गर्मी के मौसम के दस्तक देने से पहले ही महाराष्ट्र के अकोला जिले से एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। जिले की जीवन रेखा कहे जाने वाले काटेपूर्णा प्रकल्प में जल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है, जिसके चलते आने वाले दिनों में विकट जलसंकट की आशंका मंडराने लगी है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए अकोला महानगरपालिका (मनपा) ने अभी से कमर कस ली है और पानी की बर्बादी को रोकने के लिए कई सख्त व कड़े निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि पानी का दुरुपयोग रोका नहीं गया, तो स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है.
काटेपूर्णा प्रकल्प में बचा है मात्र 17.38 प्रतिशत जलसंचय
हालिया आंकड़ों के अनुसार, काटेपूर्णा प्रकल्प में अब केवल 17.38 प्रतिशत उपयोगी जलसंचय ही शेष बचा है। मनपा आयुक्त डॉ. सुनील लहाने द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस प्रकल्प में कुल 15.01 दलघमी (मिलियन क्यूबिक मीटर) पानी ही उपलब्ध है। जल भंडारण में आई इस भारी गिरावट के कारण शहर में पेयजल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सख्त कदम उठाने का निर्णय लिया है, ताकि मानसून आने तक शहर के नागरिकों को पीने का पानी सुलभ कराया जा सके।
निर्माण कार्य और कार वॉशिंग पर पूरी तरह से प्रतिबंध
पानी की एक-एक बूंद को बचाने के लिए मनपा प्रशासन ने व्यावसायिक और निर्माण गतिविधियों पर नकेल कस दी है। नए मकानों के निर्माण, प्लास्टर, स्लैब की भराड़ी और क्यूरिंग (तराई) जैसे कार्यों में अब महानगरपालिका के नल के पानी के इस्तेमाल पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
इसके साथ ही:
- शहर के सभी कार वॉशिंग सेंटर, सर्विस सेंटर और ऑटोमोबाइल क्लीनिंग यूनिट्स में नल के पानी के उपयोग पर पाबंदी लगा दी गई है।
- होटल, लॉज, मंगल कार्यालय, स्विमिंग पूल और लॉन्स में भी पेयजल के व्यावसायिक इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया गया है।
- इन संस्थानों को अब शिलोडा और पीकेवी परिसर स्थित मलजल शुद्धीकरण केंद्रों (STP) से मिलने वाले उपचारित (Treated) पानी का ही उपयोग करना अनिवार्य होगा।
- यदि कोई नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सीधी आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
सोसायटियों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए नई गाइडलाइंस
अपार्टमेंट, हाउसिंग सोसायटियों और कॉलोनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे उपलब्ध जल भंडार के हिसाब से ही प्रतिदिन पानी का वितरण करें। पानी की टंकियों को ओवरफ्लो होने से बचाने के लिए ऑटोमैटिक कट-ऑफ सिस्टम या स्वचालित प्रणाली लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके अलावा होटलों और रेस्टोरेंट के लिए भी अनूठे निर्देश जारी किए गए हैं। रेस्तरां और खान-पान की दुकानों में ग्राहकों को पीने के लिए शुरुआत में केवल आधा गिलास पानी देने की सलाह दी गई है, ताकि पानी की बर्बादी को थामा जा सके। सभी व्यावसायिक संस्थानों और शैक्षणिक परिसरों के नलों में एरेटर नोजल लगाना भी अनिवार्य कर दिया गया है।
सख्त दंडात्मक कार्रवाई और अवैध कनेक्शन पर हंटर
मनपा प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी नागरिक या संस्था द्वारा पेयजल का उपयोग वाहन धोने, आंगन साफ करने, सड़क धोने या निर्माण कार्यों में किया जाता है, तो उनके खिलाफ भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा:
- अवैध नल कनेक्शन और पानी की चोरी करने वालों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाकर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
- नलों में सीधे मोटर लगाकर पानी खींचने पर पूरी तरह रोक है।
- हर नल में टोंटी (Tap) या वाल्व लगाना अनिवार्य किया गया है, नियम न मानने पर कनेक्शन तुरंत काट दिया जाएगा।
आम जनता से अपील: पानी बचाने की आदत डालें
प्रशासन ने नागरिकों से व्यक्तिगत स्तर पर भी पानी की बचत करने की अपील की है। स्नान के लिए शॉवर के बजाय बाल्टी और मग का उपयोग करने, ब्रश करते या दाढ़ी बनाते समय नल को खुला न छोड़ने, तथा घरों में पानी के किसी भी लीकेज को तुरंत ठीक करवाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा, रसोईघर में सब्जी और चावल धोने के बाद बचे हुए पानी का उपयोग पौधों में डालने तथा वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल हफ्ते में सीमित बार करने का आग्रह किया गया है।
पानी की बर्बादी की सूचना के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी
अकोला महानगरपालिका ने शहरवासियों से सतर्क रहने और जल संरक्षण में सहयोग करने की अपील की है। यदि कहीं भी पाइपलाइन फटने, नल से लीकेज होने या मनपा के पानी का गलत इस्तेमाल होने की बात सामने आती है, तो नागरिक तुरंत नियंत्रण कक्ष के फोन नंबर 0724-2434412 पर संपर्क कर इसकी सूचना दे सकते हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम पूरी तरह से गोपनीय रखा जाएगा।