वाराणसी के प्रतिष्ठित काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) परिसर से आए दिन साइकिल चोरी होने की घटनाओं ने पिछले कुछ महीनों से छात्रों और सुरक्षा तंत्र दोनों की नींद उड़ाई हुई थी। इस बीच, स्थानीय पुलिस ने एक ऐसे शातिर चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसके तौर-तरीकों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनके पास से चोरी की गई 12 साइकिलें भी बरामद की हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि ये शातिर चोर किसी अनुभवी अपराधी के संपर्क में नहीं थे, बल्कि इन्होंने चोरी की तकनीक यूट्यूब (YouTube) वीडियो देखकर सीखी थी।
लंका थाना पुलिस की बड़ी कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के विशाल परिसर में साइकिल चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने के लिए लंका थाना पुलिस और एंटी-क्राइम टीम लगातार सक्रिय थी। पिछले कुछ दिनों से मिल रही लगातार शिकायतों के आधार पर पुलिस ने अपनी खुफिया तंत्र को मजबूत किया और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। इसी क्रम में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी जब मुखबिर की सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने इस गिरोह के तीन सक्रिय सदस्यों को धर दबोचा।
गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी उत्तर प्रदेश के फूलपुर इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं। पुलिस की पूछताछ में इन आरोपियों ने जो खुलासे किए, उसने जांच अधिकारियों को भी सकते में डाल दिया। पूछताछ के दौरान सामने आया कि ये सभी आरोपी वाराणसी के अलग-अलग इलाकों में घूमकर रेकी करते थे और विशेष तौर पर बीएचयू जैसे शिक्षण संस्थानों को अपना निशाना बनाते थे, जहां छात्रों की बड़ी संख्या में साइकिलें खड़ी होती हैं।
यूट्यूब बना चोरों का डिजिटल गुरु
आज के दौर में तकनीक का इस्तेमाल अच्छे और बुरे दोनों कामों के लिए हो रहा है, और इस घटना ने इसका एक और जीवंत उदाहरण पेश किया है। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने साइकिल और अन्य तालों को बिना चाबी के तोड़ने के आधुनिक तरीके किसी आपराधिक मास्टरमाइंड से नहीं, बल्कि वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म यूट्यूब से सीखे थे।
आरोपी यूट्यूब पर ताला तोड़ने के ट्यूटोरियल देखते थे और फिर उन ट्रिक्स का इस्तेमाल बीएचयू परिसर में खड़ी महंगी और अच्छी कंडीशन वाली साइकिलों के तालों को काटने या खोलने में करते थे। वे पलक झपकते ही आधुनिक तालों को भी चकमा देकर साइकिलें उड़ा ले जाते थे और किसी को भनक तक नहीं लगने देते थे।
परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों के भीतर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बीएचयू जैसा विशाल परिसर, जहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा गार्ड और प्रॉक्टोरियल बोर्ड के सदस्य तैनात होने का दावा किया जाता है, वहां से इस तरह लगातार साइकिलों का चोरी होना सुरक्षा तंत्र में बड़ी चूक को दर्शाता है।
- छात्रों की परेशानी: विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले दूर-दराज के छात्रों के लिए साइकिल कैंपस के भीतर आने-जाने का मुख्य साधन होती है। साइकिल चोरी होने से उनकी पढ़ाई और दैनिक गतिविधियों पर गहरा असर पड़ता है।
- प्रशासनिक चिंता: इस खुलासे के बाद अब विश्वविद्यालय प्रशासन भी अपनी आंतरिक सुरक्षा को लेकर नए सिरे से मंथन कर रहा है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।
बरामदगी और आगे की कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर विभिन्न स्थानों से कुल 12 साइकिलें बरामद की हैं, जिन्हें उन्होंने चोरी करने के बाद छिपा कर रखा था। पुलिस इन साइकिलों के मूल मालिकों की शिनाख्त करने की प्रक्रिया में जुटी है ताकि उन्हें उनकी गाड़ियां वापस लौटाई जा सकें।
लंका थाना प्रभारी ने बताया कि पकड़े गए तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्हें न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस गिरोह के साथ कुछ अन्य लोग भी जुड़े थे और क्या इन्होंने शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है।
यह घटना न केवल युवाओं के बीच डिजिटल माध्यमों के दुरुपयोग का एक गंभीर उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि पुलिस मुस्तैदी और तकनीकी सर्विलांस के जरिए किस तरह अपराधियों के मंसूबों को समय रहते पानी फेरा जा सकता है।