डिजिटल युग में जहां शिक्षा की धुरी कंप्यूटर और इंटरनेट के इर्द-गिर्द घूम रही है, वहीं महाराष्ट्र के ठाणे जिले के बदलापुर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो शिक्षा के महत्व को नए आयाम देती है। बदलापुर के कुलगांव-बदलापुर नगरपरिषद स्कूल क्रमांक 1 (गांधी चौक) में अब बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही चमक दिखाई दे रही है। इसका मुख्य कारण है रोटरी क्लब द्वारा इस स्कूल को दी गई एक अनमोल सौगात, जिसने लगभग पांच सौ बच्चों के भविष्य को एक नई राह दिखा दी है।
अंधेरे में डूबी थी कंप्यूटर शिक्षा, ताले में बंद था कक्ष
किसी भी सरकारी या नगरपालिका विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए आधुनिक तकनीक तक पहुंच आसान नहीं होती। बदलापुर नगर पालिका के इस प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय में भी स्थिति कुछ ऐसी ही थी। स्कूल में कंप्यूटर लैब तो थी, लेकिन रख-रखाव के अभाव और तकनीकी खराबी के चलते वहां ताला लगा हुआ था।
हालत यह थी कि स्कूल के पास जो पुराने कंप्यूटर थे, वे या तो पूरी तरह कबाड़ बन चुके थे या फिर इस स्थिति में थे कि उन्हें सुधारा नहीं जा सकता था। नतीजतन, पिछले काफी समय से छात्रों की कंप्यूटर शिक्षा पूरी तरह से ठप पड़ी थी। पांच सौ से अधिक छात्र केवल किताबों के पन्नों तक ही कंप्यूटर की परिभाषा सीमित रखने को मजबूर थे, क्योंकि वे प्रैक्टिकल ज्ञान से पूरी तरह वंचित थे।
मसीहा बनकर आया रोटरी क्लब ऑफ बदलापुर स्मार्ट सिटी
जब इस गंभीर समस्या की भनक रोटरी क्लब ऑफ बदलापुर स्मार्ट सिटी के पदाधिकारियों को लगी, तो उन्होंने बिना एक पल गंवाए इस दिशा में कदम उठाने का फैसला किया। क्लब ने इस चुनौती को एक बड़े सामाजिक प्रोजेक्ट के रूप में लिया और स्कूल की तस्वीर बदलने का बीड़ा उठाया।
प्रोजेक्ट के प्रमुख, रोटेरियन डॉ. बिपिन दुबे ने बिना समय गंवाए गांधी चौक स्थित नगरपरिषद स्कूल क्रमांक 1 का व्यक्तिगत दौरा किया। स्कूल के मुख्याध्यापक ने जब उन्हें कंप्यूटर कक्ष की दयनीय स्थिति से रूबरू कराया और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई, तो क्लब ने तत्काल प्रभाव से मदद का आश्वासन दिया।
दौरे के दौरान तकनीकी टीम ने जब कक्ष की जांच की, तो सामने आया कि:
- स्कूल के पास मौजूद कुल कंप्यूटरों में से 3 पूरी तरह से नष्ट हो चुके थे और उनके सुधरने की कोई उम्मीद नहीं थी।
- अन्य 3 कंप्यूटर ऐसे थे जिन्हें विशेषज्ञ इंजीनियरों द्वारा रिपेयर करके दोबारा उपयोग में लाया जा सकता था।
तीन नए कंप्यूटर और तीन पुराने उपकरणों की हुई कायाकल्प
समस्या की तह तक पहुंचने के बाद रोटरी क्लब ने युद्ध स्तर पर काम शुरू किया। क्लब की तरफ से स्कूल को तत्काल प्रभाव से 3 बिल्कुल नए और आधुनिक कंप्यूटर भेंट किए गए। इसके साथ ही, जो 3 पुराने कंप्यूटर मरम्मत योग्य थे, उन्हें शहर के बेहतरीन तकनीशियनों से ठीक करवाकर पूरी तरह कामकाजी हालत में लाया गया।
इस पूरी प्रक्रिया में 'ज्ञानार्थ एजुकेशनल फाउंडेशन' ने भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और रोटरी क्लब का पूरा सहयोग किया। कुछ ही दिनों के भीतर, जो कंप्यूटर कक्ष वीरान पड़ा था और जिस पर धूल की परतें जमी थीं, वह एक हाई-टेक लैब में तब्दील हो गया।
भव्य उद्घाटन समारोह और गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कंप्यूटर लैब के फिर से शुरू होने पर स्कूल में एक उत्सव जैसा माहौल बन गया। नए और उन्नत कंप्यूटर कक्ष का औपचारिक उद्घाटन स्थानीय गणमान्य अतिथियों के कर-कमलों द्वारा संपन्न हुआ।
इस अवसर पर नगरध्यक्षा रुचिता घोरपडे और उपनगराध्यक्षा प्रियंका दामले विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने हाथों से लैब का उद्घाटन किया और छात्रों के साथ समय बिताया। महिला नेताओं ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के दौर में तकनीकी शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और नगरपरिषद इस दिशा में हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है।
आगे की योजनाएं और सामाजिक सरोकार
उद्घाटन समारोह के दौरान रोटरी कुलगांव के अध्यक्ष एडवोकेट तुषार साटपे ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने घोषणा की कि रोटरी क्लब केवल यहीं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में और भी कई व्यापक सामाजिक और शैक्षणिक प्रोजेक्ट्स पर काम किया जाएगा।
एड. तुषार साटपे ने जानकारी दी कि निकट भविष्य में नगरपरिषद के कर्मचारियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कई हेल्थ कैंप और वेलनेस प्रोजेक्ट्स चलाए जाएंगे, ताकि मेहनतकश कर्मचारियों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।
कार्यक्रम के दौरान रोटरी क्लब के कई अन्य प्रमुख पदाधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को सफल बनाने में अपना योगदान दिया था। इनमें सचिव श्रीकृष्ण मचगर, मंगेश हिंदुराव, पुष्कर कर्नावट, डॉ. प्रियंका डुडेजा, वरुण मौर्या, उमेश कांबले और रानी मिश्रा जैसी जानी-मानी हस्तियां शामिल थीं।
500 से अधिक छात्रों के खिले चेहरे
इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा और सकारात्मक प्रभाव बदलापुर नगरपरिषद स्कूल के 500 से अधिक विद्यार्थियों पर पड़ा है। अब इन बच्चों के लिए कंप्यूटर की दुनिया के दरवाजे खुल चुके हैं। ग्रामीण और अर्ध-शहरी परिवेश से आने वाले इन बच्चों के लिए अब कोडिंग, बेसिक सॉफ्टवेयर और इंटरनेट की दुनिया को समझना आसान हो जाएगा।
शिक्षाविदों का मानना है कि सरकारी और नगरपालिका स्कूलों में यदि इस तरह की निजी और सामाजिक संस्थाएं आगे आकर सहयोग करें, तो देश के सरकारी स्कूलों की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। बदलापुर के इस मॉडल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सच्ची इच्छाशक्ति और समाज के सहयोग से बड़े से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।