वाराणसी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरती पर इन दिनों उत्सवों की एक अलग ही बयार बह रही है। इसी कड़ी में बुधवार को दुर्गाकुंड स्थित ऐतिहासिक मणि मंदिर, श्रीधर्मसंघ प्रांगण में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में 'छठी महोत्सव' का अत्यंत भव्य और मनमोहक आयोजन किया गया। इस उत्सव ने शहर के धार्मिक परिदृश्य को एक बार फिर से कृष्णमय बना दिया, जहाँ सुबह से लेकर देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
सोहर और बधाई गीतों से गूंज उठा मंदिर परिसर
छठी महोत्सव की शुरुआत पारंपरिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ हुई। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को कान्हा के जन्मोत्सव की असली अनुभूति हो रही थी। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों के बीच जब ख्यात भजन गायक आर्यन बाबू और कृष्ण कुमार तिवारी 'कृष्णा' ने मंच संभाला, तो पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया।
गायकों द्वारा प्रस्तुत किए गए सोहर और बधाई गीतों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन गीतों की हर एक पंक्ति पर महिलाएं और पुरुष श्रद्धालु झूमते नजर आए। तबले पर पंकज राय, ऑर्गन पर रंजन और पैड पर अनिल की बेहतरीन संगति ने इन प्रस्तुतियों में चार चांद लगा दिए। हर तरफ बस कन्हैया की किलकारियों और उनके स्वागत के गीत ही गूंज रहे थे।
झूले पर विराजमान बाल गोपाल के दर्शन कर भाव-विभोर हुए भक्त
उत्सव का सबसे आकर्षण का केंद्र रहा झूले पर विराजमान लड्डू गोपाल का बाल स्वरूप। सखाओं के संग कान्हा की बाल लीलाओं की सुंदर झांकी ने हर आने वाले भक्त का मन मोह लिया। मंदिर में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाल स्वरूप के दर्शन कर अपने जीवन की मंगलकामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद छठी का पर्व उनके बाल रूप के लाड़-प्यार का प्रतीक माना जाता है। मणि मंदिर में इस परंपरा का निर्वहन पूरी भव्यता और पारंपरिक गरिमा के साथ किया गया।
लगभग 11 किलो का मलाई भोग और छप्पन भोग का समर्पण
भगवान श्रीकृष्ण के छठी महोत्सव को और भी खास बनाने के लिए मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। ठाकुर जी को इस अवसर पर भव्य 'छप्पन भोग' अर्पित किया गया, जिसमें विभिन्न प्रकार के पारंपरिक पकवान और मिठाइयां शामिल थीं।
इसके साथ ही आधुनिक केक के स्वरूप में विशेष रूप से तैयार कराया गया लगभग 11 किलो का 'मलाई भोग' भी लड्डू गोपाल को समर्पित किया गया। मंदिर परिसर में सजे इन भोगों की भव्यता देखते ही बनती थी।
"धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी ने श्रद्धालुओं पर गुलाब की पंखुड़ियों की वर्षा कर उत्सव की खुशियां साझा कीं। इस अद्भुत पल ने मंदिर के पूरे वातावरण को पूरी तरह से सुंगधित और दिव्य बना दिया।"
शाम की महाआरती और प्रसाद वितरण
दिनभर चले धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के बाद, सायंकाल धर्मसंघ पीठाधीश्वर स्वामी शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी के पावन सानिध्य में देव विग्रहों की भव्य और अलौकिक आरती उतारी गई। इस दौरान शंखनाद और घंटियों की गूंज से पूरा दुर्गाकुंड क्षेत्र गूंज उठा।
आरती के तुरंत बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच छप्पन भोग और विशेष मलाई भोग का महाप्रसाद वितरित किया गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने कतारबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया और खुद को धन्य महसूस किया।
दिग्गजों और विशिष्ट जनों की रही उपस्थिति
इस धार्मिक और सांस्कृतिक समागम में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए। कलाकारों और विशिष्ट अतिथियों का स्वागत श्रीधर्मसंघ के महामंत्री पंडित जगजीतन पाण्डेय ने अंग वस्त्र और पुष्पगुच्छ भेंट कर किया।
महोत्सव की दिव्यता बढ़ाने के लिए प्रशासन और राजनीति से जुड़े कई बड़े चेहरे भी उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:
- डीआईजी वैभव कृष्ण
- विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी
- राजमंगल पाण्डेय
- कृष्णानंद पाण्डेय
सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इन सभी ने भगवान के दर्शन किए और संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
धार्मिक आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम
वाराणसी में आयोजित इस छठी महोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि सनातन संस्कृति और उत्सवधर्मिता यहाँ के जन-जीवन में कितनी गहराई से रची-बसी है। मणि मंदिर में सुबह से लेकर रात तक चले इन आयोजनों ने न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि समाज के सभी वर्गों को एक सूत्र में पिरोने का काम भी किया। भक्तों ने भगवान से अपने परिवार और शहर की सुख-समृद्धि की प्रार्थना के साथ इस भव्य उत्सव का समापन किया।