अदालतों में बरसों से लंबित मामलों के बोझ से राहत पाने का जरिया बनी राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर नया रिकॉर्ड बनाया है। शनिवार को नागपुर जिला व सत्र न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में आम नागरिकों का भारी जनसैलाब देखने को मिला। सुबह से ही न्यायालय परिसर में मुवक्किलों और वकीलों की लंबी कतारें नजर आ रही थीं, जिसका नतीजा यह रहा कि एक ही दिन में हजारों मामलों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया गया। आपसी सहमति और बिना किसी मुकदमेबाजी के मामलों के सुलझने से दोनों पक्षों को बड़ी राहत मिली है।
अदालत में उमड़ी भीड़, 11 हजार से अधिक मामलों का हुआ आपसी समाधान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नागपुर जिले में लंबित और अदालत में दाखिल होने से पहले के (प्रि-लिटिगेशन) मामलों को सुलझाने के लिए इस विशेष अभियान का आयोजन किया गया था। इस एक दिवसीय महा-अभियान के दौरान कुल 11,098 प्रकरणों का निपटारा आपसी समझौते के आधार पर सफलतापूर्वक किया गया। इन मामलों में कुल 40.71 करोड़ रुपये की भारी-भरकम समझौता राशि तय की गई, जो न्यायपालिका और आम जनता दोनों के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
इसके अलावा, विभिन्न बैंकों और वित्तीय संस्थानों से जुड़े कर्ज वसूली मामलों में भी कड़ा रुख अपनाते हुए 8.53 करोड़ रुपये की राशि सफलताપૂર્વक वसूल की गई। लोक अदालत की खूबी यही होती है कि इसमें न तो किसी की हार होती है और न ही जीत, बल्कि दोनों पक्षों की रजामंदी से रिश्तों और विवादों की कड़वाहट हमेशा के लिए मिट जाती है।
विभिन्न श्रेणियों के मामलों का हुआ निपटारा
नागपुर जिला न्यायालय में आयोजित इस लोक अदालत के दायरे में विभिन्न प्रकार के कानूनी विवादों को शामिल किया गया था, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सके। आंकड़ों के मुताबिक:
- प्रलंबित (लंबित) मामलों की संख्या: 6,196
- दाखिला पूर्व (प्री-लिटिगेशन) मामलों की संख्या: 4,902
- कुल निपटाए गए मामले: 11,098
इन मामलों में मुख्य रूप से दीवानी (सिविल) वाद, भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुआवजे के विवाद, आपसी समझौते के योग्य आपराधिक मामले, पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद, मोटर दुर्घटना दावा (MACT), विद्युत अधिनियम से जुड़े मामले, चेक बाउंस के प्रकरण, श्रम विवाद, बैंक ऋण वसूली, उपभोक्ता शिकायतें और सहकारी न्यायालयों से संबंधित मामले शामिल रहे।
मोटर दुर्घटना दावों में तय हुई 16.78 करोड़ की राशि, सीआरपीएफ जवान के परिवार को मिला न्याय
लोक अदालत के दौरान सबसे बड़ा वित्तीय समझौता मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) के मामलों में देखने को मिला। यहाँ कुल 16.78 करोड़ रुपये की समझौता राशि तय की गई। इसी कड़ी में एक बेहद पुराने और संवेदनशील मामले का भी समाधान हुआ, जिसने सभी का ध्यान खींचा।
यह मामला केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में अपनी सेवाएँ दे रहे फलजीभाई सरदार पटेल की दर्दनाक मृत्यु से जुड़ा था। 26 सितंबर 2019 को राष्ट्रीय महामार्ग क्रमांक 7 पर कनकटी शिवार, समुद्रपुर के पास एक भीषण सड़क दुर्घटना में उनका चारपहिया वाहन हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें उनकी जान चली गई थी। इस अपूरणीय क्षति के बाद उनके परिवार (माता और भाई) ने मोटर दुर्घटना दावा याचिका संख्या 121/2021 दायर की थी।
जिला लोक अदालत में गठित पैनल क्रमांक-2 के समक्ष जब इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई, तो दोनों पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल में सहमति बनी। अदालत ने त्वरित निर्णय लेते हुए मृतक के वारिसों को 75 लाख रुपये की भारी मुआवजा राशि मंजूर की, जिससे वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे परिवार को बड़ी राहत मिली है।
फौजदारी मामलों के निपटारे के लिए चलाया गया था विशेष अभियान
लोक अदालत के मुख्य आयोजन से ठीक पहले, नागपुर जिले के तमाम फौजदारी न्यायालयों में 7 सितंबर से 11 सितंबर के बीच एक विशेष अभियान संचालित किया गया था। इस अभियान के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 256 और 258 के साथ-साथ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की प्रासंगिक धाराओं के तहत कुल 9,452 निरस्त फौजदारी प्रकरणों का भी विधिवत निपटारा किया गया। छोटे-मोटे और मामूली आपराधिक मामलों के खत्म होने से अदालतों का कीमती वक्त बचा है।
शीर्ष नेतृत्व और न्यायपालिका के मार्गदर्शन में मिली सफलता
इस वृहद आयोजन को सफलतापूर्वक धरातल पर उतारने के पीछे महाराष्ट्र राज्य विधि सेवा प्राधिकरण, मुंबई के निर्देश और उच्च स्तर का मार्गदर्शन रहा। नागपुर जिला न्यायालय के पालक न्यायमूर्ति अनिल किलोर और राज वाकोडे के कुशल मार्गदर्शन तथा प्रमुख जिला एवं सत्र न्यायाधीश एम. सलमान आजमी की प्रत्यक्ष देखरेख में यह पूरा अभियान संचालित हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला विधि सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रवीण एम. उन्हाले, विभिन्न अदालतों के न्यायिक अधिकारी, पैनल के सम्मानित सदस्य, न्यायालयीन कर्मचारी, विधि महाविद्यालयों के उत्साही छात्र-छात्राएं (स्वयंसेवक) और स्थानीय अधिवक्ताओं ने अहम भूमिका निभाई।
लोक अदालत क्यों है आम जनता के लिए वरदान?
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब अदालतों में मुकदमों की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में राष्ट्रीय लोक अदालतें किसी वरदान से कम नहीं हैं। यहाँ न तो लंबी अदालती प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है और न ही वकीलों की भारी-भरकम फीस चुकानी पड़ती है। सबसे बड़ी बात यह है कि लोक अदालत में दिए गए फैसले के खिलाफ आगे अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे मामलों का हमेशा के लिए पूर्णतः निपटारा हो जाता है। नागपुर की इस लोक अदालत ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आपसी संवाद और समझदारी से बड़े से बड़े विवाद को आसानी से सुलझाया जा सकता है।