यात्रियों के लिए बड़ी राहत: साल 2030 तक दिल्ली एयरपोर्ट पर शुरू होगी हाई-स्पीड इंटर-टर्मिनल ट्रेन
हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले कुछ सालों में दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGIA) पर सफर का अनुभव पूरी तरह से बदलने वाला है। अक्सर अलग-अलग टर्मिनलों के बीच की दूरी तय करने में यात्रियों को जो भारी ट्रैफिक और लंबी शटल बस यात्राओं की झंझट झेलनी पड़ती थी, वह अब इतिहास बनने जा रही है। साल 2030 तक देश के सबसे व्यस्त इस एयरपोर्ट पर एक अत्याधुनिक इंटर-टर्मिनल ट्रेन सेवा शुरू करने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है।
इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले यात्रियों को एक सहज, निर्बाध और तेज यात्रा का अनुभव कराना है। आइए जानते हैं कि इस प्रोजेक्ट से जुड़ी मुख्य बातें क्या हैं और यह किस तरह से यात्रियों का समय बचाने में मददगार साबित होगा।
क्या है ऑटोमैटेड पीपल मूवर (APM) सिस्टम?
नागरिक उड्डयन और एयरपोर्ट प्रबंधन से जुड़े सूत्रों के अनुसार, दिल्ली एयरपोर्ट पर जो रैपिड ट्रांजिट सिस्टम लाया जा रहा है, उसे तकनीकी भाषा में ऑटोमैटेड पीपल मूवर (APM) कहा जाता है। यह एक ड्राइवरलेस (चालक रहित) ट्रेन प्रणाली होगी, जो मेट्रो या मोनोरेल की तर्ज पर पूरी तरह से स्वचालित होगी।
इस पूरी परियोजना के तहत लगभग 7.3 किलोमीटर लंबा एक डेडिकेटेड ट्रैक बिछाया जाएगा। यह ट्रैक एयरपोर्ट के सभी प्रमुख टर्मिनलों को आपस में जोड़ेगा, जिससे किसी एक टर्मिनल से उतरकर दूसरे टर्मिनल पर उड़ान पकड़ने वाले यात्रियों को सड़क मार्ग की भीड़भाड़ से पूरी तरह मुक्ति मिल जाएगी।
7.3 किलोमीटर का ट्रैक और समय की बचत
मौजूदा समय में एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल (जैसे टर्मिनल 1 से टर्मिनल 3 या टर्मिनल 2) जाने के लिए सड़क मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है। पीक आवर्स के दौरान ट्रैफिक जाम के कारण कई बार यात्रियों की कनेक्टिंग फ्लाइट छूटने का खतरा भी बना रहता है। इस नई 7.3 किलोमीटर लंबी रैपिड ट्रांजिट प्रणाली के शुरू हो जाने के बाद, यह दूरी महज कुछ ही मिनटों में तय कर ली जाएगी।
- समय की भारी बचत: यात्रियों को अब ट्रैफिक में फंसने का डर नहीं रहेगा। ट्रेन का सफर तय समय पर और बेहद तेज होगा।
- निर्बाध कनेक्टिविटी: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के बीच ट्रांजिट करने वाले यात्रियों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं होगा।
- लगेज के साथ आसानी: भारी-भरकम सामान के साथ शटल बसों में धक्के खाने की मजबूरी खत्म होगी, क्योंकि इस ट्रेन में यात्रियों और उनके सामान की सुगम आवाजाही का खास ख्याल रखा जाएगा।
वैश्विक स्तर के एयरपोर्ट्स की तर्ज पर दिल्ली
दुनिया के कई बड़े और व्यस्त अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों जैसे लंदन हीथ्रो, सिंगापुर चांगी, और अटलांटा पर पहले से ही इस तरह की इंटर-टर्मिनल ट्रेन सेवाएं मौजूद हैं। अब इसी वैश्विक और आधुनिक तर्ज पर दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को भी अपग्रेड किया जा रहा है। साल 2030 तक इस प्रोजेक्ट के धरातल पर उतरने से भारत का यह सबसे बड़ा एविएशन हब दुनिया के चुनिंदा चुस्त-दुरुस्त एयरपोर्ट्स की पंक्ति में मजबूती से खड़ा हो जाएगा।
यात्रियों के अनुभव में आएगा क्रांतिकारी बदलाव
एविएशन सेक्टर के जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे भारत में हवाई यात्रा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, वैसे-वैसे बुनियादी ढांचा (Infrastructure) को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी हो गया है। दिल्ली एयरपोर्ट पर प्रतिदिन लाखों यात्री आते-जाते हैं। ऐसे में, साल 2030 का यह लक्ष्य न केवल पैसेंजर मूवमेंट को आसान बनाएगा, बल्कि एयरपोर्ट के भीतर होने वाली रश और कंजेशन की समस्या को भी जड़ से खत्म करने में मदद करेगा।
भले ही इस प्रोजेक्ट को पूरा होने में अभी कुछ साल का वक्त बाकी है, लेकिन इसकी घोषणा ने ही यात्रियों के बीच उत्साह भर दिया है। आने वाले दिनों में इस परियोजना से जुड़ी और भी कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है, जो देश के एविएशन सेक्टर के भविष्य को एक नई दिशा देंगी।