भारतीय शेयर बाजार में सोलर एनर्जी सेक्टर से जुड़ी कंपनियों का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच निवेशकों के लिए एक और नया मौका सामने आया है। सोलर सेक्टर के लिए काम करने वाली कंपनी इन्फ्रैक्स रिन्यूएबल लिमिटेड (Infrax Renewable Limited) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ (IPO) सब्सक्रिप्शन के लिए खुल चुका है। इस आईपीओ का कुल साइज 40.88 करोड़ रुपये का है, जिसे लेकर निवेशकों के बीच शुरुआती स्तर पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
आईपीओ से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखें और शेड्यूल
अगर आप इस आईपीओ में दांव लगाने की सोच रहे हैं, तो समय सीमा का खास ध्यान रखना होगा। कंपनी के इस इश्यू में 11 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है। यानी निवेशकों के पास निवेश का फैसला लेने के लिए सीमित दिन ही हैं।
इश्यू की क्लोजिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद, अलॉटमेंट की तारीख 15 सितंबर तय की गई है। जिन निवेशकों को शेयर आवंटित होंगे, उनके डीमैट खाते में 16 सितंबर तक शेयर क्रेडिट कर दिए जाएंगे। वहीं, बाजार के जानकारों के मुताबिक, कंपनी के शेयर 17 सितंबर को बीएसई (BSE) के एसएमई (SME) प्लेटफॉर्म पर लिस्ट हो सकते हैं। लॉन्चिंग के बाद पहले दिन के कारोबार के अंत तक इस आईपीओ को लगभग 8 प्रतिशत का सब्सक्रिप्शन मिला था।
प्राइस बैंड और निवेश की शर्तें
इन्फ्रैक्स रिन्यूएबल के इस आईपीओ में बोली लगाने के लिए 104 रुपये प्रति शेयर का भाव तय किया गया है। इसके साथ ही इसका लॉट साइज 1,200 शेयरों का रखा गया है।
चूंकि यह एक एसएमई आईपीओ है, इसलिए रिटेल निवेशकों के लिए निवेश का पैमाना थोड़ा बड़ा होता है। इस इश्यू में रिटेल इनवेस्टर्स को कम से कम दो लॉट यानी कुल 2,400 शेयरों के लिए आवेदन करना होगा। इस हिसाब से निवेशकों को न्यूनतम 2,49,600 रुपये का भारी निवेश करना होगा।
आईपीओ का स्ट्रक्चर और शेयर अलॉटमेंट
इस आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले कुल 39,31,200 शेयर बाजार में जारी किए जा रहे हैं। इन्हें दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है:
- फ्रेश इश्यू: इसमें 34 करोड़ रुपये के कुल 32,50,800 नए शेयर जारी किए जा रहे हैं।
- ऑफर फॉर सेल (OFS): इसके जरिए लगभग 7 करोड़ रुपये मूल्य के 6,80,400 शेयर बेचे जा रहे हैं।
निवेशक वर्ग के हिसाब से शेयरों का आरक्षण इस प्रकार है कि रिटेल इनवेस्टर्स के लिए 47.86 प्रतिशत हिस्सा सुरक्षित रखा गया है। वहीं, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) के खाते में 47.07 प्रतिशत हिस्सा गया है। इसके अलावा, मार्केट मेकर के लिए 5.07 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित किया गया है। इस इश्यू के सुचारू संचालन के लिए स्मार्ट हॉरिजॉन कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड को बुक रनिंग लीड मैनेजर, जबकि बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को रजिस्ट्रार बनाया गया है। श्रेणी शेयर्स लिमिटेड इस कंपनी की मार्केट मेकर की भूमिका निभा रही है।
कंपनी की वित्तीय सेहत (Financial Performance)
किसी भी कंपनी के आईपीओ में पैसा लगाने से पहले उसकी वित्तीय स्थिति की गहराई से जांच करना बेहद जरूरी होता है। सेबी (SEBI) के पास जमा कराए गए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) के आंकड़ों के मुताबिक, इन्फ्रैक्स रिन्यूएबल की वित्तीय सेहत में पिछले कुछ वर्षों में शानदार सुधार देखा गया है:
- शुद्ध लाभ (Net Profit): वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को महज 96 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था। यह आंकड़ा अगले वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर सीधे 2.85 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। इसके बाद, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कंपनी का शुद्ध लाभ कई गुना उछलकर 10.20 करोड़ रुपये के शानदार स्तर पर जा पहुंचा।
- राजस्व (Revenue): कंपनी की टॉप-लाइन ग्रोथ भी मजबूत रही है। वित्त वर्ष 2023-24 में कंपनी को 9.66 करोड़ रुपये का कुल राजस्व प्राप्त हुआ था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 30.48 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का कुल राजस्व बढ़कर 93.33 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।
कंपनी पर बढ़ते कर्ज का बोझ
जहां एक तरफ कंपनी का मुनाफा और रेवेन्यू तेजी से बढ़ा है, वहीं दूसरी तरफ इसके कर्ज (Debt) में भी इजाफा देखने को मिला है, जिस पर निवेशकों को गौर करना चाहिए।
वित्त वर्ष 2023-24 के अंत तक कंपनी पूरी तरह से कर्ज मुक्त (Debt-Free) स्थिति में थी। हालांकि, विस्तार योजनाओं और कामकाज को बढ़ाने के चलते अगले वित्त वर्ष 2024-25 में कंपनी पर 3.02 करोड़ रुपये का कर्ज आ गया। इसके अगले यानी पिछले वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें, तो इस अवधि में कंपनी पर लदे कर्ज का बोझ दोगुने से भी अधिक उछलकर 6.99 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
सोलर एनर्जी और रिन्यूएबल सेक्टर का भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा है, और सरकार की ओर से भी इस सेक्टर को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है। इन्फ्रैक्स रिन्यूएबल लिमिटेड के वित्तीय आंकड़े मजबूत विकास को दर्शाते हैं, लेकिन कंपनी पर बढ़ता कर्ज एक ऐसा पहलू है जिस पर निवेशकों को विचार करना चाहिए। एसएमई आईपीओ में जोखिम मुख्यधारा के आईपीओ की तुलना में अधिक होता है, इसलिए किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से परामर्श अवश्य कर लें।