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बिहार के स्कूलों में बबाल: बकाया मजदूरी और स्थायीकरण को लेकर सड़कों पर उतरे रात्रि प्रहरी

बिहार के स्कूलों में बबाल: बकाया मजदूरी और स्थायीकरण को लेकर सड़कों पर उतरे रात्रि प्रहरी

शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले विद्यालयों के रात्रि प्रहरी और सफाईकर्मी इन दिनों తీవ్ర आर्थिक संकट और उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। अपनी सुधि लेने वाला कोई नहीं होने पर आखिरकार इनका सब्र टूट गया और वे अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आए। बुधवार को बिहार स्कूल रात्रि प्रहरी यूनियन (संबद्ध AIUTUC) के बैनर तले राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत रात्रि प्रहरियों, स्वच्छता कर्मियों और सफाईकर्मियों ने एक विशाल प्रदर्शन का आयोजन किया। इस प्रदर्शन के जरिए सरकार और शिक्षा विभाग के तंत्र को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की गई है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।

महीनों से रुका वेतन और प्रशासनिक उदासीनता

प्रदर्शनकारियों का मुख्य दर्द उनकी बकाया मजदूरी का भुगतान न होना है। स्कूलों की सुरक्षा और साफ-सफाई की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने वाले इन कर्मचारियों को समय पर मानदेय तक नसीब नहीं हो रहा है। कई महीनों से वेतन अटका होने के कारण इनके परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। हालात इस हद तक बदतर हो चुके हैं कि बच्चों की स्कूल फीस भरना, दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना और बीमार पड़ने पर दवाइयां खरीदना तक मुहाल हो गया है।

यूनियन के बैनर तले एकत्रित हुए कर्मियों का कहना है कि वे लगातार संबंधित अधिकारियों और जिला शिक्षा कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले हैं। ज़मीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं। प्रशासनिक लापरवाही के कारण इन गरीब कर्मियों का शोषण लगातार जारी है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

स्थायीकरण की मांग पर अड़े कर्मचारी

केवल बकाया भुगतान ही नहीं, बल्कि इस आंदोलन का एक और सबसे बड़ा और अहम मुद्दा नौकरियों का स्थायीकरण है। वर्षों से अल्प मानदेय पर विद्यालयों में अपनी सेवाएं दे रहे इन रात्रि प्रहरियों और सफाईकर्मियों का कहना है कि उनका भविष्य पूरी तरह से अंधकारमय है। बिना किसी सामाजिक सुरक्षा, पीएफ (PF), मेडिकल सुविधा या जॉब सिक्योरिटी के वे नाममात्र के वेतन पर काम करने को मजबूर हैं।

  • नियमितीकरण: सभी रात्रि प्रहरियों और सफाईकर्मियों को सरकारी सेवक का दर्जा दिया जाए।
  • समान काम, समान वेतन: दैनिक और संविदा पर काम कर रहे कर्मियों को भी उनके काम के आधार पर उचित और समयबद्ध वेतन मिले।
  • बकाया भुगतान: पिछले कई महीनों से लंबित पड़े वेतन का तत्काल एकमुश्त भुगतान किया जाए।
  • श्रम कानून लागू हो: विद्यालयों में काम करने वाले इन कर्मियों पर श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले सभी अधिकार लागू हों।

AIUTUC की दो टूक - शोषण के खिलाफ आर-पार की लड़ाई

बिहार स्कूल रात्रि प्रहरी यूनियन से जुड़े नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है। वक्ताओं ने मंच से कहा कि राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन उन स्कूलों की हिफाजत करने वाले संतरी यानी रात्रि प्रहरियों और सफाईकर्मियों की सुधि लेने वाला कोई नहीं है। यदि सरकार ने जल्द ही त्रिपक्षीय वार्ता कर इन मांगों पर सकारात्मक रुख नहीं अपनाया, तो राज्यव्यापी हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा।

यूनियन के नेताओं ने आरोप लगाया कि कम मानदेय पर काम कराने के बाद भी समय पर पैसे न देना मानवाधिकारों का हनन है। गरीब और मेहनतکش वर्ग के साथ हो रहे इस अन्याय को अब और सहन नहीं किया जाएगा।

आम जनता और समाज का मिल रहा है समर्थन

इस प्रदर्शन ने एक बार फिर से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कागजों पर चमकती शिक्षा व्यवस्था हकीकत में भी उतनी ही मजबूत है? स्कूलों की सुरक्षा और स्वच्छता का जिम्मा संभालने वाले ये कर्मी जब खुद असुरक्षित महसूस करेंगे, तो संस्थानों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी? स्थानीय नागरिकों और बुद्धिजीवियों का भी मानना है कि इन कर्मियों की मांगें पूरी तरह से न्यायसंगत हैं। महंगाई के इस दौर में बेहद कम पैसों में परिवार चलाना नामुमकिन है, और उस पर महीनों तक वेतन रोक देना अमानवीय है।

आगे की क्या है रणनीति?

बुधवार को हुए इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन पर दबाव जरूर बढ़ा है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करते हैं, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को प्रखंड स्तर से लेकर राज्य की राजधानी तक और व्यापक रूप दिया जाएगा। बहरहाल, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस आंदोलन के बाद क्या ठोस कदम उठाती है और कब तक इन मेहनतकशों के खातों में उनकी गाढ़ी कमाई का पैसा पहुंचता है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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