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बदल जाएगी खेती की तस्वीर! वाराणसी में युवाओं को सिखाया जा रहा सब्जियों में ग्राफ्टिंग का हुनर

बदल जाएगी खेती की तस्वीर! वाराणसी में युवाओं को सिखाया जा रहा सब्जियों में ग्राफ्टिंग का हुनर

खेती-किसानी के क्षेत्र में लगातार आ रहे आधुनिक बदलावों के बीच उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) में एक बेहद महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। सोमवार, 07 सितंबर 2026 को संस्थान परिसर में सब्जी फसलों में नर्सरी प्रबंधन और ग्राफ्टिंग तकनीक पर आधारित पांच दिवसीय विशेष 'हैंड्स-ऑन' प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। इस अनूठे कार्यक्रम की सबसे खास बात यह है कि इसमें देश के 10 अलग-अलग राज्यों से आए 30 चुनिंदा युवा किसान और नवोदित कृषि उद्यमी (Agri-Entrepreneurs) हिस्सा ले रहे हैं।

परंपरागत खेती से आधुनिक विज्ञान की ओर कदम

आज के दौर में जब जलवायु परिवर्तन और भूमि की घटती उर्वरता किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है, तब वैज्ञानिक तकनीकें ही एकमात्र समाधान के रूप में उभर रही हैं। वाराणसी का यह प्रतिष्ठित संस्थान लंबे समय से कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है। इसी कड़ी में आयोजित यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम युवा उद्यमियों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें खेतों में सीधे तौर पर इस्तेमाल होने वाले व्यावहारिक गुर सिखाए जा रहे हैं ताकि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर अन्य किसानों को भी प्रेरित कर सकें।

कार्यक्रम के दौरान देश के विभिन्न कोनों से पहुंचे युवाओं में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। शुरुआती दिन से ही सत्रों में भाग लेने वाले ये युवा वैज्ञानिक प्रक्रियाओं को बारीक से समझ रहे हैं और खुद अपने हाथों से इसका अभ्यास भी कर रहे हैं।

ग्राफ्टिंग तकनीक क्यों है कृषि जगत के लिए गेम-चेंजर?

कार्यक्रम के संयोजक डॉ. अनंत बहादुर ने प्रशिक्षण के पहले दिन ग्राफ्टिंग तकनीक के महत्व, इसकी उपयोगिता और इसके दीर्घकालिक लाभों पर बेहद विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार ग्राफ्टेड पौधों के उपयोग से मिट्टी के भीतर पनपने वाले खतरनाक रोगों (मृदा जनित रोगों) के प्रभाव को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।

डॉ. बहादुर ने अपने संबोधन में कहा, 'जलवायु की प्रतिकूल परिस्थितियां, चाहे वह अत्यधिक तापमान हो या अनियमित वर्षा, अक्सर फसलों को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। ऐसे में ग्राफ्टिंग तकनीक पौधों को इन सभी विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की ताकत देती है, जिससे पौधों की बेहतर स्थापना, उनकी तेज वृद्धि और अंततः बंपर उत्पादन सुनिश्चित होता है।' उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि आज के आधुनिक सब्जी उत्पादन में इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपना लिया जाए, तो यह न केवल फसल की उत्पादकता और गुणवत्ता को कई गुना बढ़ा देगी, बल्कि किसानों की शुद्ध आय में भी भारी इजाफा करेगी।

मैदानी स्तर पर तकनीक का प्रसार है मुख्य लक्ष्य

कृषि प्रसार वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रयोगशालाओं में विकसित होने वाली वैज्ञानिक तकनीकों का वास्तविक लाभ तभी है, जब वे देश के अंतिम छोर पर बैठे किसान के खेत तक पहुंच सकें। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि कृषि उद्यमी होने के नाते उनकी यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वे इन तकनीकों को पहले खुद अपने खेतों में अपनाएं, इनके परिणामों का प्रत्यक्ष अनुभव करें और फिर अपने आसपास के अन्य किसानों को भी इसके प्रति जागरूक करें। जब युवा खुद बदलाव के वाहक बनते हैं, तो समाज में क्रांति आने में देर नहीं लगती।

निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने दिए सफलता के मूलमंत्र

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश कुमार ने युवा कृषि उद्यमियों को ग्राफ्टिंग तकनीक के हर एक पहलू—यानी इसके 'क्यों, कैसे और इसके लाभ'—की बेहद बारीकी से जानकारी दी। उन्होंने समझाया कि पौधों की ग्राफ्टिंग के माध्यम से मुख्य रूप से निम्नलिखित बड़े फायदे हासिल किए जा सकते हैं:

