प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद अहम खबर सामने आ रही है। महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में एमपीएससी (MPSC) परीक्षाओं के दौरान होने वाले पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों पर स्थायी रूप से लगाम कसने के लिए कमर कस ली है। परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब परीक्षा प्रणाली में आमूल-चूल बदलाव किए जा रहे हैं, जिसके तहत अब प्रश्नपत्र परीक्षा से ठीक पहले तैयार किए जाएंगे।
परीक्षा से ठीक पहले बनेगा प्रश्नपत्र: नया सुरक्षा चक्र
अक्सर देखने में आता है कि परीक्षा से कई दिन या हफ्ते पहले प्रश्नपत्र छपकर सुरक्षित स्थानों पर रख दिए जाते हैं, जिससे उनके लीक होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। इसी कमजोरी को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने एक नई रणनीति बनाई है। अब प्रश्नपत्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया को परीक्षा के बेहद करीब लाया जाएगा।
इस नई व्यवस्था के तहत प्रश्नपत्र तैयार करने, उसकी छपाई, परिवहन और वितरण—इन चारों मुख्य चरणों में व्यापक फेरबदल किए जा रहे हैं। प्रक्रिया को इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि किसी भी एक व्यक्ति या सिंगल एजेंसी के पास पूरे प्रश्नपत्र की एक साथ जानकारी या पहुंच न हो। जब पेपर पहले से उपलब्ध ही नहीं होगा, तो उसके लीक होने की आशंका भी स्वतः समाप्त हो जाएगी।
आगामी एक साल तक नहीं होगी ऑनलाइन परीक्षा
तकनीकी खामियों, साइबर सुरक्षा और मानव संसाधन की सीमाओं को ध्यान में रखते हुए टास्क फोर्स ने बड़ा फैसला लिया है। वर्तमान परिस्थितियों और आयोग की क्षमता का आकलन करते हुए यह तय किया गया है कि आगामी एक वर्ष तक एमपीएससी की कोई भी परीक्षा ऑनलाइन मोड में आयोजित नहीं की जाएगी।
आगामी एक वर्ष के भीतर आयोग की तमाम परीक्षाएं पारंपरिक ओएमआर (OMR) पद्धति के माध्यम से ही कराई जाएंगी। जानकारों का मानना है कि इससे परीक्षा प्रणाली में अधिक पारदर्शिता आएगी और तकनीकी गड़बड़ियों की गुंजाइश भी खत्म होगी।
टास्क फोर्स की अध्यक्ष वी. राधा ने पुणे में साझा की योजना
राज्य में भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को पूरी तरह दुरुस्त करने के लिए एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। सामान्य प्रशासन विभाग की सचिव और इस टास्क फोर्स की अध्यक्ष वी. राधा ने हाल ही में पुणे शहर में मीडिया से बात करते हुए इन तमाम सुधारों की रूपरेखा देश के सामने रखी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा और पूरी परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षा के लिहाज से बेहद मजबूत बनाया जा रहा है।
राजनीतिक हलचल और छात्रों का आक्रोश
महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से एमपीएससी परीक्षाओं से जुड़ा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में एमपीएससी से जुड़ी करीब 15 परीक्षाओं में पेपर लीक या गड़बड़ी के मामले सामने आए हैं, जिससे युवाओं में भारी निराशा और गुस्सा है।
हाल ही में पुणे में एमपीएससी की तैयारी कर रहे एक छात्र प्रथमेश देशमुख की आत्महत्या का मामला सामने आने के बाद राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने धाराशिव के परंडा तहसील स्थित खासापुरी पहुंचकर दिवंगत छात्र के परिजनों से मुलाकात की और सांत्वना दी।
रोहित पवार ने इस दौरान सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पेपर लीक मामलों में सत्ता के करीबी लोगों के तार जुड़े होने की बू आती है और पैसे के बल पर दोषियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने ऑनलाइन परीक्षा का पुरजोर विरोध करते हुए दो टूक कहा कि केवल एक साल नहीं, बल्कि आने वाले सैकड़ों वर्षों तक ऑनलाइन परीक्षाएं नहीं होने दी जानी चाहिए ताकि ग्रामीण और सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ न्याय हो सके।
अब सालभर पहले घोषित होगा परीक्षा कैलेंडर
परीक्षाओं में देरी और तारीखों को लेकर अनिश्चितता हमेशा से अभ्यर्थियों के लिए मानसिक तनाव का बड़ा कारण रही है। इस समस्या से निजात पाने के लिए टास्क फोर्स ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तर्ज पर एक अहम सिफारिश की है।
अब यह विचार किया जा रहा है कि एमपीएससी की सभी आगामी परीक्षाओं का वार्षिक कैलेंडर कम से कम एक साल पहले ही आधिकारिक रूप से जारी कर दिया जाए। इससे छात्रों को अपनी तैयारी के लिए पर्याप्त और निश्चित समय मिल सकेगा तथा उन्हें अंतिम समय की अनिश्चितताओं से नहीं जूझना पड़ेगा।
MPSC सचिव से बदसलूकी के बाद कर्मचारियों का 'काम बंद' आंदोलन
एक तरफ जहां परीक्षा सुधारों पर मंथन चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक महकमे में तनाव का माहौल है। महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग के सचिव महेंद्र हरपालकर के साथ हुई बदसलूकी की घटना के विरोध में आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कड़ा रुख अपनाया है।
कर्मचारियों ने घटना के तुरंत बाद 'काम बंद' आंदोलन शुरू करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। उनका साफ कहना है कि जब तक शासन स्तर से उन्हें ठोस सुरक्षा मुहैया नहीं कराई जाती और सचिव के साथ बदसलूकी करने वाले उपद्रवियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
इन तमाम प्रशासनिक फेरबदल, सुरक्षा उपायों और राजनीतिक उठापटक के बीच यह देखना बेहद अहम होगा कि सरकार के ये नए कदम महाराष्ट्र के लाखों युवाओं के भविष्य को कितना सुरक्षित और पारदर्शी बना पाते हैं।