किचन का बजट एक बार फिर से बिगड़ना तय है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले आम जनता को महंगाई का बड़ा झटका लगा है। देश के प्रमुख डेरी ब्रांड्स ने दूध की कीमतों में 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी कर दी है। बढ़ी हुई ये नई दरें आने वाले कल यानी 1 अक्टूबर से पूरे देश में प्रभावी हो जाएंगी। इस फैसले के बाद अब उपभोक्ताओं को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अधिक जेब ढीली करनी पड़ेगी।
अचानक क्यों बढ़ाने पड़े दाम? डेरी संगठनों का पक्ष
डेरी उद्योग से जुड़े जानकारों और कंपनियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से इनपुट कॉस्ट यानी उत्पादन लागत में लगातार भारी इजाफा हो रहा था। मवेशियों के चारे की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ तेजी आई है, इसके अलावा परिवहन (ट्रांसपोर्टेशन) और पैकेजिंग लागत भी काफी बढ़ चुकी है। किसानों से दूध खरीद की लागत बढ़ने के कारण कंपनियों के लिए पुराना रेट बनाए रखना असंभव सा हो गया था। यही वजह है कि मजबूरी में कीमतों में यह संशोधन करना पड़ा है।
ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों को उचित मुनाफा देने और सप्लाई चेन को निर्बाध रूप से चालू रखने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया था। हालांकि, इस बढ़ोतरी से आम मध्यम वर्ग और खासकर बड़े परिवारों की मासिक ग्रोसरी का बजट निश्चित तौर पर प्रभावित होगा।
कौन-कौन से वैरिएंट होंगे महंगे?
मिली जानकारी के मुताबिक, इस बढ़ोतरी का असर दूध के सभी प्रमुख श्रेणियों पर देखने को मिलेगा:
- फुल क्रीम दूध: अब सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला फुल क्रीम मिल्क 3 रुपये प्रति लीटर महंगा मिलेगा।
- टोंड मिल्क: रोजमर्रा के उपयोग वाले टोंड दूध के पैकेट पर भी कीमत में 2 से 3 रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- डबल टोंड और काऊ मिल्क: गाय का दूध और डबल टोंड दूध भी संशोधित दरों के साथ बाजार में उपलब्ध होगा।
त्योहारी सीजन पर पड़ा सीधा असर
भारत में अक्टूबर का महीना त्योहारों की शुरुआत का माना जाता है। ऐसे में ठीक 1 अक्टूबर से दूध के दाम बढ़ना आम आदमी के लिए किसी दोहरी मार से कम नहीं है। मिठाइयों, पकवानों और व्रत के व्यंजनों में दूध और उससे बने उत्पादों (जैसे पनीर, खोया, मक्खन) की खपत सबसे ज्यादा होती है। दूध महंगा होने से अब बाजार में मिलने वाली मिठाइयों के भी महंगे होने की पूरी आशंका जताई जा रही है।
आम जनता की प्रतिक्रिया और चिंताएं
राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों ने इस बढ़ोतरी पर अपनी गहरी चिंता जाहिर की है। गृहिणियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में दाल, तेल, सब्जियां और एलपीजी सिलिंडर के दाम पहले ही आसमान छू रहे थे, और अब दूध जैसी बुनियादी जरूरत के महंगा होने से घर चलाना और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है।
"घर का बजट पहले से ही चरमराया हुआ है। महीने के अंत में बचत करना नामुमकिन होता जा रहा है। बच्चों के लिए दूध जरूरी है, इसलिए कटौती भी नहीं की जा सकती। सरकार और कंपनियों को आम आदमी की इस परेशानी को समझना चाहिए।" - प्रियंका शर्मा, गृहिणी
क्या आगे और बढ़ेंगे दाम?
अर्थशास्त्रियों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में चारे की कीमतों और महंगाई पर लगाम नहीं लगी, तो आने वाले महीनों में डेयरी सेक्टर पर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि, अभी तक किसी भी बड़ी कंपनी ने आगे और दाम बढ़ाने को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी सलाह
1 अक्टूबर से लागू हो रही इन नई कीमतों के बाद, अब आपको अपने लोकल बूथ या किराना स्टोर पर चुकाई जाने वाली राशि का हिसाब दोबारा लगाना होगा। अगर आप मंथली पास या एडवांस पेमेंट का विकल्प चुनते हैं, तो अपने वेंडर से नई दरों की पर्ची जरूर जांच लें ताकि किसी भी प्रकार की भ्रम की स्थिति से बचा जा सके।
महंगाई के इस दौर में जरूरत इस बात की है कि घरेलू बजट में थोड़ा बदलाव किया जाए और खाद्य पदार्थों की बर्बादी को रोककर खर्चों को संतुलित किया जाए।