सिनेमा जगत का इतिहास जब भी लिखा जाएगा, सत्तर और अस्सी के दशक की चमक हमेशा पन्नों पर सुनहरी स्याही से उभरेगी। इस दौर में कई ऐसी अभिनेत्रियां आईं जिन्होंने अपनी अदाकारी और खूबसूरती से पर्दा पर राज किया। इनमें एक नाम ऐसा भी है जिसे भारतीय सिनेमा की 'हिट गर्ल' कहा जाता है। हम बात कर रहे हैं दिग्गज अदाकारा आशा पारेख की, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक बाल कलाकार के रूप में की थी और देखते ही देखते वह अपने दौर की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली यानी सबसे महंगी अभिनेत्री बन गईं।
पर्दे पर उनकी मौजूदगी मात्र से फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफलता की गारंटी बन जाती थीं। शम्मी कपूर से लेकर राजेश खन्ना तक, हर बड़े स्टार के साथ उनकी जोड़ी ने पर्दे पर आग लगा दी थी। हालांकि, उनका पेशेवर जीवन जितना चमकदार और सफल रहा, उनका निजी जीवन उतना ही खामोश और तन्हाइयों से घिरा रहा। एक ऐसा सच जिसे उन्होंने कभी छुपाया नहीं, लेकिन उस पर बात करना हमेशा से उनकी निजी पसंद रहा।
बाल कलाकार से लेकर इंडस्ट्री की 'हिट गर्ल' बनने तक का सफर
आशा पारेख का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। छोटी उम्र में ही कला के प्रति उनका झुकाव उन्हें कैमरे के सामने ले आया। बिमल रॉय की फिल्म 'आसमान' में एक चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में उन्होंने अपने अभिनय करियर की नींव रखी थी। इसके बाद निर्देशक मास्टर विनायक की बेटी के रूप में उन्होंने कुछ गुजराती फिल्मों में भी काम किया। लेकिन मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा में उनकी असली पहचान फिल्म 'दिल दे के देखो' से बनी, जिसका निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर नासिर हुसैन ने किया था।
यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई और इसके साथ ही इंडस्ट्री को एक नया सुपरस्टार मिल गया। इसके बाद आशा पारेख ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 'कटी पतंग', 'तीसरी मंजिल', 'आन मिलो सजना', और 'लव इन टोक्यो' जैसी अनगिनत फिल्मों ने उन्हें शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। वह उस दौर की पहली ऐसी अभिनेत्री थीं जिन्हें अपनी शर्तों पर काम करना पसंद था। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि निर्माता-निर्देशक उन्हें साइन करने के लिए मुंहमांगी कीमत देने को तैयार रहते थे।
जब परवान चढ़ा एकतरफा या अधूरा इश्क
कैरियर की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद हर इंसान की तरह आशा पारेख के जीवन में भी प्यार ने दस्तक दी। फिल्म 'दिल दे के देखो' से शुरू हुआ सफर केवल प्रोफेशनल रिश्ता बनकर नहीं रहा, बल्कि यह डायरेक्टर नासिर हुसैन के साथ उनके गहरे जुड़ाव में बदल गया। नासिर हुसैन पहले से ही शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे थे - आयूष हुसैन और नुसरत (आमिर खान के पिता)।
आशा पारेख ने अपनी आत्मकथा 'द हिट गर्ल' (The Hit Girl) में इस बात का खुलकर जिक्र किया है कि उनके जीवन में केवल एक ही पुरुष था और वह थे नासिर हुसैन। उन्होंने अपनी किताब में लिखा था कि वे नासिर हुसैन से बेइंतिहा मोहब्बत करती थीं। हालांकि, उन्होंने कभी भी उनके परिवार को तोड़ने या उनके घर में दखل देने की कोशिश नहीं की। यही कारण था कि उन्होंने नासिर हुसैन के लिए ताउम्र कुंवारी रहने का फैसला किया।
क्यों नहीं की किसी और से शादी?
समाज के दबाव और परिवार की इच्छा के खिलाफ जाकर आशा पारेख ने कभी शादी के बंधन में बंधने का फैसला नहीं किया। कई इंटरव्यू में उन्होंने इस बात को स्वीकार किया कि उन्हें बच्चों से बहुत प्यार था और वे मां बनना चाहती थीं, लेकिन इसके लिए उन्होंने कभी किसी अन्य पुरुष को अपने जीवन में जगह नहीं दी।
- स्वतंत्रता की चाह: आशा पारेख हमेशा से एक आत्मनिर्भर महिला थीं जो अपनी शर्तों पर जीना पसंद करती थीं।
- एकतरफा निष्ठा: नासिर हुसैन के प्रति उनकी भावनाएं इतनी गहरी थीं कि किसी अन्य व्यक्ति के साथ जीवन बिताने की कल्पना करना उनके लिए मुमकिन नहीं था।
- पारिवारिक सम्मान: उन्होंने हमेशा नासिर हुसैन के परिवार का सम्मान किया और कभी भी उनके निजी जीवन में खलल नहीं डाला।
अकेलेपन को बनाया अपनी ताकत
शादी न करने और जीवनभर अकेले रहने का फैसला आसान नहीं होता। उम्र के इस पड़ाव पर अकेलापन कई बार भारी पड़ सकता है, लेकिन आशा पारेख ने इस अकेलेपन को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी जिंदगी को समाज सेवा, डांस और कला के प्रति समर्पित कर दिया। उन्होंने एक सफल डांस अकादमी चलाई और कई नई प्रतिभाओं को तराशा। इसके अलावा, उन्होंने फिल्म सेंसर बोर्ड (CBFC) की अध्यक्ष के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं और इंडस्ट्री के लिए कड़े व सराहनीय कदम उठाए।
सिनेमा में उनके अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा। दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित होने पर पूरे देश ने उनकी कला और उनके संघर्ष को सलाम किया।
एक युग का अंत और अनकही कहानियां
आज के दौर में जब रिश्ते बहुत जल्दी बनते और टूटते हैं, आशा पारेख की यह प्रेम कहानी एक अलग ही मिसाल पेश करती है। यह कहानी किसी फिल्मी ड्रामे से कम नहीं है, जहां प्यार पाने की जिद नहीं बल्कि उसे चुपचाप ताउम्र निभाते रहने की कसौटी थी। भले ही उन्होंने कभी पारंपरिक रूप से सात फेरे नहीं लिए, लेकिन उनके दिल में बसी उस मोहब्बत ने उन्हें जीवनभर अकेला महसूस नहीं होने दिया।
आशा पारेख का जीवन इस बात का प्रमाण है कि सफलता और शोहरत के पीछे एक इंसान का दिल भी होता है, जो अपनी प्राथमिकताओं और फैसलों के साथ जीता है। उनकी यह अनकही और सच्ची दास्तान आज भी बॉलीवुड के गलियारों में सबसे ज्यादा सुनी और सराही जाती है।