बिहार की राजधानी पटना में डेंगू का डंक एक बार फिर लोगों को डराने लगा है। मानसून की विदाई के ठीक पहले शहर में मच्छरों का प्रकोप इस कदर बढ़ गया है कि स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ गई है। हालात यह हैं कि जिस संक्रमण को रोकने के लिए तमाम दावे किए जा रहे थे, वह अब बेकाबू होता नजर आ रहा है। अगस्त महीने के मुकाबले सितंबर का महीना शहरवासियों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो रहा है, जहां महज कुछ ही दिनों में मामलों में भारी उछाल दर्ज किया गया है।
सितंबर के शुरुआती दिनों ने तोड़े पिछले रिकॉर्ड
आंकड़ों पर गौर करें तो स्थिति की गंभीरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अगस्त के पूरे 31 दिनों में जहां पटना में डेंगू के कुल 97 मरीज सामने आए थे, वहीं सितंबर महीने के महज 18 दिनों में ही यह आंकड़ा पार कर 112 नए मरीजों तक पहुंच गया है। इस साल यानी 2026 के सीजन में अब तक राजधानी में डेंगू के कुल संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 279 हो गई है।
स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक, 31 अगस्त तक पटना में डेंगू के कुल 167 मरीज दर्ज किए गए थे। इसके बाद, 1 सितंबर से लेकर 18 सितंबर के बीच अचानक 112 नए मामलों का सामने आना यह बताता है कि संक्रमण की चेन तेजी से फैल रही है। पिछले कुछ दिनों से स्थिति और भी चिंताजनक बनी हुई है। लगातार मिल रहे मामलों ने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे की चुनौतियों को कई गुना बढ़ा दिया है।
रोजाना मिल रहे हैं 10 से 15 नए मरीज
संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले कुछ दिनों से हर रोज नए मरीजों की पुष्टि हो रही है। अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, 16, 17 और 18 सितंबर को लगातार हर दिन 14 से 15 नए मरीज चिन्हित किए गए। फिलहाल स्थिति यह है कि रोजाना औसतन 10 से 15 नए संक्रमित अस्पताल पहुंच रहे हैं या पैथोलॉजी जांच में पॉजिटिव पाए जा रहे हैं।
इस साल की शुरुआत यानी जनवरी से जून तक डेंगू का असर काफी कम था और केवल 44 मामले ही सामने आए थे। इसके बाद जुलाई में 26 नए मरीज मिले। हालांकि, अगस्त आते ही मौसम के बदलाव और बारिश के चलते संक्रमण ने अपनी रफ्तार पकड़ी और 97 लोगों को अपनी चपेट में ले लिया। लेकिन सितंबर के शुरुआती 18 दिनों में ही 112 मरीजों का मिलना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिन और भी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। डेंगू-मलेरिया विभाग के अधिकारी सुभाष प्रसाद ने भी इन आंकड़ों की पुष्टि करते हुए सतर्कता बरतने की अपील की है।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा मंडरा रहा है खतरा
पटना के हर कोने से डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं, लेकिन कुछ इलाके ऐसे हैं जिन्हें हॉटस्पॉट माना जा रहा है। प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल राजधानी के बांकीपुर, कंकड़बाग और पाटलिपुत्र अंचल में डेंगू के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। इसके अलावा शहर के अन्य घनी आबादी वाले और पॉश इलाके भी इसकी चपेट में हैं।
प्रभावित इलाकों की सूची में निम्नलिखित क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल हैं:
- बांकीपुर क्षेत्र
- कंकड़बाग जोन
- पाटलिपुत्र इलाका
- पोस्टल पार्क और योगीपुर
- जक्कनपुर और बाईपास रोड के आसपास के इलाके
इन तमाम क्षेत्रों में लगातार नए मरीज मिलने से स्थानीय लोगों में डर का माहौल है। जानकारों का मानना है कि इन इलाकों में जलजमाव और साफ-सफाई की कमी मुख्य वजह है।
मच्छरों के प्रजनन के लिए क्यों मुफीद बन रहा है माहौल?
मानसून के बाद की स्थिति हमेशा से वेक्टर जनित बीमारियों के लिए अनुकूल रही है। पटना में भी बारिश के बाद जगह-जगह जलजमाव की समस्या पैदा हो गई है। इसके अलावा शहर में चल रहे निर्माण स्थलों, खाली पड़े प्लॉटों में भरे पानी और नालियों की बदतर स्थिति ने 'एडीज एजिप्टी' (Aedes Aegypti) मच्छर के पनपने के लिए एकदम सही माहौल तैयार कर दिया है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि डेंगू फैलाने वाला यह मच्छर गंदे पानी में नहीं, बल्कि घरों के आसपास या गमलों, कूलरों, फ्रिज की ट्रे और टूटे-फूटे बर्तनों में जमा साफ पानी में अंडे देता है। लोग अपने घरों के अंदर तो सफाई रखते हैं, लेकिन बालकनी या छत पर रखी चीजों पर ध्यान नहीं देते, जो बाद में डेंगू का अड्डा बन जाते हैं।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से उठाए जा रहे कदम
बढ़ते मामलों को देखते हुए नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैब से भी डेटा एकत्रित किया जा रहा है ताकि सही समय पर सही जगह पर एक्शन लिया जा सके। जिन इलाकों में मरीजों की पुष्टि हो रही है, वहां विशेष तौर पर फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान चलाया जा रहा है।
नगर निगम की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर मच्छरों के प्रजनन स्थलों की पहचान कर रही हैं और वहां लार्वीसाइडल दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। साथ ही, लोगों को जागरूक करने के लिए पम्पलेट बांटे जा रहे हैं और एनाउंसमेंट भी कराए जा रहे हैं ताकि लोग अपने घरों के आसपास पानी जमा न होने दें।
बचाव ही सबसे बड़ा इलाज: क्या करें और क्या न करें?
विशेषज्ञों का कहना है कि डेंगू से बचने का एकमात्र कारगर तरीका मच्छरों के काटने से खुद को बचाना और उनके पनपने की जगहों को नष्ट करना है। जनता को निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:
- हफ्ते में कम से कम एक बार अपने कूलर, एसी की ट्रे, गमले और घर के दूसरे बर्तनों का पानी पूरी तरह खाली करके सुखाएं।
- घर के आसपास पानी का ठहराव न होने दें और गंदे पानी पर मिट्टी का तेल या जला हुआ मोटर ऑयल डाल सकते हैं।
- सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें और दिन के समय भी पूरी बांह के कपड़े पहनें।
- मच्छरों को भगाने के लिए क्वाइल, स्प्रे या क्रीम का इस्तेमाल करें।
- अगर लगातार तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या शरीर पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और अपनी प्लेटलेट्स की जांच कराएं।
सितंबर के इस दौर में जरा सी भी लापरवाही भारी पड़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि प्रशासन के साथ-साथ आम नागरिक भी अपनी जिम्मेदारी समझें और अपने मोहल्ले व घर को डेंगू मुक्त रखने में सहयोग करें।