तीन शादियों के बाद भी क्यों अकेले रह गए सुरों के जादूगर लकी अली?
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तीन शादियों के बाद भी क्यों अकेले रह गए सुरों के जादूगर लकी अली?

तीन शादियों के बाद भी क्यों अकेले रह गए सुरों के जादूगर लकी अली?

संगीत की दुनिया में जब भी एक ऐसी रूहानी आवाज का जिक्र होता है जो सीधे दिल को छू जाए, तो जेहन में सबसे पहला नाम लकी अली का आता है। नब्बे के दशक में अपने जादुई अंदाज और अनूठी गायकी से देश के हर युवा के दिल पर राज करने वाले लकी अली आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। उनकी आवाज में एक ऐसा ठहराव और दर्द है, जो सुनने वाले को मंत्रमुग्ध कर देता है। हालांकि, पर्दे के पीछे और गानों की चमक-धमक से दूर, लकी अली की निजी जिंदगी उतार-चढ़ाव, तन्हाइयों और अधूरेपन की एक ऐसी कहानी रही है, जिसे जानकर हर कोई हैरान रह जाता है।

फिल्मी खानदान से ताल्लुक, फिर भी खुद बनाई अपनी अलग राह

मशहूर कॉमेडियन महमूद के घर जन्मे लकी अली का असली नाम मकसूद महमूद अली है। हिंदी सिनेमा के इतिहास में महमूद का नाम एक ऐसे दिग्गज कलाकार के रूप में दर्ज है, जिन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग से पीढ़ियों को हंसाया। घर में पूरी तरह से फिल्मी और कलात्मक माहौल होने के बावजूद लकी अली ने कभी भी अपने पिता के नाम और रुतबे का इस्तेमाल करके शॉर्टकट अपनाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने अपने जीवन की शुरुआत में बेहद संघर्षपूर्ण रास्ते चुने।

युवावस्था में उन्होंने पेट पालने और दुनिया को देखने के लिए कई तरह के कठिन काम किए। उन्होंने खेती-किसानी की, कालीन बेचने का काम किया और यहाँ तक कि तेल के कुओं पर भी मज़दूर की तरह काम किया। उनके पिता महमूद चाहते थे कि उनका बेटा फिल्मों की दुनिया में एक बड़ा अभिनेता या नामी शख्स बने, लेकिन लकी अली की रूह में तो संगीत बसा हुआ था। वह अपनी शर्तों पर जीना चाहते थे और उन्होंने अपनी पहचान खुद के दम पर बनाई।

महबूब स्टूडियो का वह भावुक लम्बा और पिता का प्यार

बाप-बेटे के रिश्ते हमेशा जटिल होते हैं, और महमूद तथा लकी अली का रिश्ता भी इसके अपवाद नहीं था। दोनों के बीच एक तरफ जहां वैचारिक दूरियां थीं, वहीं दूसरी तरफ गहरा पिता-पुत्र का स्नेह भी छिपा था। लकी अली के शुरुआती संघर्ष के दिनों का एक किस्सा बेहद मशहूर है, जो आज भी सुनने वालों की आंखें नम कर देता है।

एक बार महबूब स्टूडियो में शूटिंग के दौरान जब महमूद साहब की नजर अपने बेटे लकी अली पर पड़ी। उन्होंने देखा कि उनका बेटा किस तल्लीनता और सादगी के साथ गिटार बजा रहा है और अपने सुरों को साध रहा है। उस पल महमूद साहब अपने आंसुओं को रोक नहीं पाए। एक पिता के रूप में उन्हें अपने बेटे के टैलेंट पर गर्व भी था और उसके संघर्ष को देखकर दिल में टीस भी उठ रही थी। लकी अली ने हमेशा इस बात को अहमियत दी कि लोग उन्हें महमूद के बेटे के रूप में नहीं, बल्कि सिर्फ 'लकी अली' के रूप में जानें।

