बिहार के किशनगंज जिले के कोचाधामन प्रखंड में किसानों की सिंचाई से जुड़ी एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहाँ तीन दशक पहले लाखों रुपये खर्च कर स्थापित किए गए 23 सरकारी नलकूप (स्टेट बोरिंग) आज रखरखाव और बिजली कनेक्शन के अभाव में पूरी तरह बेकार साबित हो रहे हैं। सिंचाई के लिए सरकारी मदद न मिलने के कारण किसानों को अपनी फसलें बचाने के लिए महंगे वैकल्पिक साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
फसलों की सिंचाई के लिए किसानों की बारिश पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से करीब तीस साल पहले लघु सिंचाई विभाग द्वारा कोचाधामन प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में इन नलकूपों की स्थापना की गई थी। हालांकि, शुरुआती दौर के बाद प्रशासनिक उदासीनता और विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण यह महत्त्वाकांक्षी सिंचाई योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है। कई जगहों पर नलकूपों और बोरिंग का ढांचा तो खड़ा कर दिया गया, लेकिन उन्हें आज तक विद्युत आपूर्ति से नहीं जोड़ा जा सका।
पंचायतों को सौंपी गई थी जिम्मेदारी, पर स्थिति जस की तस
स्थानीय किसानों ने जानकारी दी है कि सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार इन सरकारी नलकूपों के सुचारू संचालन और नियमित रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों को सौंपी गई थी। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में कोई सुधार नहीं देखा गया। उचित देखभाल और समय पर मरम्मत न होने के कारण जहाँ अधिकांश नलकूप तकनीकी खराबी की वजह से लंबे समय से बंद पड़े हैं, वहीं कई जगह बिजली के तार और कनेक्शन का अभाव मुख्य बाधा बना हुआ है। बिजली न पहुँच पाने के कारण कई बोरिंग कभी चालू ही नहीं हो सकीं।
इन 23 प्रमुख स्थलों पर लगाए गए थे नलकूप
लघु सिंचाई विभाग की आधिकारिक सूची के अनुसार कोचाधामन प्रखंड के जिन 23 प्रमुख स्थलों पर ये नलकूप स्थापित किए गए थे, उनमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:
- भवानीगंज
- डेरामारी पुराना
- महसनगांव
- कोचाधामन पुराना
- भगाल
- अलता
- हसन डुमरिया
- शीतलनगर
- शाहपुर
- शाहनगरा
- रानी
- पीपला
- धनसोना
- मुहम्मदपुर खानका
- चरघरिया
- दोघरिया
- रंगामनी
- बस्ताकोला पुराना
- बूढ़ीमारी पुराना
- महियारपुर पुराना
- मोहरमारी पुराना
- गांगी गौरामनी पुराना
- नेहालभाग-सोंथा
किसानों की मांग और आगे की राह
कोचाधामन प्रखंड के किसानों का कहना है कि यदि इन सभी 23 नलकूपों की त्वरित मरम्मत कराई जाए, उन्हें समय पर बिजली कनेक्शन से जोड़ा जाए और नियमित रखरखाव की पुख्ता व्यवस्था बनाई जाए, तो इस पूरे इलाके के सैकड़ों एकड़ खेतों को सुलभ और सस्ती सिंचाई का लाभ मिल सकता है। किसानों ने प्रशासन से इस दिशा में जल्द ठोस कदम उठाने की पुरजोर मांग की है ताकि कृषि कार्यों में आ रही आर्थिक बाधा को दूर किया जा सके।