बिहार की शैक्षणिक फिजा में इन दिनों एक अलग ही ऊर्जा और उत्साह देखने को मिल रहा है। राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था को एक अभूतपूर्व गति देते हुए पटना के ऐतिहासिक बापू सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर राज्य के नवसृजित 211 डिग्री महाविद्यालयों में चयनित 2,451 नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों के लिए एक वृहद उन्मुखीकरण (Orientation) कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस कार्यक्रम ने प्रदेश के शैक्षणिक गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति और महाविद्यालयों का संचालन अपने आप में एक अनोखा रिकॉर्ड है।
प्राचीन नालंदा और विक्रमशिला की भूमि पर शिक्षा का नया सूर्योदय
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ दीप प्रज्वलित करके किया गया। इस दौरान वहां मौजूद हर शख्स के चेहरे पर बिहार के स्वर्णिम भविष्य की एक स्पष्ट झलक साफ देखी जा सकती थी। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि नालंदा और विक्रमशिला जैसी महान शिक्षण परंपराओं की इस पावन भूमि पर आज शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। उन्होंने नवनियुक्त प्राध्यापकों को संबोधित करते हुए कहा कि वे केवल क्लासरूम में पढ़ाने वाले शिक्षक मात्र नहीं हैं, बल्कि वे बिहार की आने वाली कई पीढ़ियों के भाग्य विधाता और मार्गदर्शक हैं।
शिक्षकों की जिम्मेदारी केवलता किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का विकास करना, उनकी तार्किक सोच को पैना करना और उनके भविष्य की नींव को मजबूत करना ही असली शिक्षक का धर्म है। आज के इस दौर में जब पूरी दुनिया तेजी से बदल रही है, ऐसे में बिहार के युवाओं को वैश्विक स्तर पर टिके रहने के लिए आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की सख्त आवश्यकता है।
एक दिन में 211 डिग्री कॉलेज शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना बिहार
सरकार की तरफ से उठाए गए इन कड़े और बड़े कदमों ने देश भर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बिहार आज इस मामले में मील का पत्थर साबित हुआ है कि उसने एक ही दिन में 211 नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत कर दी है। ऐसा कारनामा करने वाला बिहार देश का इकलौता राज्य बन गया है। इस अभूतपूर्व विस्तार के पीछे मूल उद्देश्य यही है कि ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए भटकना न पड़े और उन्हें उनके घर के पास ही उच्च कोटि के शिक्षण संस्थान मिल सकें।
- 211 नए डिग्री कॉलेज: राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में एक साथ खुले कॉलेज।
- 2,451 असिस्टेंट प्रोफेसर: उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने के लिए नई नियुक्तियां।
- बजट का 21 प्रतिशत: शिक्षा के बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष व्यय।
स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षा तक का मास्टरप्लान
सिर्फ कॉलेज ही नहीं, बल्कि स्कूली शिक्षा को भी चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए सरकार ने व्यापक रणनीति तैयार की है। राज्यभर में करीब 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों को विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। इन अत्याधुनिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को केवल सामान्य शिक्षा ही नहीं मिलेगी, बल्कि देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे NEET और JEE की तैयारी के लिए विशेष कोचिंग, लाइव क्लासेस और 24x7 ऑनलाइन ट्यूटर की सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। यह कदम उन गरीब मेधावी छात्रों के लिए वरदान साबित होगा जो आर्थिक तंगी के कारण महंगी कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थ रहते हैं।
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जाएंगे बिहार के शिक्षक
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल तभी संभव है जब पढ़ाने वाले शिक्षक भी पूरी तरह से अपडेट और दुनिया के बेहतरीन शिक्षण तौर-तरीकों से वाकिफ हों। इसी दूरगामी सोच के तहत, सरकार ने एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। इसके तहत राज्य के चुनिंदा 100 प्राध्यापकों को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में शुमार ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी समेत अन्य ग्लोबल इंस्टिट्यूट्स में विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।
इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय स्तर के शिक्षकों और विषय विशेषज्ञों के साथ कार्यशालाओं और संवाद सत्रों का आयोजन किया जाएगा ताकि वैश्विक शिक्षा के आधुनिक ट्रेंड्स को बिहार की धरती पर भी उतारा जा सके।
नवनियुक्त प्राध्यापकों से की गई अपील: कॉलेज आएं छात्र
कार्यक्रम के दौरान एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यावहारिक पक्ष पर भी जोर दिया गया। प्राध्यापकों से साफ शब्दों में कहा गया कि महज़ कॉलेजों की इमारतें खड़ी कर देना या नियुक्तियां कर देना ही काफी नहीं है। असली सफलता तभी मिलेगी जब क्लासरूम्स गुलजार रहेंगे। यह सुनिश्चित करना शिक्षकों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होगी कि छात्र नियमित रूप से कॉलेज पहुंचें, कक्षाओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और शिक्षकों के साथ संवाद स्थापित करें। जब तक छात्र कॉलेजों में आकर वहां उपलब्ध संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल नहीं करेंगे, तब तक इस पूरी कवायद का वास्तविक उद्देश्य पूरा नहीं हो सकता।
बजट का बड़ा हिस्सा शिक्षा के नाम
आंकड़ों की बात करें तो बिहार सरकार अपने कुल वार्षिक बजट का लगभग 21 प्रतिशत हिस्सा अकेले शिक्षा क्षेत्र पर खर्च कर रही है। यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सरकार के लिए युवाओं का भविष्य और शिक्षा व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। बिहार के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, उन्हें जरूरत है तो बस सही समय पर सही मार्गदर्शन और आधुनिक संसाधनों की, जिसे पूरा करने के लिए अब यह नई फौज मैदान में उतर चुकी है।
गणमान्य लोगों की रही गरिमामयी उपस्थिति
बापू सभागार में आयोजित इस भव्य और ऐतिहासिक कार्यक्रम में शिक्षा जगत की कई बड़ी हस्तियों ने शिरकत की। इस दौरान उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर और राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने भी अपने विचार रखे और नवनियुक्त शिक्षकों का हौसला बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव द्वारा मुख्यमंत्री को हरित पौधा और प्रतीक चिन्ह भेंटकर उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर भारत सरकार के अपर सचिव राहुल सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जय प्रकाश नारायण विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. वाजपेयी, पटना विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति रास बिहारी सिंह सहित राज्यभर से आए सैकड़ों प्राध्यापक और तमाम वरीय प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।