तीन निकाह और फिर भी जिंदगी में तन्हाई

लकी अली का पेशेवर सफर जितना चमकदार और सफल रहा, उनकी निजी जिंदगी उतनी ही उलझी हुई और कशमकश से भरी रही। मोहब्बत की तलाश में उन्होंने जीवन में तीन बार निकाह किया, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उनकी जिंदगी का यह पहलू सबसे ज्यादा चर्चा में रहा है।

  • पहली पत्नी: लकी अली ने सबसे पहले न्यूजीलैंड की रहने वाली मेघन जेन मैक्लेरी से निकाह किया था। मेघन वही खूबसूरत चेहरा थीं जिन्हें आपने लकी अली के शुरुआती और बेहद लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो 'ओ सनम' में देखा होगा। हालांकि, यह रिश्ता लंबे समय तक नहीं टिक सका और दोनों अलग हो गए।
  • दूसरी पत्नी: इसके बाद उन्होंने अनाहिता से दूसरा निकाह किया। यह रिश्ता भी कुछ वर्षों के बाद आपसी दूरियों के चलते खत्म हो गया।
  • तीसरी पत्नी: इसके बाद लकी अली ने ब्रिटिश मॉडल केट एलिजाबेथ हॉल के साथ तीसरी बार घर बसाया। लेकिन अफसोस की बात यह रही कि उनका यह सफर भी अंजाम तक नहीं पहुंच पाया और उनका तीसरा तलाक भी हो गया।

इन तीनों शादियों से उनके बच्चे भी हैं, जिनकी परवरिश में वह हमेशा आगे रहे हैं। तमाम रिश्तों के टूटने के बावजूद, लकी अली ने कभी भी प्यार के प्रति अपनी आस्था को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया, भले ही उनकी अपनी जिंदगी में अकेलापन हमेशा साए की तरह साथ रहा.

जब ऋतिक रोशन की फिल्म से मचाया वैश्विक तहलका

लकी अली के संगीत करियर का सबसे स्वर्णिम काल वह था जब उन्होंने साल 2000 में आई ऋतिक रोशन और अमीषा पटेल की ब्लॉकबस्टर डेब्यू फिल्म 'कहो ना प्यार है' के लिए अपनी आवाज दी। इस फिल्म के गाने 'एक पल का जीना' और 'ना तुम जानो ना हम' ने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सनसनी फैला दी थी।

लकी अली के गाने का अंदाज उस दौर के टिपिकल बॉलीवुड गानों से बिल्कुल अलग था। उनके गानों में एक मस्ती, एक ताजगी और एक अलग ही किस्म का सुकून होता था। 'एक पल का जीना' के सिग्नेचर डांस स्टेप के साथ लकी अली की आवाज का जादू ऐसा चला कि वह हर जुबान पर चढ़ गया। आज भी नब्बे के दशक के संगीत प्रेमियों की प्लेलिस्ट इन गानों के बिना अधूरी मानी जाती है।

समय के साथ और परिपक्व हुई उनकी कला

बदलते दौर के साथ लकी अली ने खुद को कभी व्यावसायिक चकाचौंध के पीछे भागने नहीं दिया। साल 2010 में आई रणबीर कपूर और प्रियंका चोपड़ा स्टारर फिल्म 'अंजाना अंजानी' का गाना 'हैरत' इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इस गाने में आज के युवाओं जैसी ऊर्जा और लकी अली की परिपक्व आवाज का ऐसा अद्भुत मेल देखने को मिला, जिसे आज भी यूथ एंथम माना जाता है।

आज भले ही लकी अली बड़े पर्दे की चकाचौंध से दूर अपने फॉर्महाउस या एकांत में रहना पसंद करते हों, लेकिन जब भी वे मंच पर अपना गिटार लेकर बैठते हैं, तो समय जैसे थम जाता है। उनकी जिंदगी के तमाम गम और तन्हाई उनके सुरों में ढलकर एक ऐसा मरहम बन जाते हैं जो सुनने वाले के हर दर्द को मिटा देता है। तीन शादियां टूटने के बाद का अकेलापन शायद उनकी आवाज को और भी ज्यादा गहरा और सच्चा बना गया है।

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तनु उपाध्याय

तनु उपाध्याय

Senior Sub Editor (Entertainment)

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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