रिश्तों में पसंद और प्यार जताने के तरीकों को लेकर मशहूर अभिनेत्री राडिका सरथकुमार और उनके पति सरथकुमार के बीच एक दिलचस्प अंतर सामने आया है।
वेटरन तमिल अभिनेत्री राडिका सरथकुमार ने हाल ही में एक इंटरव्यू में साझा किया कि जहां उन्हें किसी भी तरह के सरप्राइज बिल्कुल पसंद नहीं हैं, वहीं उनके पति और अभिनेता सरथकुमार उन्हें सरप्राइज देना बहुत पसंद करते हैं। बिहाइंडवुड्स टीवी के साथ बातचीत में 64 वर्षीय अभिनेत्री ने बताया कि उनके पति अधिक रोमांटिक स्वभाव के हैं और उन्हें फूल, आभूषण और सरप्राइज देना अच्छा लगता है। हालांकि दोनों खुद को रोमांटिक मानते हैं, लेकिन प्यार को महसूस करने और जताने की उनकी प्राथमिकताएं एक-दूसरे से काफी अलग हैं।
रिश्तों में प्यार के अलग-अलग तरीके
इस छोटी सी व्यक्तिगत बात पर टिप्पणी करते हुए मनोचिकित्सक और रिलेशनशिप ब्रेकथ्रू कोच डेलना राजेश ने बताया कि यह उदाहरण रिश्तों के एक सबसे बड़े और अक्सर गलत समझे जाने वाले पहलू को उजागर करता है। दो लोग एक-दूसरे से बेहद प्यार कर सकते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे प्यार को एक ही तरीके से महसूस करें या अनुभव करें।
डेलना के अनुसार, अक्सर हम यह मान लेते हैं कि जो चीजें हमें खास महसूस कराती हैं, वे हमारे पार्टनर को भी स्वाभाविक रूप से उतनी ही प्रिय लगेंगी। जो व्यक्ति उपहारों को महत्व देता है, वह तोहफों के जरिए अपना स्नेह व्यक्त करता है। जो लगातार संवाद को अहमियत देता है, वह बार-बार फोन कॉल की उम्मीद रखता है। वहीं, कुछ लोग समस्याओं को हल करके अपना प्यार जताते हैं, जबकि उनके साथी की चाहत सिर्फ यह हो सकती है कि उन्हें ध्यान से सुना जाए।
नीयत और प्रभाव का अंतर
विशेषज्ञ का मानना है कि समस्या यह नहीं है कि जोड़े अलग-अलग तरह से प्यार करते हैं, बल्कि विवाद तब शुरू होता है जब लोग अपनी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं को ही प्यार जताने का एकमात्र सही पैमाना मान बैठते हैं। मनोवैज्ञानिक रूप से इसमें नीयत (Intention) और उसके प्रभाव (Impact) के बीच के अंतर को समझना जरूरी है। कोई भी जेस्चर सच्ची भावना से किया गया हो सकता है, लेकिन फिर भी वह सामने वाले को असहज कर सकता है। एक भव्य सरप्राइज किसी एक पार्टनर को बेहद खुश कर सकता है, जबकि वही सरप्राइज उस साथी को मानसिक रूप से थका सकता है जिसे पहले से तय और अनुमानित चीजें पसंद हैं। इनमें से कोई भी प्राथमिकता दूसरी से ज्यादा रोमांटिक नहीं है।
विवाह में संवाद और समझ का महत्व
यह बात शादीशुदा रिश्तों में और भी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, जहां लंबे समय की नजदीकी और परिचय के कारण कई बार लोग एक-दूसरे को लेकर स्वतःस्फूर्त और गलत धारणाएं बना लेते हैं। जोड़े वर्षों यह सोचते हुए बिता सकते हैं कि वे एक-दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं, जबकि वे लगातार एक-दूसरे की स्पष्ट रूप से व्यक्त की गई प्राथमिकताओं को नजरअंदाज कर रहे होते हैं।
कई बार रिश्तों में कड़वाहट या नाराजगी इसलिए पैदा नहीं होती कि वहां प्यार या स्नेह की कमी है, बल्कि इसलिए उत्पन्न होती है क्योंकि एक पार्टनर बार-बार यह महसूस करता है कि उसकी बात सुनी या समझी नहीं जा रही है। प्यार मिलना अपने आप में खास है, लेकिन हम जिस तरह से प्यार पाना चाहते हैं, उस रूप में समझे जाना भी उतना ही जरूरी है।
लचीलेपन और जिज्ञासा से मजबूत होती है अंतरंगता
डेलना का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि रिश्ते कोई व्यावसायिक सौदा बन जाएं, जहां हर जेस्चर या गतिविधि को पूरी तरह नपा-तुला होना चाहिए। सहजता (Spontaneity), आपसी समझौता और एक-साथ नए अनुभवों की खोज करना आज भी रिश्तों में अपनी जगह और महत्व रखते हैं। लेकिन अपने साथी की प्राथमिकताओं का सम्मान करना यह साबित करता है कि हमारी नीयत जितनी महत्वपूर्ण है, उनका व्यक्तित्व और उनकी पसंद भी उतनी ही अहम है।
दंपति इसकी शुरुआत इस बात पर चर्चा करके कर सकते हैं कि कौन से तौर-तरीके उनके बीच वास्तव में जुड़ाव पैदा करते हैं, किस बात से असहजता होती है और क्या समय के साथ उनकी ये जरूरतें बदली हैं। इसके मिलने वाले जवाब किसी भी महंगे उपहार से ज्यादा हैरान करने वाले और उपयोगी साबित हो सकते हैं। दीर्घकालिक अंतरंगता इस बात में नहीं है कि आपको कोई ऐसा व्यक्ति मिले जो बिल्कुल आपकी तरह प्यार करता हो, बल्कि इसमें है कि आप दूसरे व्यक्ति के स्नेह अनुभव करने के तरीके को समझने के लिए कितनी जिज्ञासा, लचीलापन और सम्मान दिखाते हैं। जब हम सिर्फ यह पूछना बंद कर देते हैं कि "मैं तुमसे किस तरह प्यार करना चाहता हूँ?" और यह पूछना शुरू करते हैं कि "तुम मेरे द्वारा दिए जाने वाले प्यार को कैसे महसूस करते हो?", तब प्रेम और अधिक सार्थक हो जाता है।