  • रोग प्रतिरोधक क्षमता: पौधों में मिट्टी से होने वाले फंगल और बैक्टीरियल रोगों के प्रति जबरदस्त सहनशीलता पैदा होती है।
  • कठिन मौसम में मजबूती: अत्यधिक गर्मी, पाला या जलभराव जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी पौध आसानी से स्थापित हो जाती है और नष्ट नहीं होती।
  • बेहतर गुणवत्ता और उपज: फसल का आकार, रंग और कुल पैदावार काफी उच्च कोटि की प्राप्त होती है, जिससे बाजार में बेहतर दाम मिलते हैं।

निदेशक महोदय ने इसके साथ ही प्रतिभागियों को उच्च गुणवत्ता वाले रूटस्टॉक (Rootstock) और सायन (Scion) के चयन की विधियों, उचित रोपण के तरीकों, पौधों की शुरुआती नाजुक अवस्था में देखभाल और वैज्ञानिक पोषण प्रबंधन के बारे में भी तकनीकी रूप से मजबूत किया।

बैंगन और टमाटर पर विशेष 'हैंड्स-ऑन' अभ्यास

इस पांच दिवसीय कार्यशाला का सबसे बड़ा आकर्षण टमाटर और बैंगन जैसी प्रमुख सब्जी फसलों पर ग्राफ्टिंग का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और अभ्यास है। प्रशिक्षण ले रहे युवा उद्यमी केवल सुन नहीं रहे, बल्कि वैज्ञानिक देखरेख में खुद पौधों की कटाई-छटाई, उन्हें जोड़ने और उनके 'ग्राफ्ट यूनियन' (Graft Union) को सुरक्षित तैयार करने का व्यावहारिक अभ्यास कर रहे हैं।

विशेषज्ञ वैज्ञानिकों ने सत्र के दौरान बताया कि किस प्रकार स्वस्थ और गुणवत्तापूर्ण पौध तैयार करने के लिए बीज का सही चयन और उपचार जरूरी है। नर्सरी की वैज्ञानिक तैयारी से लेकर बुवाई, समय पर सिंचाई, संतुलित पोषण प्रबंधन, और कीट एवं रोग नियंत्रण के हर एक चरण को युवा बहुत बारीकी से सीख रहे हैं।

प्रशिक्षण के प्रमुख चरण और तकनीकी बिंदु

प्रतिभागियों को पांच दिनों के दौरान जिन मुख्य बिंदुओं पर प्रशिक्षित किया जा रहा है, उनका विस्तृत विवरण इस प्रकार है:

  1. रूटस्टॉक और सायन का चयन: मजबूत जड़ तंत्र वाले पौधों (रूटस्टॉक) और अच्छी पैदावार देने वाले ऊपरी हिस्से (सायन) का चुनाव करना।
  2. ग्राफ्टिंग की वैज्ञानिक विधियां: स्प्लिस ग्राफ्टिंग, टंग ग्राफ्टिंग या अन्य आधुनिक तरीकों से पौधों को आपस में कुशलतापूर्वक जोड़ना।
  3. ग्राफ्टेड पौधों की हीलिंग और देखभाल: जुड़ने के तुरंत बाद के नाजुक दिनों में पौधों को नमी और तापमान के सही संतुलन में रखना।
  4. खेत में रोपण और उत्तर-प्रबंधन: तैयार पौधों को मुख्य खेत में लगाना और उसके बाद की जाने वाली देखरेख।

वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया कि इस विधि से तैयार किए गए पौधे सामान्य पौधों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और सहनशील होते हैं। इससे न केवल किसानों की फसल बर्बादी का जोखिम न्यूनतम हो जाता है, बल्कि लागत घटने और उत्पादन बढ़ने से उनकी आर्थिक स्थिति में भी तेजी से सुधार होता है।

उन्नत भविष्य की ओर एक मजबूत कदम

इस पूरे प्रशिक्षण सत्र के दौरान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए.एन. सिंह और डॉ. डी.पी. सिंह की गरिमामयी उपस्थिति भी बनी रही, जिन्होंने समय-समय पर युवाओं का मार्गदर्शन किया। पूरे कार्यक्रम का कुशल संचालन और मंच संचालन डॉ. आत्मानंद त्रिपाठी द्वारा किया गया।

वाराणसी के इस संस्थान में चल रहा यह पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि यदि देश के युवाओं को सही समय पर आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान मिल जाए, तो वे भारतीय कृषि की पूरी तस्वीर बदल सकते हैं। आने वाले दिनों में ये 10 राज्यों के युवा जब अपने गृह राज्यों और जिलों में लौटेंगे, तो वे अपने साथ आधुनिक कृषि का ऐसा ज्ञान लेकर जाएंगे जो वहां के स्थानीय किसानों के लिए वरदान साबित होगा।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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