राजस्थान के धौलपुर जिले से एक बेहद खास और आस्तिक तस्वीर सामने आई है। यहाँ के सरमथुरा कस्बे में स्थित भगवान महाकाल का मंदिर इन दिनों न केवल अपनी धार्मिक महत्ता के कारण, बल्कि स्थानीय लोगों की अटूट आस्था के चलते केंद्र बिंदु बना हुआ है। रविवार के दिन इस पावन दरबार में भक्तों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पूरा इलाका 'हर हर महादेव' के जयकारों से गूंज उठा। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान महाकाल के दरबार में मत्था टेककर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
सैकड़ों साल पुरानी परंपरा और गहरी आस्था का केंद्र
सरमथुरा कस्बे का यह भगवान महाकाल मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की प्राचीन विरासत और सामूहिक विश्वास का जीवंत प्रतीक है। स्थानीय लोगों का मानना है कि महाकाल के दर्शन मात्र से न केवल आत्मिक बल मिलता है, बल्कि मन को एक अलग ही शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। इस मंदिर के साथ इलाके की कई पीढ़ियों की भावनाएं जुड़ी हुई हैं।
रविवार के इस विशेष दिन पर महिलाओं, बहन-बेटियों और बच्चों ने बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर हाजिरी लगाई। बच्चों की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की रक्षा के लिए महिलाओं ने महाकाल बाबा के दरबार में रक्षा सूत्र (रक्षा डोर) बांधा। इस दौरान पारंपरिक अनुष्ठानों और पूजन का दौर पूरे दिन चलता रहा, जिससे पूरे कस्बे का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।
उत्तर प्रदेश के सोरों से लाई गई कांवड़, हुआ गंगाजल से अभिषेक
शिव भक्तों की निष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के सोरों से पवित्र गंगाजल लेकर कांवड़िए पैदल सरमथुरा पहुंचे। इन शिव भक्तों ने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान महाकाल का गंगाजल से महाभिषेक किया। हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों के साथ जब जलाभिषेक हुआ, तो पूरा मंदिर परिसर शिवमय हो गया। भक्तों का यह उत्साह इस बात का गवाह है कि आधुनिकता की दौड़ के बावजूद आज भी हमारी प्राचीन संस्कृति और धार्मिक परंपराएं उतनी ही जीवंत हैं।
नवनिर्वाचित चेयरमैन ने की विशेष पूजा-अर्चना
इस पावन अवसर पर नवनिर्वाचित चेयरमैन रामकला ने अपने परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से भगवान महाकाल की पूजा-अर्चना की। उन्होंने मंदिर में भव्य ध्वजा चढ़ाकर क्षेत्रवासियों की खुशहाली और तरक्की का आशीर्वाद मांगा।
इस दौरान चेयरमैन प्रतिनिधि गिर्राजसिंह गुर्जर ने भगवान महाकाल की महिमा का बखान करते हुए कहा कि देव, मानव और दानव—सभी के गुरु भगवान महाकाल ही हैं। उन्होंने कहा, "शिव ज्ञान, तप, योग, वैराग्य और सत्य के सर्वोच्च प्रतीक हैं। भगवान शिव का स्वरूप निराकार और साकार दोनों रूपों में है। सृष्टि की उत्पत्ति, पालन और संहार—ये तीनों महाकाल के ही अधीन हैं। यही कारण है कि बहन-बेटियां अपने बच्चों के सुखी जीवन और दीर्घायु के लिए उनके दरबार में मन्नतें मांगती हैं और रक्षासूत्र बांधती हैं।"
सौ साल पुराना इतिहास और इस बार मेले का बदला स्वरूप
सरमथुरा के इस ऐतिहासिक महाकाल मेले का इतिहास लगभग सौ साल पुराना है। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होने वाले इस सात दिवसीय मेले की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परम्परा को स्थानीय लोगों ने एक सदी बीत जाने के बाद भी पूरी शिद्दत के साथ संजो कर रखा है।
आम तौर पर इस मेले का भव्य आयोजन स्थानीय नगरपालिका की ओर से किया जाता है, लेकिन इस वर्ष प्रशासनिक और स्थानीय परिस्थितियों के चलते मेले के स्वरूप में बदलाव देखा गया। निकाय चुनाव की आचार संहिता और धौलपुर-करौली टाइगर सेंचुरी के विरोध को लेकर चल रहे स्थानीय आंदोलनों के कारण प्रशासन ने इस वर्ष पारंपरिक मेले के आधिकारिक आयोजन को स्थगित करने का निर्णय लिया था। हालांकि, प्रशासनिक रोक के बावजूद लोगों की आस्था और श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई। मेले का आधिकारिक टेंट-शामियाना भले न सजा हो, लेकिन भक्तों की भीड़ ने यह साबित कर दिया कि भगवान के प्रति उनका प्रेम किसी प्रशासनिक आदेश का मोहताज नहीं है।
सुरक्षा और शांति व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम
रविवार को उमड़ी भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय थाना पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई। कानून व्यवस्था बनाए रखने और यातायात को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया था। पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के चलते हज़ारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन किए और अनुष्ठान संपन्न किए।
मौजूद रहे क्षेत्र के गणमान्य लोग
इस धार्मिक आयोजन और दर्शन के दौरान सरमथुरा के तमाम प्रबुद्ध नागरिक और स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व सरपंच केदारसिंह मीणा, देवेन्द्र फागना, संजय अग्रवाल, सूआलाल गर्ग, भोलासिंह जादौन, गजानंद सोनी, राधेश्याम गर्ग, प्रयागसिंह जादौन, द्वारिका प्रसाद मिश्र, हरीचरन शर्मा, संतोष मंगल, भूदेव शर्मा, गोपालसिंह जादौन, बंटी यादव और सुभाष झा सहित सैकड़ों की संख्या में महाकाल भक्त मौजूद रहे जिन्होंने भगवान का आशीर्वाद प्राप्त किया।
धौलपुर का यह आयोजन एक बार फिर यह संदेश दे गया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय जनमानस की आस्था अपनी जड़ों से जुड़ी रहती है और भगवान महाकाल की कृपा इस पूरे अंचल पर हमेशा बनी हुई है।