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32 की उम्र में 2 स्टेंट! दिल के मामलों में क्यों धोखा खा रहे हैं युवा, कौन सा टेस्ट है जरूरी

32 की उम्र में 2 स्टेंट! दिल के मामलों में क्यों धोखा खा रहे हैं युवा, कौन सा टेस्ट है जरूरी

आज के दौर में दिल की बीमारियां सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गई हैं। सोशल मीडिया पर हाल ही में एक ऐसी कहानी सामने आई जिसने फिटनेस और उम्र के समीकरण को पूरी तरह से हिलाकर रख दिया है। महज 32 साल की उम्र में दो स्टेंट डलवा चुके शोमित विश्वास ने दुनिया के सामने एक ऐसा सच रखा है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। जो लोग यह सोचते हैं कि वे युवा हैं, जिम जाते हैं या पूरी तरह फिट दिखते हैं, उन्हें कभी दिल की बीमारी नहीं हो सकती, उनके लिए यह एक गंभीर चेतावनी है।

शोमित ने एक वीडियो के जरिए खुलकर अपनी बात रखी और लोगों से अपील की कि वे अपनी हेल्थ को हल्के में बिल्कुल न लें। उन्होंने एक खास टेस्ट का जिक्र किया जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या वाकई कम उम्र में आने वाले हार्ट अटैक का कोई संकेत नहीं मिलता? क्या हमारी फिटनेस इस बात की गारंटी है कि हमारा दिल सुरक्षित है? आइए इस पूरे मामले पर देश के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट की राय जानते हैं और समझते हैं कि आधुनिक जीवनशैली में हमारा दिल अंदर से कितना कमजोर हो रहा है।

फिटनेस और दिल की सेहत का भ्रम

अक्सर समाज में यह एक बहुत बड़ा मिथक (Misconception) बना हुआ है कि जो व्यक्ति नियमित रूप से कसरत करता है, दौड़ता है और जिसके शरीर पर कोई बाहरी लक्षण नहीं दिखते, उसकी धमनियां अंदर से पूरी तरह स्वस्थ होंगी। मुंबई स्थित केआईएमएस हॉस्पिटल्स के कार्डियोलॉजी विभाग के क्लिनिकल डायरेक्टर डॉ. अनुप तक्सांडे के अनुसार, यह धारणा सबसे बड़ा धोखा है।

डॉ. तक्सांडे का कहना है कि दिल की बीमारियां हमेशा कोई शुरुआती चेतावनी या लक्षण नहीं देती हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम शरीर के भीतर चुपचाप सालों-साल पलते रहते हैं और इसका पता तब चलता है जब बहुत देर हो चुकी होती है। इसके अलावा, जेनेटिक्स यानी आनुवंशिकी भी इसमें बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। अगर परिवार में किसी को कम उम्र में हार्ट अटैक या स्ट्रोक का इतिहास रहा है, तो खतरा अपने आप कई गुना बढ़ जाता है।

"फिटनेस बाहर से दिखाई देती है, लेकिन अंदर छिपा जोखिम आमतौर पर अदृश्य होता है। इसलिए सिर्फ बाहरी फिटनेस को ही सुरक्षा कवच मान लेना सबसे बड़ी भूल है।"

कौन सा टेस्ट है सबसे जरूरी? - जानें 'Lp(a)' के बारे में

शोमित विश्वास ने अपनी सलाह में जिस एक खास टेस्ट पर सबसे ज्यादा जोर दिया, वह है Lipoprotein(a) या संक्षेप में Lp(a)। डॉ. अनुप तक्सांडे भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह टेस्ट हर वयस्क को अपने जीवन में कम से कम एक बार जरूर करवाना चाहिए।

आखिर क्या है यह Lp(a)? यह एक तरह का कोलेस्ट्रॉल ले जाने वाला पार्टिकल होता है, जिसकी मात्रा ज्यादातर हमारे जेनेटिक्स (जींस) तय करते हैं। पारंपरिक कोलेस्ट्रॉल या लाइफस्टाइल में बदलाव का इस पर बहुत अधिक असर नहीं पड़ता, क्योंकि यह पूरी तरह से अनुवांशिक रूप से निर्धारित होता है।

  • बढ़ा हुआ Lp(a) क्यों खतरनाक है: यह रक्त वाहिकाओं में प्लाक (Plaque) जमने के जोखिम को तेजी से बढ़ाता है।

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  • अचानक खतरा: इसकी वजह से समय से पहले हार्ट अटैक और स्ट्रोक की आशंका बढ़ जाती है।
  • छिपा हुआ जोखिम: किसी व्यक्ति का सामान्य कोलेस्ट्रॉल प्रोफाइल एकदम ठीक हो सकता है, लेकिन फिर भी उसका Lp(a) स्तर खतरनाक रूप से बढ़ा हुआ हो सकता है।

डॉ. तक्सांडे के मुताबिक, वर्तमान कार्डियोलॉजिकल गाइडलाइंस यही सुझाती हैं कि वयस्क होने पर कम से कम एक बार Lp(a) की जांच जरूर करवानी चाहिए, खासकर तब जब परिवार में कम उम्र में दिल की बीमारियों का इतिहास रहा हो। हालांकि, चूंकि यह जेनेटिक होता है और स्थिर रहता है, इसलिए बार-बार इस टेस्ट को दोहराने की जरूरत नहीं पड़ती, बशर्ते डॉक्टर की कोई विशेष सलाह न हो।

कौन से रूटीन टेस्ट हैं जरूरी?

