उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सोमवार को सवर्ण समाज ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया। सवर्ण स्वाभिमान मंच के तत्वाधान में आयोजित इस प्रदर्शन में जिले के दूर-दराज के इलाकों से हजारों की संख्या में लोग सड़क पर उतरे। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में जमकर नारेबाजी की और प्रशासनिक अधिकारियों के माध्यम से देश के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
महाराणा प्रताप चौक से शुरू हुआ पैदल मार्च
इस आंदोलन की शुरुआत बांदा के प्रमुख महाराणा प्रताप चौक से हुई। सुबह से ही जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था। चौक पर एक सभा के बाद हजारों की संख्या में लोग पैदल मार्च निकालते हुए कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। मार्च के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि यातायात बाधित न हो और कानून-व्यवस्था बनी रहे। कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की और अपनी प्रमुख मांगों को दोहराया।
प्रमुख मांगें: आर्थिक आधार पर आरक्षण और सवर्ण आयोग का गठन
सवर्ण स्वाभिमान मंच के बैनर तले सौंपे गए ज्ञापन में कई गंभीर और नीतिगत मुद्दों को उठाया गया है। मंच के प्रमुख राजा कृष्णकांत तिवारी ने मीडिया और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत में कहा कि समाज के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की स्थिति में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। ज्ञापन में मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें शामिल रहीं:
- सवर्ण आयोग का गठन: समाज से जुड़े सामाजिक और आर्थिक मुद्दों का गहराई से अध्ययन करने और उनके त्वरित समाधान के लिए एक अलग 'सवर्ण आयोग' बनाया जाए।
- आर्थिक आधार पर आरक्षण: वर्तमान आरक्षण व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव किया जाए और इसे जातिगत के बजाय पूरी तरह से आर्थिक स्थिति के आधार पर लागू किया जाए, ताकि हर जरूरतमंद को उसका हक मिल सके।
- समान नागरिक संहिता (UCC): देश में विधि और नागरिक कानूनों में एकरूपता लाने के लिए समान नागरिक संहिता को जल्द से जल्द लागू किया जाए।
- अन्य मुद्दे: यूजीसी के प्रावधानों और एससी-एसटी एक्ट के कुछ पहलुओं पर भी पुनर्विचार करने की मांग उठाई गई।
प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट को सौंपा ज्ञापन
कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन के दौरान जिला मजिस्ट्रेट की अनुपस्थिति के चलते, सवर्ण समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन उन्हें सौंपा। ज्ञापन सौंपने के बाद मंच के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर सरकार द्वारा जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो इस आंदोलन को और अधिक व्यापक रूप दिया जाएगा।
प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था
हजारों की संख्या में लोगों के कलेक्ट्रेट पहुंचने के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। पुलिस बल और पीएसी के जवानों को कलेक्ट्रेट परिसर के चारों ओर तैनात किया गया था। हालांकि, पूरा प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ और प्रदर्शनकारियों ने अनुशासन का परिचय देते हुए ज्ञापन सौंपा।
देशभर में गूंज रही हैं नीतिगत सुधार की मांगें
राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में इस प्रकार के प्रदर्शनों को एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि देश में आरक्षण व्यवस्था और समान नागरिक संहिता जैसे मुद्दों पर लंबे समय से बहस चल रही है। बांदा का यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर भी लोग अब इन मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रख रहे हैं और सरकार से नीतिगत बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।
आने वाले दिनों में सवर्ण स्वाभिमान मंच के नेता अन्य जिलों में भी संवाद और बैठकों के जरिए अपने इस अभियान को आगे बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। फिलहाल, बांदा का यह प्रदर्शन राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है।