भविष्य की गाड़ियों में केवल माइलेज और इंजन देखना काफी नहीं, डिजिटल फीचर्स और सॉफ्टवेयर निभा रहे हैं अहम भूमिका
ऑटोमोबाइल सेक्टर में लगातार बढ़ती तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के संचार के कारण आधुनिक कारें धीरे-धीरे स्मार्टफोन की तरह काम करने वाले डिजिटल डिवाइस बनती जा रही हैं। आने वाले समय में कार खरीदते वक्त केवल इंजन की ताकत, माइलेज या डिजाइन देखना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि गाड़ी के अंदर मिलने वाली डिजिटल सुविधाएं भी खरीदारी के फैसले में बड़ी भूमिका निभाएंगी। कनेक्टेड कार टेक्नोलॉजी, बड़ी टचस्क्रीन, वॉयस कमांड और सॉफ्टवेयर अपडेट ड्राइविंग के पूरे अनुभव को तेजी से बदल रहे हैं।
इस बदलाव का मतलब केवल डैशबोर्ड पर बड़ी स्क्रीन लगाना भर नहीं है। कार का सॉफ्टवेयर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और अन्य उपकरणों के साथ तालमेल भी उतना ही महत्वपूर्ण होता जा रहा है। इस तकनीक से ड्राइवरों को जहां सहूलियत मिल रही है, वहीं इसके कुछ व्यावहारिक पहलुओं और सुरक्षा पहुलओं को समझना भी जरूरी है।
टचस्क्रीन से लेकर वॉयस कमांड तक स्मार्ट होती कारें
पारंपरिक कारों में म्यूजिक सिस्टम और कुछ बुनियादी कंट्रोल ही मुख्य सुविधाएं हुआ करते थे, लेकिन अब आधुनिक मॉडलों में टचस्क्रीन इंफोटेनमेंट सिस्टम, स्मार्टफोन कनेक्टिविटी, नेविगेशन और वॉयस कमांड जैसी एडवांस सुविधाएं मिलना शुरू हो गई हैं। इनकी मदद से ड्राइवर फोन को बार-बार हाथ में लिए बिना कॉल, म्यूजिक और रास्ते की जानकारी प्राप्त कर सकता है। कुछ गाड़ियों में डिजिटल इंस्ट्रूमेंट क्लस्टर भी दिया जा रहा है, जो स्पीड, ड्राइविंग से जुड़े डेटा और नेविगेशन को एक ही जगह पर प्रदर्शित करता है। हालांकि, ये सभी सुविधाएं हर वाहन में मानक के रूप में उपलब्ध नहीं होतीं, बल्कि इनका होना वाहन के मॉडल, वेरिएंट और बाजार पर निर्भर करता है।सॉफ्टवेयर अपडेट और ओवर-द-एयर (OTA) तकनीक
स्मार्टफोन की तरह अब कारों में भी सॉफ्टवेयर अपडेट की भूमिका लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में सॉफ्टवेयर-डिफाइंड व्हीकल (SDV) तकनीक विकसित की जा रही है, जिसमें गाड़ी के कई फीचर्स सॉफ्टवेयर के जरिए नियंत्रित होते हैं। ओवर-द-एयर (OTA) अपडेट की मदद से इंटरनेट के माध्यम से गाड़ी के सॉफ्टवेयर में बदलाव या सुधार किया जा सकता है, जिसके लिए हर बार सर्विस सेंटर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। हालांकि, यह सुविधा वाहन के सिस्टम और कंपनी की नीतियों पर निर्भर करती है। इस बदलती तस्वीर के तहत टोयोटा, होंडा और हुंडई जैसी कंपनियां इस दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं, जिसमें टोयोटा द्वारा अक्टूबर 2026 में अपने अरेने (Arene) सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के विस्तार की योजना भी सामने रखी गई थी।
AI और कनेक्टिविटी से बदल रहा ड्राइविंग अनुभव
भविष्य की कारों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका बड़े पैमाने पर देखने को मिल रही है। इसकी मदद से वॉयस असिस्टेंट को अधिक सहज बनाने, ड्राइवर की प्राथमिकताओं के अनुसार सुविधाएं देने और कार के विभिन्न सिस्टम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में मदद मिलती है। इंटरनेट से जुड़ी कनेक्टेड कारें कुछ परिस्थितियों में वाहन की स्थिति से जुड़ी जानकारी मोबाइल ऐप के माध्यम से भी दिखाती हैं। इस तकनीक का एक व्यावहारिक फायदा यह है कि कार खरीदने के बाद भी उसका डिजिटल अनुभव बेहतर होता रहता है, हालांकि कुछ अतिरिक्त डिजिटल सेवाओं के लिए सब्सक्रिप्शन या सक्रिय इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत पड़ सकती है।
खरीदारी से पहले इन सावधानियों और बातों का रखें ध्यान
तकनीक जितनी उपयोगी है, उसके साथ कुछ सावधानियां बरतना भी आवश्यक है। कार के डैशबोर्ड पर बड़ी स्क्रीन और ढेर सारे डिजिटल कंट्रोल कई बार ड्राइवर का ध्यान सड़क से भटका सकते हैं। अमेरिकी सड़क सुरक्षा एजेंसी (NHTSA) भी ड्राइविंग के दौरान मनोरंजन और नेविगेशन सिस्टम के अत्यधिक उपयोग को ध्यान भटकाने का एक प्रमुख कारण मानती है। इसके अलावा, कनेक्टेड कारों में डेटा सुरक्षा, सॉफ्टवेयर सपोर्ट और अपडेट की लंबी उपलब्धता भी महत्वपूर्ण विषय हैं। इसलिए नई कार खरीदते समय केवल स्क्रीन का आकार देखने के बजाय यह जांचना जरूरी है कि कौन-से फीचर्स वास्तव में उपयोगी हैं, सॉफ्टवेयर अपडेट कितने समय तक मिलेंगे और क्या किसी सेवा के लिए भविष्य में अतिरिक्त शुल्क देना होगा।