सहकारी संस्थाओं में अपनी खून-पसीने की कमाई को सुरक्षित रखने वाले आम नागरिकों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। महाराष्ट्र के वर्धा जिले से एक ऐसा मामला उजागर हुआ है, जिसने वित्तीय संस्थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हिंगनघाट स्थित रावसाहेब पटवर्धन अर्बन को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी की शाखा में एक बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है, जहां 135 भोले-भाले ग्राहकों के साथ कुल 2 करोड़ 41 लाख 50 हजार रुपए की कथित धोखाधड़ी की गई है। इस गंभीर मामले की न केवल स्थानीय पुलिस द्वारा प्राथमिकी दर्ज की गई है, बल्कि घोटाले की विशालता को देखते हुए इसकी कमान अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंप दी गई है।
ऐसे खुला 2.41 करोड़ के फर्जीवाड़े का पूरा राज़
किसी भी बड़े घोटाले की परतें अक्सर किसी एक आम इंसान की सजगता या उसकी व्यक्तिगत परेशानी से ही खुलती हैं। इस मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। बैंक ग्राहक समीक्षा नंदकिशोर शिवणकर, जिनकी उम्र महज 27 वर्ष है, अपनी जरूरत के समय पैसे निकालने के लिए हिंगनघाट शाखा पहुंची थीं। समीक्षा ने कुछ समय पहले इसी शाखा में रिकरिंग डिपॉजिट (RD) शुरू की थी, जिसके तहत वह हर महीने नियमित रूप से 1,000 रुपए जमा करती आ रही थीं। इसके अलावा, उन्होंने एक लाख रुपए की वार्षिक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भी कराई थी।
समीक्षा की इस एफडी की मैच्योरिटी तारीख हाल ही में यानी 27 अगस्त 2026 को पूरी होनी थी। जब उन्हें पैसों की सख्त जरूरत पड़ी, तो वह अपनी आरडी और एफडी की परिपक्वता राशि यानी कुल 3 लाख 31 हजार 387 रुपए निकालने के लिए बैंक शाखा गईं। लेकिन बैंक के भीतर जो हकीकत उनके सामने आई, उसने उनके पैरों तले जमीन खिसका दी। बैंक के रिकॉर्ड में उनकी राशि को लेकर गंभीर गड़बड़ियां पाई गईं। बिना किसी पूर्व सूचना या उनकी सहमति के उनके पैसों के साथ हेरफेर किया गया था। इस खुलासे के बाद समीक्षा ने चुप बैठने के बजाय सीधे हिंगनघाट पुलिस थाने का दरवाजा खटखटाया और एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
मुख्य शाखा भेजने के नाम पर हुआ बड़ा खेल
जब पुलिस ने इस मामले की शुरुआती छानबीन शुरू की, तो एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलाسه होने लगे। जांच में सामने आया कि सिर्फ समीक्षा शिवणकर ही नहीं, बल्कि इस शाखा के करीब 135 अन्य ग्राहकों की गाढ़ी कमाई को भी इसी तरह से निशाना बनाया गया है। इन तमाम ग्राहकों की कुल मिलाकर 2.41 करोड़ रुपए की भारी-भरकम राशि को कथित तौर पर शाखा के शीर्ष पदाधिकारियों के मौखिक या लिखित निर्देशों पर यवतमाल जिले में स्थित मुख्य शाखा की ओर डायवर्ट कर दिया गया था।
ग्राहकों का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई वापस मांगी, तो उन्हें टालमटोल भरे जवाब दिए गए। किसी को समय पर उसका पैसा नहीं मिला, तो किसी का खाता ही संदिग्ध स्थिति में डाल दिया गया। जब पीड़ितों को यह समझ आया कि उनके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है, तो उन्होंने एकजुट होकर न्याय की गुहार लगाई। ग्राहकों की सामूहिक शिकायतों और प्रारंभिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने तत्काल प्रभाव से संस्था के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सहित कुल 13 प्रमुख लोगों के खिलाफ आपराधिक मामलों के तहत केस दर्ज कर लिया।
किन-किन लोगों पर गिरी है गाज?
इस बड़े वित्तीय फर्जीवाड़े में जिन 13 पदाधिकारियों और संचालकों के नाम सामने आए हैं और जिन पर पुलिस ने शिकंजा कसा है, उनमें संस्था के शीर्ष चेहरे शामिल हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया है उनमें:
- आशीष भालचंद्र सोमन (शाखा अध्यक्ष)
- वैशाली राजेश पाटने (उपाध्यक्ष)
- अनिल विठ्ठल बांद्रे (संचालक)
- रुपेश जनार्धन येंडे (संचालक)
- कीर्ति अतुल महाजन (संचालक)
- सचिन पुंडलिक बनकर (संचालक)
- राहुल शरद अडगुलवार (संचालक)
- सारंग मुकुंद औदार्य (संचालक)
- निलेश कैलाशचंद्र लष्करी (संचालक)
- निखिलेश प्रकाश जोशी (संचालक)
- संदीप शंकर जिरकर (संचालक)
- नितेश विलास बेंद्रे (संचालक)
- कुंदन बालकृष्ण चुलपार (संचालक)
इन सभी पर विश्वासघात, धोखाधड़ी और ग्राहकों के पैसों का गलत तरीके से इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगा है।
अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) करेगी गहराई से पड़ताल
चूंकि यह मामला ढाई करोड़ के आसपास की बड़ी रकम से जुड़ा है और इसमें एक से अधिक जिलों (वर्धा और यवतमाल) के कनेक्शन सामने आ रहे हैं, इसलिए स्थानीय पुलिस ने इस केस की जटिलता को भांपते हुए इसकी जांच वर्धा की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को ट्रांसफर कर दी है। EOW की विशेष टीम अब इस पूरे घोटाले के हर एक पहलू को खंगालने में जुट गई है।
जांच का मुख्य केंद्र इस बात पर है कि आखिर हिंगनघाट शाखा से करोड़ों रुपए किस कानूनी या प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत यवतमाल की मुख्य शाखा को भेजे गए थे। क्या इसके लिए कोई वैधानिक प्रस्ताव पास हुआ था या फिर यह सिर्फ पैसों की हेराफेरी का एक सुनियोजित षड्यंत्र था? EOW बैंक के पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय लेन-देन, डिजिटल रिकॉर्ड, वाउचर और खातों की फोरेंसिक जांच करने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही, इस पूरी साजिश में किस-किसकी क्या व्यक्तिगत भूमिका रही है, इसकी भी टोह ली जा रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे फाइलों की परतें खुलेंगी, इस घोटाले में कुछ और नए नाम और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं।