अघोराचार्य बाबा कीनाराम का जन्मोत्सव सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक जगत में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भव्य पर्व माना जाता है। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के ऐतिहासिक रामगढ़ में आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय पावन अनुष्ठान की तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं। आगामी 10 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले इस विशाल आयोजन को लेकर न केवल प्रशासनिक अमला बल्कि स्थानीय लोग भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहे हैं। इसी कड़ी में, प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लेने के लिए सकलडीहा की उप जिलाधिकारी (एसडीएम) आकांक्षा सिंह ने बुधवार शाम को खुद रामगढ़ पहुंचकर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत का बारीकी से निरीक्षण किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त है बाबा कीनाराम का दरबार
चंदौली जनपद के बलुआ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला रामगढ़ गांव इन दिनों पूरी तरह से आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत है। यहां स्थित अघोराचार्य बाबा कीनाराम का जन्मस्थान देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अघोर पंथ के अनुयायियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल की तरह है। हर साल उनके जन्मोत्सव के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और देश के अन्य हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु और संत-महात्मा यहां पहुंचते हैं।
इस बार भी आयोजन की भव्यता को देखते हुए प्रशासन किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है। भारी जनसैलाब को नियंत्रित करने और आगंतुकों को किसी भी प्रकार की असुविधा से बचाने के लिए महीनों पहले से योजनाएं बनाई जा रही हैं, जिन्हें अब धरातल पर अंतिम रूप दिया जा रहा है।
एसडीएम आकांक्षा सिंह का कड़ा रुख: व्यवस्थाओं का निरीक्षण
बुधवार की शाम को एसडीएम आकांक्षा सिंह ने अचानक रामगढ़ पहुंचकर मेला क्षेत्र, मुख्य मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों का निरीक्षण किया। उनके साथ विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष जोर दिया:
- निर्बाध विद्युत आपूर्ति: जन्मोत्सव के दौरान तीन दिनों तक बिजली की आंख-मिचौली बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसडीएम ने बिजली विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरे क्षेत्र में 24 घंटे सुचारू बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और इसके लिए वैकल्पिक जनरेटरों का भी इंतजाम रखा जाए।
- पेयजल और स्वच्छता: देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सबसे बड़ी प्राथमिकता है। मेला परिसर में कई स्थानों पर पेयजल टैंकरों और वाटर प्यूरीफायर की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, साफ-सफाई के लिए विशेष सफाई कर्मियों की फौज तैनात की जा रही है।
- यातायात प्रबंधन (ट्रैफिक कंट्रोल): भारी भीड़ के कारण लगने वाले जाम से निपटने के लिए रूट डायवर्जन और पार्किंग स्थलों का निर्धारण कर लिया गया है। मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।
"बाबा कीनाराम के जन्मोत्सव में आने वाले हर एक श्रद्धालु की सुरक्षा और सुविधा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर जरा सी भी लापरवाही या सुस्ती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित विभागों को समय सीमा के भीतर अपने कार्य पूरे करने के सख्त निर्देश दे दिए गए हैं।" - आकांक्षा सिंह, उप जिलाधिकारी, सकलडीहा
अवैध गैस रिफिलिंग पर सख्त पाबंदी, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
मेले और भीड़भाड़ वाले आयोजनों में सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा होती है। इसे ध्यान में रखते हुए एसडीएम आकांक्षा सिंह ने स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने को कहा है। असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखने के लिए खुफिया तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है और पूरे मेला परिसर में चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात रहेगा।
सबसे अहम बात यह है कि निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने मेला क्षेत्र और उसके आसपास चल रही अवैध गैस रिफिलिंग जैसी खतरनाक गतिविधियों पर पूरी तरह से नकेल कसने के निर्देश दिए हैं। ऐसी अवैध गतिविधियां किसी भी बड़े हादसे को दावत दे सकती हैं, इसलिए प्रशासन ने इस पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। पकड़े जाने पर संबंधित,दोषियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
श्रद्धालुओं में भारी उत्साह, प्रशासन कर रहा है अपील
जैसे-जैसे 10 सितंबर की तारीख नजदीक आ रही है, रामगढ़ में श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया है। देश के कोने-कोने से आ रहे भक्त बाबा कीनाराम के जयकारों के साथ इस उत्सव को ऐतिहासिक बनाने में जुटे हैं। जिला प्रशासन ने सभी आगंतुकों से अपील की है कि वे प्रशासनिक नियमों का पालन करें, यातायात व्यवस्था में सहयोग दें और किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें।
अघोराचार्य बाबा कीनाराम का यह जन्मोत्सव न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता का भी एक अनूठा संगम है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार का आयोजन पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ते हुए बेहद शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न होगा।