अपराध की दुनिया से निकलकर खुद को एक आम इंसान की तरह ढालने की कोशिशें अक्सर कानून के लंबे हाथों के आगे नाकाम हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही मामला राजस्थान और मध्य प्रदेश की सीमाओं के बीच सामने आया है, जहाँ करीब दो साल से फरार चल रहा एक शातिर ड्रग तस्कर पुलिस की गिरफ्त में आ गया है। इस अपराधी ने कानून से बचने के लिए राजस्थान छोड़कर मध्य प्रदेश में शरण ली थी और वहां एक शरीफ व्यापारी की तरह फर्नीचर का कारोबार शुरू कर दिया था। लेकिन, कहते हैं ना कि अपराधी चाहे जितनी भी चालाकियां चल ले, कानून का शिकंजा आखिरकार उस तक पहुंच ही जाता है।
दो साल से चल रहा था फरार, सिर पर था 1 लाख का इनाम
मामले की गंभीरता को देखते हुए एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने इस ऑपरेशन को बेहद सावधानी से अंजाम दिया। गिरफ्तार किए गए आरोपी की पहचान 32 वर्षीय विष्णा राम के रूप में हुई है, जो मूल रूप से राजस्थान के बाड़मेर जिले के कुडला गांव का रहने वाला है। कानून की नजरों में वह लंबे समय से एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ था और उसकी गिरफ्तारी पर 1 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, विष्णा राम पिछले करीब 12 सालों से आपराधिक गतिविधियों में लिप्त रहा है और उसके खिलाफ राजस्थान के विभिन्न पुलिस थानों में एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act), हत्या का प्रयास, मारपीट, आर्म्स एक्ट, चोरी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामलों सहित 18 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं।
ड्राइविंग से लेकर ड्रग्स के दलदल तक का सफर
पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, विष्णा राम ने 12वीं तक की पढ़ाई की थी और शुरुआती दौर में वह बतौर ड्राइवर काम करता था। इसके बाद उसने एक मजदूर के रूप में भी काम किया और इसी दौरान वह ड्रग्स तस्करों के संपर्क में आ गया। उसके परिवार की पृष्ठभूमि भी इस दलदल से जुड़ी थी; उसके दादाजी को डोडा पोस्त (पोनी हस्क) की लत थी, और विष्णा राम शुरू में उनके लिए ही छोटी मात्रा में इसकी खरीद-फरोख्त किया करता था। धीरे-धीरे उसके तार नीमच के तस्करों से जुड़े और वह खुद इस अवैध कारोबार में पूरी तरह उतर गया।
आरोपी ने वक्त के साथ अपने नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा कर लिया था। उसने मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा के बड़े तस्करों के साथ मजबूत संबंध स्थापित कर लिए और मारवाड़ क्षेत्र में ड्रग्स की सप्लाई करने लगा। पुलिस के अनुसार, वह मध्य प्रदेश और राजस्थान के बीच सक्रिय तस्करी नेटवर्क की एक बहुत ही अहम कड़ी बन चुका था, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियों की नजरें उस पर लंबे समय से टिकी हुई थीं।
राजस्थान में तलाश हुई तेज तो बदला ठिकाना
जब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का शिकंजा उस पर कसने लगा, तो विष्णा राम ने राजस्थान में लगातार अपने ठिकाने बदलने शुरू कर दिए। उसने जोधपुर में कुछ समय के लिए किराए के मकान में शरण ली और कभी-कभी अपने रिश्तेदारों के घरों में भी छिपा रहा। हालांकि, पुलिस की लगातार छापेमारी और दबिश के कारण राजस्थान में उसके लिए टिक पाना असंभव सा होता जा रहा था। अपनी पहचान छिपाने और सुरक्षित ठिकाने की तलाश में वह अंततः पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश भाग गया, जहाँ उसे लगा कि पुलिस कभी उस तक नहीं पहुंच पाएगी।
मध्य प्रदेश पहुंचकर उसने अपनी पूरी जीवनशैली बदल डाली। उसने वहां फर्नीचर का कारोबार शुरू किया और एक आम, शरीफ व्यापारी की तरह जिंदगी जीने लगा ताकि किसी को भी उसके पुराने आपराधिक इतिहास पर शक न हो। लेकिन, कानून के हाथ काफी लंबे होते हैं और एएनटीएफ की विशेष टीम लगातार उसकी हरकतों पर नजर बनाए हुए थी।
कारीगरों की सुरागकशी से खुला राज
इस पूरे ऑपरेशन का सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब पुलिस को यह पुख्ता जानकारी मिली कि मध्य प्रदेश में फर्नीचर का कारोबार करने वाला एक संदिग्ध व्यक्ति राजस्थान के जोधपुर से कुछ कारीगरों को काम के लिए अपने पास बुला रहा है। ANTF की टीम ने इस सुराग को पकड़ा और उन कारीगरों की गतिविधियों पर चुपचाप नजर रखना शुरू कर दिया।
टीम ने कारीगरों का पीछा करते हुए मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उमरिया गांव तक का सफर तय किया। जब पुलिस दल तयशुदा ठिकाने पर पहुंचा, तो नजारा चौंकाने वाला था। वांटेड तस्कर विष्णा राम अपने कुछ सहयोगियों और जोधपुर से आए कारीगरों के साथ एक घर में पार्टी कर रहा था। यह घर उसके ही एक साथी तस्कर के चाचा का था।
पार्टी के दौरान चारों तरफ से घेराबंदी और गिरफ्तारी
मौके की नजाकत को भांपते हुए एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स की टीम ने पूरी योजना के साथ उस परिसर को चारों तरफ से घेर लिया। इससे पहले कि विष्णा राम या उसके साथी किसी भी प्रकार की चालाकी दिखा पाते या वहां से भागने में सफल होते, पुलिस ने उसे दबोच लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से वहां हड़कंप मच गया।
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि मध्य प्रदेश में शरण लेने के दौरान उसने अपने नेटवर्क को कितना फैलाया था और इस अवैध कारोबार में उसके साथ और कौन-कौन लोग पर्दे के पीछे से शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि विष्णा राम से पूछताछ के बाद इस अंतर-राज्यीय ड्रग्स तस्करी सिंडिकेट से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की सख्त चेतावनी
इस सफल ऑपरेशन के बाद कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि अपराधी चाहे कितनी भी पहचान बदल लें या किसी दूसरे राज्य में छिपने की कोशिश क्यों न कर लें, तकनीक और खुफिया तंत्र की मदद से उन्हें कानून के दायरे में लाया ही जाएगा। ड्रग्स के खिलाफ चल रहे इस अभियान को इस गिरफ्तारी के बाद एक और बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।