हर स्वस्थ दिखने वाले इंसान को बिना किसी कारण के दर्जनों महंगे मेडिकल टेस्ट करवाने की जरूरत नहीं होती। इसके बजाय कुछ बुनियादी स्वास्थ्य पैमानों पर नजर रखना ज्यादा फायदेमंद है:

  • ब्लड प्रेशर (Blood Pressure)
  • ब्लड शुगर या HbA1c टेस्ट
  • लिपिड प्रोफाइल (Lipid Profile)

युवावस्था की शुरुआत से ही इन बुनियादी जांचों को अपने रूटीन का हिस्सा बना लेना चाहिए। ईसीजी, स्ट्रेस टेस्ट, इकोकार्डियोग्राफी या कोरोनरी कैल्शियम स्कैन जैसी जांचें तभी उपयोगी होती हैं जब कोई विशेष चिकित्सीय सवाल सामने हो। इसे हर हेल्दी वयस्क के लिए आँख मूँदकर किया जाने वाला रूटीन टेस्ट नहीं बनाया जाना चाहिए।

डाइट को लेकर फैला भ्रम: क्या चीनी और तेल वाकई जहर हैं?

शोमित ने अपने अनुभव साझा करते हुए चीनी और तेल के सेवन को कम करने की सलाह दी थी। इस पर डॉ. तक्सांडे का नजरिया थोड़ा और व्यावहारिक और वैज्ञानिक है। उनका मानना है कि पोषण (Nutrition) से जुड़े विषयों को अक्सर जरूरत से ज्यादा ध्रुवीकृत (Polarizing) बना दिया जाता है। किसी एक चीज को सीधे तौर पर 'जहर' कह देना या किसी एक कुकिंग ऑयल को पूरी तरह सुरक्षित और दूसरे को पूरी तरह खतरनाक बता देना पोषण विज्ञान का सरलीकरण करना है।

चीनी, विशेष तौर पर अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों (Sugary Drinks) और प्रोसेस्ड फूड्स के जरिए शरीर में जाने पर वजन बढ़ा सकती है, इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा कर सकती है और डायबिटीज व ट्राइग्लिसराइड्स के स्तर को बढ़ा सकती है। इसी तरह, कुकिंग ऑयल के मामले में भी मात्रा और गुणवत्ता दोनों का ध्यान रखना जरूरी है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि:

  • संतृप्त (Saturated) और ट्रांस फैट (Trans Fats) का सेवन कम से कम करें।
  • असंतृप्त वसा (Unsaturated Fats) को प्राथमिकता दें।
  • एक ही तेल को बार-बार गर्म करने और दोबारा इस्तेमाल करने से बचें।
  • दिल किसी एक सिंगल इंग्रीडिएंट पर रिएक्ट नहीं करता, बल्कि यह सालों की हमारी खान-पान की आदतों का परिणाम होता है।

व्यायाम, नींद और मानसिक शांति

दिल को दुरुस्त रखने के लिए सिर्फ जिम में पसीना बहाना ही जरूरी नहीं है। सप्ताह में 4 से 5 बार 30 से 45 मिनट की मध्यम शारीरिक गतिविधि (Moderate Physical Activity) पर्याप्त होती है। इसके लिए आपको मैराथन दौड़ने की कोई जरूरत नहीं है। तेज चलना (Brisk Walking) भी आपके दिल की सेहत के लिए चमत्कारी साबित हो सकता है। यहां सबसे जरूरी चीज निरंतरता (Consistency) है, न कि अति-व्यायाम।

इसके साथ ही, पर्याप्त नींद और तनाव प्रबंधन (Stress Management) भी दिल की सेहत के दो सबसे बड़े स्तंभ हैं। हर रात 7 से 9 घंटे की अच्छी और गहरी नींद न केवल आपके मेटाबॉलिज्म को सुधारती है, बल्कि कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ को भी सुरक्षित रखती है।

निष्कर्ष यही है कि दिल की सेहत को लेकर कोई शॉर्टकट नहीं होता। कम उम्र में आने वाले हार्ट अटैक से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका अवेयरनेस, समय पर बुनियादी जांच और एक संतुलित जीवनशैली है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। अपनी जीवनशैली में किसी भी तरह का बड़ा बदलाव करने या नया रूटीन अपनाने से पहले अपने चिकित्सक या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

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अल्का सिंह

अल्का सिंह

Senior Content Writer

अल्का सिंह स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर गहन शोध के साथ लेखन करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को केवल सामान्य जानकारी ही नहीं, बल...

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