कोलकाता से रवाना हुआ था क्रूज, निर्धारित समय से एक दिन पहले काशी पहुंचा
भारत में निर्मित दुनिया का सबसे लंबा रिवर क्रूज 'गंगा विलास' मंगलवार शाम चार बजे 15 विदेशी यात्रियों को लेकर वाराणसी के रामनगर स्थित मल्टी माडल टर्मिनल पर पहुंचा। यह ऐतिहासिक क्रूज गत 12 अक्टूबर को कोलकाता से अपनी यात्रा पर रवाना हुआ था। रामनगर पहुंचने के दौरान विदेशी पर्यटक क्रूज से ही गंगा के प्राचीन और भव्य घाटों के मनोरम दृश्यों का आनंद लेते नजर आए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गंगा विलास अपने तय शेड्यूल से एक दिन पहले काशी पहुंच गया है। इससे पहले इस क्रूज के आगामी 28 अक्टूबर को वाराणसी पहुंचने का आधिकारिक कार्यक्रम निर्धारित था। मंगलवार को आगमन के बाद यात्रियों का यह दल क्रूज पर ही विश्राम करेगा और अपनी आगे की यात्रा की रूपरेखा तैयार करेगा।
काशी और आसपास के ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण
वाराणसी प्रवास के दौरान विदेशी पर्यटकों का यह दल कई प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का दौरा करेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार यात्री प्रसिद्ध गंगा आरती में शामिल होंगे और श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। इसके अलावा उनके सारनाथ स्थित अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बौद्ध तीर्थ स्थल जाने का भी कार्यक्रम तय किया गया है।
पर्यटक वाराणसी के आसपास के ऐतिहासिक धरोहरों से भी रूबरू होंगे। वे ऐतिहासिक चुनार किले और रामनगर किले का भ्रमण करेंगे, जहां उन्हें दोनों स्थलों के समृद्ध इतिहास और वास्तुकला के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
तीन नवंबर को कोलकाता के लिए होगी वापसी
विदेशी पर्यटकों का यह दल आगामी तीन नवंबर को इसी गंगा विलास क्रूज के जरिए वापसी के लिए कोलकाता वास्ते रवाना होगा। वापसी की इस जल यात्रा के दौरान पर्यटक बिहार के विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक और महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों का भी भ्रमण करेंगे।
यह दूसरा अवसर है जब गंगा विलास पर्यटकों को लेकर काशी पहुंचा है। इससे पहले जनवरी 2023 में यह क्रूज 36 विदेशी यात्रियों को लेकर रामनगर मल्टी माडल टर्मिनल आया था।
क्रूज की आधुनिक सुविधाएं और लंबी जल यात्रा का इतिहास
एमवी गंगा विलास में यात्रियों के लिए पांच सितारा होटल जैसी अत्याधुनिक और विलासितापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इस क्रूज की कुल क्षमता 50 यात्रियों के ठहरने की है। इसके अतिरिक्त जहाज पर आधुनिक जिम, उच्च श्रेणी का रेस्टोरेंट और एक सनडेक भी बनाया गया है, जहां से पर्यटक यात्रा के दौरान गंगा नदी के दोनों किनारों के प्राकृतिक दृश्यों का लुत्फ उठा सकते हैं।
अपनी पिछली ऐतिहासिक यात्रा के दौरान गंगा विलास ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम के जलमार्गों से होते हुए डिब्रूगढ़ और पड़ोसी देश बांग्लादेश तक की लंबी दूरी तय की थी। उस दौरान क्रूज ने कुल 3200 किलोमीटर का सफर तय किया था और अंतर्देशीय जलमार्गों में दुनिया का सबसे लंबा सफर तय करने वाला पहला जहाज बनने का गौरव हासिल किया था।
दूसरी ओर, नदी जलमार्ग से जुड़ी अन्य घटनाओं में इस वर्ष अगस्त के महीने में विदेशी पर्यटकों को लेकर कोलकाता से चला 'राजमहल क्रूज' गंगा नदी में जलस्तर अत्यधिक बढ़ा होने के कारण केवल भागलपुर तक ही जा पाया था और वहां से वापस लौट गया था।