देवास जिले में कथित जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों और अवैध शराब के कारोबार पर प्रशासनिक गाज गिरी है। राज्य शासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक का तबादला कर दिया है, जबकि आबकारी विभाग के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। पुलिस ने इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
हाल ही में देवास जिले के चंदाना और बिंजाना गांवों में संदिग्ध परिस्थितियों में कुछ लोगों की मौत का मामला सामने आया था। स्थानीय ग्रामीणों और मृतकों के परिजनों ने आरोप लगाया था कि यह मौतें जहरीली शराब पीने के कारण हुई हैं। इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद प्रशासन और आबकारी विभाग हरकत में आया। आबकारी आयुक्त द्वारा जारी निलंबन आदेश के अनुसार, जिला आबकारी अधिकारी बसंती भूरिया, सहायक जिला आबकारी अधिकारी निलेश पवार और आबकारी उप निरीक्षक राजश्री खन्ना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
अधिकारियों पर लापरवाही का गंभीर आरोप
निलंबन आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि जिला आबकारी अधिकारी बसंती भूरिया अपने कार्यक्षेत्र में अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण रखने में पूरी तरह विफल रहीं। इसके साथ ही, वह अपने अधीनस्थ अमले की गतिविधियों की निगरानी करने और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही तथा शिथिलता बरतने की दोषी पाई गईं। चंदाना और बिंजाना गांवों में दो व्यक्तियों की मृत्यु से जुड़े मर्ग मामलों की जांच के दौरान अवैध शराब की अवैध बिक्री का बड़ा खुलासा हुआ था, जिसके बाद यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई।
कलेक्टर और एसपी का हुआ तबादला
जहरीली शराब कांड के तूल पकड़ने के बाद प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल किया गया है। देवास के मौजूदा कलेक्टर ऋतुराज को उनके पद से हटाकर सामान्य प्रशासन विभाग में उप सचिव के रूप में पदस्थ किया गया है। उनकी जगह सिवनी की पूर्व कलेक्टर नेहा मीना को देवास जिले की नई कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इसी प्रकार पुलिस प्रशासन में भी फेरबदल करते हुए देवास के पुलिस अधीक्षक (एसपी) पुनीत गहलोत का तबादला कर दिया गया है। उन्हें भोपाल स्थित पुलिस मुख्यालय में सहायक पुलिस महानिरीक्षक (एआईजी) के पद पर भेजा गया है। उनके स्थान पर बालाघाट के पूर्व एसपी आदित्य मिश्रा को देवास का नया पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया गया है।
10 लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई
प्रशासनिक और आबकारी कार्रवाई के अलावा पुलिस स्तर पर भी सख्त कदम उठाए गए हैं। अवैध शराब के अवैध कारोबार और इस घटना से जुड़े नेटवर्क की गहराई से पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने इस मामले में संलिप्त पाए गए 10 लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है। प्रशासन द्वारा गठित जांच समिति मौतों के वास्तविक कारणों और शराब की गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रभावितों ने किस स्रोत से शराब खरीदी थी।