मुरादाबाद जनपद में जनसुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए जिला प्रशासन ने अब कमर कस ली है। मानसून और बदलते मौसम के बीच किसी भी संभावित बड़े हादसे को टालने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड में आ गया है। मुरादाबाद के जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने शहर और ग्रामीण इलाकों में फैले जर्जर, निष्प्रयोज्य और खतरनाक भवनों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। प्रशासन का मुख्य उद्देश्य किसी भी अनहोनी को समय रहते रोकना है, ताकि आम नागरिकों की जानमाल की सुरक्षा पुख्ता की जा सके।
10 सितंबर से होगी रोजाना शाम को हाई-लेवल समीक्षा
जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, आगामी 10 सितंबर से जनपद में जर्जर भवनों और आंगनबाड़ी केंद्रों के ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया की नियमित समीक्षा की जाएगी। जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रतिदिन शाम 7 बजे कैंप कार्यालय में इस अभियान की प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी। इस दैनिक समीक्षा बैठक में यह परखा जाएगा कि पिछले 24 घंटों में कितने खतरनाक भवनों को गिराया गया है या कितनों को सील किया गया है।
यह कदम इसलिए भी बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि कई बार प्रशासनिक नोटिस के बावजूद लोग जर्जर मकानों में जोखिम उठाकर रह रहे होते हैं या उनके आसपास से भारी गुजर-बसर होती है। प्रशासन अब इस लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।
अधिकारियों को बांटी गई जिम्मेदारियां, चलेगा विशेष सर्वेक्षण अभियान
जिलाधिकारी ने बीते सोमवार को जनपद के सभी संबंधित उपजिलाधिकारियों (SDM), खंड विकास अधिकारियों (BDO) और नगर पालिका व नगर पंचायतों के अधिशासी अधिकारियों (EO) के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में सख्त निर्देश दिए गए कि:
- जनपद में अब तक चिन्हित किए गए सभी जर्जर और खतरनाक भवनों की सूचियों को तुरंत अद्यतन (Update) किया जाए।
- जिन मकानों या इमारतों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं, उनका ज़मीनी स्तर पर सत्यापन (Site Verification) कराया जाए।
- यह सुनिश्चित किया जाए कि नोटिस पाने वाले भवन स्वामियों ने या तो खुद सुरक्षात्मक कदम उठाए हैं या फिर उस खतरनाक जगह को पूरी तरह से खाली कर दिया है।
इसके साथ ही, नगर निगम और तमाम स्थानीय निकायों के सभी वार्डों में एक विशेष सर्वेक्षण अभियान चलाने के आदेश दिए गए हैं। मुख्य मार्गों, घनी आबादी वाले बाजारों और बेहद संवेदनशील इलाकों में स्थित जर्जर इमारतों को विशेष तौर पर चिन्हित किया जाएगा ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके।
अभी भी कई जगहों पर लंबित है तकनीकी मूल्यांकन और कार्रवाई
प्रशासन द्वारा की गई शुरुआती बैठकों और आंकड़ों की पड़ताल में कुछ ऐसी चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं, जिन पर अब त्वरित एक्शन लिया जाना है। समीक्षा के दौरान यह तथ्य प्रकाश में आया कि:
- परिषदीय विद्यालयों के परिसरों में बने जर्जर भवनों और आंगनबाड़ी केंद्रों के मामले में 37 जर्जर भवनों का तकनीकी मूल्यांकन (Technical Evaluation) अभी भी लंबित पड़ा हुआ है।
- लगभग 12 ऐसे जर्जर भवन हैं जिन्हें अब तक पूरी तरह से खाली नहीं कराया गया है, जो बच्चों और आसपास के लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
- तकरीबन 28 भवनों के मामले में नीलामी या ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया अभी भी फाइलों में ही अटकी हुई है, जिस पर अब तेजी से काम शुरू होगा।
जिलाधिकारी ने इन तमाम लंबित मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी स्तर पर प्रशासनिक ढिलाई न बरती जाए।
बैरिकेडिंग और चेतावनी बोर्ड लगाना हुआ अनिवार्य
प्रशासन ने केवल कागजी कार्रवाई या नोटिस तक खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि ज़मीन पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के भी निर्देश दिए हैं। जिन खतरनाक इमारतों को तुरंत गिराना संभव नहीं है या जिनकी कानूनी प्रक्रिया चल रही है, उनके आसपास तत्काल प्रभाव से:
- मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए ताकि आम जनता और राहगीर उन दीवारों या छतों के करीब न जाएं।
- साफ शब्दों में चेतावनी बोर्ड (Warning Boards) लगाए जाएं ताकि दूर से ही लोगों को खतरे का अहसास हो सके।
- स्थानीय पुलिस और निकाय कर्मियों द्वारा इन स्थानों की नियमित निगरानी (Regular Monitoring) की जाए।
भवन स्वामियों के लिए आखिरी चेतावनी
प्रशासन की ओर से यह भी साफ कर दिया गया है कि जिन जर्जर इमारतों पर अभी तक नोटिस चस्पा नहीं हुए हैं, उन्हें फौरन चिन्हित करके नियमानुसार नोटिस थमाए जाएं। यदि कोई भवन स्वामी प्रशासनिक नोटिस मिलने के बावजूद आदेशों की अवहेलना करता है या खुद जोखिम भरी इमारत को गिराने या खाली करने में आनाकानी करता है, तो प्रशासन अपने स्तर पर बलपूर्वक कार्रवाई करेगा और इसका खर्च भी संबंधित मकान मालिक से ही वसूला जाएगा।
मुरादाबाद प्रशासन के इस सख्त और आक्रामक रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में शहरभर में जर्जर इमारतों के खिलाफ बड़ा बुलडोजर एक्शन देखने को मिल सकता है। आम जनता ने भी प्रशासन के इस कदम की सराहना की है ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।