महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों बयानों के तीर तीखे होते जा रहे हैं और इस बार मामला जुबानी जंग से आगे बढ़कर सीधे पुलिस थाने की दहलीज तक पहुंच गया है। सत्ताधारी गठबंधन के भीतर ही शुरू हुआ यह घमासान अब एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की पार्टी शिवसेना के फायरब्रांड विधायक संजय गायकवाड़ एक बार फिर अपने बयानों के चलते कानूनी शिकंजे में फंस गए हैं। महिलाओं के खिलाफ कथित तौर पर की गई एक आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ बुलढाणा शहर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इस घटनाक्रम ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है और विपक्षी दलों को भी सरकार पर निशाना साधने का मौका दे दिया है।
जन्मदिन के जश्न से शुरू हुई थी रार
यह पूरा विवाद महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले से उपजा है। हाल ही में बुलढाणा शहर में भाजपा की स्थानीय विधायक श्वेता महाले के पति विद्याधर महाले का जन्मदिन काफी भव्य तरीके से मनाया गया था। इस जन्मदिन के मौके पर उनके समर्थकों और मित्रों ने शहर में एक विशाल रैली का आयोजन किया था। इस रैली के दौरान एक लोकप्रिय गाना बजाया गया जिसके बोल थे, 'बाप तो बाप रहेगा…'। यह गाना और इस दौरान किया गया शक्ति प्रदर्शन ही आगे चलकर इस पूरे राजनीतिक ड्रामे की मुख्य वजह बन गया।
कार्यक्रम के दौरान किसी बात को लेकर बिजली गुल हो गई थी, जिसके बाद भाजपा विधायक श्वेता महाले ने बिना किसी का नाम लिए परोक्ष रूप से तंज कसा था। बस यहीं से शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ और श्वेता महाले के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई, जो जल्द ही व्यक्तिगत टिप्पणियों और शाब्दिक हमलों में बदल गई।
मीडिया के सामने दिए गए बयान से भड़का विवाद
रैली में बजाए गए गानों और जश्न को लेकर जब मीडियाकर्मियों ने शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ से उनकी प्रतिक्रिया जाननी चाही, तो उन्होंने बेहद आक्रामक रुख अपनाया। श्वेता महाले पर निशाना साधते हुए गायकवाड़ ने एक ऐसा बयान दे दिया, जो अब उनके गले की फांस बन चुका है।
मीडिया से बातचीत करते हुए संजय गायकवाड़ ने विवादित अंदाज में कहा था, 'बाप तो बाप है' बोलना किसी पुरुष के मुंह से तो ठीक लगता है, लेकिन अगर कोई महिला ऐसा कहे कि मैं बाप हूं, तो वह बाप जैसा शरीर कहां से लाएगी?' विधायक का यह बयान देखते ही देखते सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। इस टिप्पणी के बाद से ही महिला संगठनों और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई थीं।
महिला शिकायतकर्ता का गंभीर आरोप
संजय गायकवाड़ के इस बयान के बाद बुलढाणा की एक 42 वर्षीय महिला ने आगे आकर उनके खिलाफ औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता महिला का साफ तौर पर आरोप है कि विधायक की इस टिप्पणी से देश और समाज की महिलाओं की गरिमा, मान-सम्मान और लज्जा को गहरी ठेस पहुंची है। महिला ने पुलिस को दी गई शिकायत में कहा कि एक जनप्रतिनिधि द्वारा महिलाओं के शरीर को लेकर इस तरह की अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करना बेहद शर्मनाक है और यह जानबूझकर दिया गया बयान है।
शिकायत के आधार पर बुलढाणा शहर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और संबंधित कानूनों के तहत मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बयान के पीछे की मंशा क्या थी।
सूखे की स्थिति और फिजूलखर्ची पर भी गरमाई थी सियासत
इस पूरे विवाद का एक दूसरा पहलू भी है, जिसे लेकर संजय गायकवाड़ अपनी सफाई देते नजर आए थे। विधायक का तर्क था कि महाराष्ट्र के कई हिस्सों में इन दिनों सूखे जैसी गंभीर स्थिति बनी हुई है। ऐसे में किसी के जन्मदिन पर इस तरह की भव्य रैलियां निकालना और पानी व पैसों की बर्बादी करना उन्हें नागवार गुजरा।
गायकवाड़ ने कहा था कि राज्य में जनता पानी के लिए परेशान है और ऐसे में मुख्यमंत्री के निजी सचिव से जुड़े आयोजनों में इतना खर्च करना सही नहीं है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि अगर मुकाबला करना ही है, तो विकास के मुद्दों पर होना चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी थी कि राजनीति में 'बाप' कौन है, यह जनता उचित समय आने पर साबित कर देगी।
आगे क्या हो सकता है?
इस एफआईआर के दर्ज होने के बाद से बुलढाणा जिले की स्थानीय राजनीति में उबाल आ गया है। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे पर शिवसेना विधायक को घेरना शुरू कर दिया है, वहीं विपक्षी दल भी महिलाओं के अपमान का हवाला देते हुए सरकार पर हमलावर हैं। एक तरफ जहां पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी जांच आगे बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर विधायक संजय गायकवाड़ की तरफ से इस कानूनी कार्रवाई के बाद क्या नया रुख अपनाया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
यह मामला एक बार फिर से इस बात को रेखांकित करता है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपनी भाषा और बयानों पर कितना संयम रखना चाहिए। शब्दों की एक मामूली चूक किस तरह से एक बड़े राजनीतिक तूफान और कानूनी संकट में बदल सकती है, यह घटना इसका एक ताजा उदाहरण है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और नए खुलासे या राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिल सकती है।