उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक मशीनरी में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों को और अधिक गति देने के उद्देश्य से देर रात एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया, जिसके तहत कुल 11 वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इस फेरबदल में 5 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और 6 प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) अधिकारी शामिल हैं। शासन स्तर पर किए गए इन बदलावों से प्रदेश के कई अहम जिलों के समीकरण और कामकाज की कमान नए चेहरों के हाथों में सौंप दी गई है।
जालौन के DM राजेश कुमार पांडेय अब संभालेंगे बहराइच की कमान
इस प्रशासनिक फेरबदल में सबसे बड़ा नाम जालौन के जिलाधिकारी (DM) रहे राजेश कुमार पांडेय का है। शासन ने उन्हें जालौन से स्थानांतरित कर बहराइच का नया जिलाधिकारी नियुक्त किया है। राजेश कुमार पांडेय अपने बेहतरीन प्रशासनिक कार्यों और जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों के लिए जाने जाते हैं।
बता दें कि उनके कार्यकाल के दौरान जालौन जिले ने जल संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था, जिसके लिए उन्हें प्रतिष्ठित 'राष्ट्रीय जल पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था। देश की महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें इस राष्ट्रीय पुरस्कार के तहत दो करोड़ रुपये की धनराशि से नवाजा था। अब बहराइच जिले की बागडोर ऐसे अनुभवी अधिकारी के हाथ में आने से वहां विकास कार्यों को एक नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, उनके स्थान पर जालौन का नया जिलाधिकारी किसे बनाया गया है, इस संबंध में शासन के आदेश में फिलहाल आधिकारिक तौर पर स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
शासन स्तर पर पांच IAS अधिकारियों की नई पदस्थापना
राज्य सरकार द्वारा प्रशासनिक कसावट के तहत जिन पांच आईएएस अधिकारियों के तबादले किए गए हैं, उनमें जिलाधिकारियों के अलावा विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर तैनात अधिकारी भी शामिल हैं। शासन के उच्च सूत्रों के अनुसार, इन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अपनी नई पदस्थापना वाली जगहों पर कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रदेश में प्रशासनिक सुस्ती को दूर करने और सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर तेजी से उतारने के लिए यह फेरबदल काफी अहम माना जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों से लगातार विभिन्न जनपदों में अधिकारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जा रही थी, जिसके बाद यह बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है।
छह PCS अधिकारियों के भी बदले गए कार्यक्षेत्र
भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के साथ-साथ प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के छह सीनियर अधिकारियों के कार्यक्षेत्र में भी बड़ा फेरबदल किया गया है। इन तबादलों से राजधानी लखनऊ से लेकर बुंदेलखंड और तराई के इलाकों तक प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।
- सुशील प्रताप सिंह: इन्हें लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) का नया सचिव बनाया गया है। राजधानी के शहरी विकास और योजनाओं को अमलीजामा पहनाने में इनकी भूमिका बेहद अहम होगी।
- अतुल कुमार: पूर्व में लखनऊ विकास प्राधिकरण में संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे अतुल कुमार को अब भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय का कुल सचिव (Registrar) और अपर निदेशक बनाया गया है।
- राजेश कुमार सिंह: बदायूं जिले में उपजिलाधिकारी (SDM) के पद पर सेवाएं दे रहे राजेश कुमार सिंह का तबादला करते हुए उन्हें कानपुर नगर भेजा गया है। उन्हें कानपुर में अपर जिलाधिकारी (ADM नागरिक आपूर्ति) की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- संजय कुमार सिंह: गोंडा जिले में अपर जिलाधिकारी के रूप में कार्यरत रहे संजय कुमार सिंह को अब युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल में उप निदेशक (प्रशासन) के पद पर तैनात किया गया है।
- प्रमोद झा: झांसी के नगर मजिस्ट्रेट की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रमोद झा का तबादला कर उन्हें गोंडा का नया अपर जिलाधिकारी (ADM) नियुक्त किया गया है।
- योगेश्वर सिंह: कुशीनगर में उपजिलाधिकारी (SDM) के रूप में तैनात रहे योगेश्वर सिंह को अब प्रमोट करते हुए झांसी का नया नगर मजिस्ट्रेट बनाया गया है।
क्यों किया गया यह फेरबदल? प्रशासनिक गलियारों में चर्चा
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के बड़े प्रशासनिक फेरबदल का मुख्य उद्देश्य शासन की प्राथमिकताओं को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना होता है। साल 2026 के इस दौर में जब कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं और कल्याणकारी योजनाएं अपने अंतिम चरण में हैं या गति पकड़ रही हैं, ऐसे में चुस्त और दुरुस्त अधिकारियों की तैनाती अनिवार्य हो जाती है।
बहराइच जैसे संवेदनशील और बड़े जिले में राजेश कुमार पांडेय की तैनाती को कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक नियंत्रण के लिहाज से एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। वहीं, लखनऊ विकास प्राधिकरण और भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में नए अधिकारियों के आने से प्रशासनिक कार्यों में और अधिक पारदर्शिता और तेजी आने की पूरी संभावना है।
आम जनता पर क्या होगा असर?
जिला स्तर पर अधिकारियों के बदलने से आम नागरिकों के प्रशासनिक कार्यों पर सीधा असर पड़ता है। विशेष तौर पर कानपुर, झांसी, गोंडा और बहराइच जैसे जिलों में जहां नए अधिकारियों ने कमान संभाली है, वहां जनता से जुड़े कार्यों, भूमि विवादों, और विकास योजनाओं की निगरानी अब नए दृष्टिकोण के साथ होगी। शासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे निर्धारित समयावधि के भीतर अपनी नई तहसीलों, जिलों और विभागों में कार्यभार ग्रहण करें, ताकि जनहित के कार्य किसी भीப் स्थिति में बाधित न हों।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह देर रात का दांव आने वाले दिनों में प्रशासनिक कसावट के लिहाज से कितना कारगर साबित होता है, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल इस फेरबदल ने पूरे प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल जरूर पैदा कर दी है।