देशभर में जब एक ओर युवाओं को नशे की जकड़ से बाहर निकालने के लिए बड़े-बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं और सरकारें पुनर्वास केंद्रों के जरिए समाज को बचाने की बात कर रही हैं, वहीं उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से एक ऐसी हैरान करने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला अलीगढ़ जिले के टप्पल थाना क्षेत्र का है, जहां नशामुक्ति केंद्र के नाम पर चल रहे कथित खेल का पर्दाफाश तब हुआ जब खुद 'नशामुक्ति के रखवाले' ही नशे की हालत में पाए गए। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसे देखने के बाद हर कोई यही कह रहा है कि जब डॉक्टर ही बीमार हो जाए, तो मरीज का क्या होगा?
अलीगढ़-पलवल हाईवे पर रात के अंधेरे में हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, टप्पल थाना क्षेत्र के अंतर्गत अलीगढ़-पलवल हाईवे पर स्थित एक नशामुक्ति केंद्र की टीम बीती रात कुछ युवकों को उनके घरों से उठाने या केंद्र पर लाने के लिए पहुंची थी। लेकिन जिस अंदाज में यह टीम वहां पहुंची, उसने स्थानीय लोगों के कान खड़े कर दिए। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि केंद्र से आए ये लोग खुद इस कदर नशे की गिरफ्त में थे कि उनके अपने पैरों पर खड़े होना भी मुश्किल हो रहा था। ऐसी हालत में जब वे युवाओं को जबरन गाड़ी में ठूंसने लगे, तो वहां भारी हंगामा खड़ा हो गया।
रात के वक्त हाईवे के पास हुए इस ड्रामे ने आसपास के लोगों को इकट्ठा कर लिया। लोगों का गुस्सा उस वक्त सातवें आसमान पर पहुंच गया जब उन्होंने देखा कि जो लोग दूसरों को नशे की बुरी लत से आजाद कराने का दावा करते हैं, वे खुद होश की स्थिति में नहीं हैं। मौके पर जमकर खींचतान हुई और इसी दौरान किसी ने इस पूरे वाकये का वीडियो अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जो अब इंटरनेट पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
जबरन अगवा करने की कोशिश और वसूली के गंभीर आरोप
यह मामला सिर्फ नशे में धुत होने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े आरोप बेहद डरावने और गंभीर हैं। स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों का आरोप है कि इस नशामुक्ति केंद्र से जुड़े कारिंदे अक्सर गांवों में धमकियां देते हैं और युवकों को जबरन अपने साथ खींचकर ले जाने का प्रयास करते हैं। आरोप यह भी है कि इस पूरे खेल के पीछे एक बड़ा वसूली रैकेट काम कर रहा है।
ग्रामीणों का दावा है कि पहले तो कमजोर या नशे के आदी लड़कों को डरा-धमकाकर या जबरदस्ती केंद्र ले जाया जाता है, और उसके बाद उनके डरे-सहमे परिजनों से इलाज और रख-रखाव के नाम पर भारी-भरकम रकम वसूली जाती है। अगर परिवार पैसे देने में आनाकानी करता है, तो उनके साथ मनमानी की जाती है। इस प्रकार की कार्यप्रणाली किसी सेवा भाव की नहीं, बल्कि एक संगठित उगाही जैसी प्रतीत होती है जो सीधे तौर पर मासूम युवाओं और उनके परिवारों के जीवन के साथ खिलवाड़ है।
सेवानिवृत्त दरोगा के संचालन पर उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरे विवाद के सामने आने के बाद जब तहकीकात की गई तो एक और चौकाने वाला तथ्य सामने आया। चर्चा है कि जिस नशामुक्ति केंद्र को लेकर यह हंगामा मचा हुआ है, उसका संचालन उत्तर प्रदेश पुलिस के एक सेवानिवृत्त दरोगा (Retired Sub-Inspector) द्वारा किया जा रहा है। एक तरफ जहां पुलिस विभाग और कानून के रखवाले समाज को अपराध और नशे से मुक्त कराने की शपथ लेते हैं, वहीं यदि विभाग से रिटायर हुआ कोई अधिकारी इस तरह के संदिग्ध केंद्र का संचालन करे, तो आम जनता का सिस्टम से भरोसा उठना लाजिमी है।
सवाल यह उठता है कि क्या इस केंद्र के पास स्वास्थ्य विभाग और समाज कल्याण विभाग के वैध लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन मौजूद थे? क्या वहां रखे जाने वाले मरीजों के लिए तयशुदा सरकारी गाइडलाइंस का पालन किया जा रहा था? केंद्र के भीतर किस प्रकार की चिकित्सा और मनोचिकित्सा पद्धतियां अपनाई जा रही थीं, इसकी आड़ में असल में क्या खेल चल रहा था? इन तमाम सवालों ने स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
प्रधानमंत्री की मुहिम को लग रहा है पलीता
गौरतलब है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए देश के युवाओं से विशेष अपील की थी कि वे नशे की घातक लत को त्यागकर राष्ट्र निर्माण में अपनी सार्थक भूमिका निभाएं। देश भर में सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर एंटी-ड्रग कैंपेन चलाए जा रहे हैं ताकि युवा पीढ़ी को बर्बाद होने से बचाया जा सके। ऐसे संवेदनशील और गंभीर राष्ट्रीय अभियान के दौर में अलीगढ़ जैसी घटनाएं पूरे सिस्टम के मुंह पर एक तमाचा हैं।
जब नशे से मुक्ति दिलाने वाली संस्थाएं ही खुद एक समस्या बन जाएं और लोगों के उत्पीड़न का जरिया बन बैठें, तो भला युवा और उनके परिजन कहां जाएं? इस प्रकार के फर्जी या अनियंत्रित केंद्र न केवल सरकार की अच्छी सोच को पलीता लगा रहे हैं, बल्कि समाज में अविश्वास का माहौल भी पैदा कर रहे हैं।
प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं सबकी निगाहें
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने और मीडिया में खबरें आने के बाद अब अलीगढ़ जिला प्रशासन, पुलिस के आला अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग पर भारी दबाव बन गया है। आम जनता और बुद्धिजीवियों का सवाल है कि क्या इस तथाकथित नशामुक्ति केंद्र के खिलाफ कोई ठोस और कड़ी कार्रवाई होगी? क्या इसकी जमीन और कागजातों की निष्पक्ष जांच की जाएगी?
- क्या केंद्र संचालक सेवानिवृत्त दरोगा से पूछताछ की जाएगी?
- क्या जबरन वसूली और युवाओं को अगवा करने के प्रयासों की एफआईआर दर्ज होगी?
- क्या जिले में चल रहे अन्य निजी नशामुक्ति केंद्रों की भी औचक जांच की जाएगी?
फिलहाल, स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अमला मामले की अंदरखाने जांच में जुट गया है, लेकिन जनता को औपचारिक आश्वासनों से ज्यादा एक कठोर मिसाल पेश किए जाने की उम्मीद है। यदि ऐसे अवैध और संदेहास्पद केंद्रों पर समय रहते ताले नहीं लगाए गए, तो यह न सिर्फ युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ होगा, बल्कि कानून के इकबाल पर भी एक बड़ा धब्बा बना रहेगा। आने वाले दिनों में देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।
