जहानाबाद सदर अस्पताल में औचक निरीक्षण के दौरान ड्यूटी से गायब मिले आयुष चिकित्सक और जीएनएम, जिलाधिकारी ने दिए सख्त विभागीय कार्रवाई के निर्देश
बिहार के जहानाबाद जिले में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्ती लगातार बढ़ाई जा रही है। इसी कड़ी में जहानाबाद के जिलाधिकारी छिरिड़ वाई भूटिया ने सोमवार शाम स्थानीय सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। अचानक हुए इस निरीक्षण से स्वास्थ्य महकमे और अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। जांच के दौरान क्यूआरटी में तैनात एक आयुष चिकित्सक और एक जीएनएम बिना किसी पूर्व अनुमति या सूचना के ड्यूटी से गायब पाए गए, जिस पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई और तत्काल प्रभाव से उनका वेतन रोकने का आदेश दिया।
औचक निरीक्षण के दौरान खुली पोल
सोमवार शाम को जब जिलाधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे तो उन्होंने विभिन्न वार्डों और इकाइयों का जायजा लेना शुरू किया। निरीक्षण के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) में तैनात आयुष चिकित्सक डॉ. दिपांकर किशोर रंजन अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित मिले। अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर डॉक्टर के इस तरह गायब मिलने को डीएम ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने मौके पर मौजूद सिविल सर्जन को तत्काल प्रभाव से उक्त चिकित्सक का वेतन रोकने और उनके खिलाफ नियमानुसार विभागीय कार्रवाई के लिए प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जीएनएम उषा कुमारी पर भी गिरी गाज
चिकित्सक के अलावा निरीक्षण के क्रम में जीएनएम उषा कुमारी भी अपनी ड्यूटी से बिना अनुमति नदारद पाई गईं। जिलाधिकारी ने उनकी गैरमौजूदगी पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए उनका वेतन रोकने और सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का आदेश दिया। लगातार मिल रही शिकायतों और प्रशासनिक प्राथमिकताओं के बीच इस तरह की औचक कार्रवाई से स्वास्थ्य कर्मियों में यह स्पष्ट संदेश गया है कि रोस्टर के मुताबिक अपनी उपस्थिति दर्ज कराना और समय पर कार्यस्थल पर मौजूद रहना अनिवार्य है।
कंट्रोल रूम और इमरजेंसी वार्ड का जायजा
अस्पताल परिसर में सिर्फ कमियों की जांच तक ही औचक निरीक्षण सीमित नहीं रहा, बल्कि जिलाधिकारी ने कंट्रोल रूम और इमरजेंसी वार्ड का भी बारीकी से निरीक्षण किया। राहत की बात यह रही कि इन दोनों महत्वपूर्ण स्थानों पर डॉक्टर और अन्य चिकित्साकर्मी अपनी ड्यूटी पर तैनात मिले। इस दौरान डीएम ने अस्पताल में भर्ती और इलाज कराने आए मरीजों से सीधे संवाद किया। उन्होंने मरीजों से अस्पताल में मिल रही चिकित्सा सुविधाओं, डॉक्टरों के बर्ताव, मुफ्त मिलने वाली दवाओं की उपलब्धता और इलाज की समग्र गुणवत्ता के बारे में फीडबैक लिया। अधिकांश मरीजों ने अस्पताल की सेवाओं पर संतोष जाहिर किया।
रोस्टर के पालन का सख्त निर्देश
मरीजों से बातचीत करने के बाद जिलाधिकारी ने अस्पताल प्रबंधन और सिविल सर्जन को कड़े निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी तय ड्यूटी रोस्टर के अनुसार ही अपनी सेवाएं दें। उन्होंने प्रबंधन को निर्देशित किया कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को हर हाल में चुस्त-दुरुस्त रखा जाए और मरीजों की समस्याओं का त्वरित समाधान किया जाए। प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के औचक निरीक्षणों से सरकारी अस्पतालों में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार आता है और कर्मचारियों में जवाबदेही तय होती है।