहित पूरे उत्तर प्रदेश में लाभान्वित होने वाली वरिष्ठ महिलाओं की यह संख्या और भी तेजी से बढ़ेगी।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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