विंध्य एक्सप्रेस-वे का बढ़ता विरोध: "जान दे देंगे पर जमीन नहीं देंगे", तेजोपुर के किसान 24 घंटे के धरने पर बैठेबिछिया (चंदौली)। विंध्य एक्सप्रेस-वे परियोजना के खिलाफ किसानों का गुस्सा अब सातवें दिन और उग्र हो गया है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के नेतृत्व में बिछिया धरना स्थल पर चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन अब 'गांव-गांव' तक फैल चुका है। आंदोलन की रणनीति 'एक गांव, एक दिन धरना' के तहत आज तेजोपुर गांव के दर्जनों किसान 24 घंटे के क्रमिक धरने पर बैठ गए हैं। किसानों ने दोटूक शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है— "जब तक परियोजना वापस नहीं, तब तक वोट नहीं।"
बिना प्रशासनिक सहयोग के निजी कंपनी ने किया मनमाना सर्वे
किसान संघर्ष मोर्चा के संयोजक और भाकियू (टिकैत) के वाराणसी मंडल प्रवक्ता मणि देव चतुर्वेदी ने धरने को संबोधित करते हुए कहा कि विंध्य एक्सप्रेस-वे किसानों के लिए विकास नहीं, बल्कि एक अभिशाप बनने जा रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया:
"किसान किसी भी विकास कार्य के विरोधी नहीं हैं। लेकिन इस परियोजना के लिए एक निजी कंपनी ने जिला प्रशासन को बिना भरोसे में लिए, मनमाने ढंग से सर्वे कर डाला। अगर जमीनी स्तर पर सही तरीके से सर्वे किया गया होता, तो कम लागत में और किसानों को बिना भारी नुकसान पहुंचाए भी यह परियोजना बनाई जा सकती थी।"
किसानों के पास है समाधान का 'ब्लू प्रिंट'
मोर्चा संयोजक ने बताया कि प्रभावित किसानों के पास इस समस्या का एक व्यावहारिक 'ब्लू प्रिंट' (वैकल्पिक मार्ग का खाका) तैयार है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे हठधर्मिता छोड़कर किसानों से टेबल पर बात करें, ताकि कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके। जब तक ऐसा नहीं होता, किसान अपनी उपजाऊ और कीमती जमीन किसी भी कीमत पर देने को तैयार नहीं हैं।
धरने पर ये प्रमुख किसान रहे मौजूद
आज के इस 24 घंटे के धरने में तेजोपुर और आस-पास के गांवों के पचासों किसान एकजुट हुए। मुख्य रूप से संतोष यादव, मनीष सिंह, पूर्व प्रधान गुड्डू, विकास सिंह, अशोक कुमार सिंह, गोपाल सिंह, अजय कुमार सिंह, मृत्युंजय सिंह और अभिषेक सिंह सहित बड़ी संख्या में अन्नदाता अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। किसानों का साफ कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन थमेगा नहीं।