मधेपुरा के कुमारखंड प्रखंड स्थित पैतृक गांव खुर्दा में आयोजित बहुचर्चित 'खुर्दा महोत्सव' का शुक्रवार का पूरा दिन भोजपुरी संगीत, लोक संस्कृति और भारी जनसैलाब के नाम रहा। इस भव्य आयोजन में भाग लेने के लिए न केवल बिहार के विभिन्न जिलों बल्कि पड़ोसी देश नेपाल से भी बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी पहुंचे थे।
पूर्णिया के लोकसभा सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव और राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन द्वारा आयोजित इस महोत्सव में भोजपुरी सिनेमा के ट्रेंडिंग स्टार खेसारी लाल यादव, लोकप्रिय गायक व अभिनेता रितेश पांडेय, युवा कलाकार रौशन रोही और सुरीली गायिका शिवानी सिंह ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। कलाकारों की एक झलक पाने के लिए मेला परिसर में शाम ढलने से पहले ही दर्शकों की भारी भीड़ जमा हो गई थी और स्थिति यह थी कि पूरे मैदान में पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी।
नेपाल से पहुंचे दर्शक और उमड़ा जनसैलाब
इस महोत्सव की बढ़ती लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मधेपुरा, सहरसा, सुपौल और पूर्णिया के अलावा सीमा पार नेपाल से भी भारी तादाद में दर्शक खुर्दा पहुंचे थे। मंच के नजदीक सुरक्षित स्थान पाने के लिए युवा, महिलाएं और बुजुर्ग दोपहर से ही मैदान में डटे रहे। जैसे ही मंच संचालक ने भोजपुरी स्टार खेसारी लाल यादव के नाम की घोषणा की, पूरा मेला परिसर सीटियों, तालियों और गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा।
खेसारी के गीतों पर झूमे दर्शक
मंच पर आते ही खेसारी लाल यादव ने अपने चिरपरिचित ऊर्जावान अंदाज में 'ठीक है', 'सज के संवर के' और 'छपरा में पकड़ाएंगे' जैसे लोकप्रिय गीतों की तान छेड़ी। उनके इन चर्चित गानों पर दर्शक दीर्घा में खड़े हजारों युवा झूमने पर मजबूर हो गए। इस दौरान प्रशंसकों ने अपने मोबाइल के टॉर्च जलाकर और वीडियो रिकॉर्ड करते हुए कलाकारों के साथ सुर भी मिलाए।
रितेश पांडेय और शिवानी सिंह का जादू
महोत्सव के दूसरे मुख्य आकर्षण लोकप्रिय गायक व अभिनेता रितेश पांडेय रहे। उन्होंने अपने सुपरहिट गीत 'हैलो कौन' के साथ-साथ कई पारंपरिक लोकगीतों की आधुनिक धुनों पर शानदार प्रस्तुति दी, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अलावा, युवा अभिनेता रौशन रोही ने अपनी हास्य और संगीत प्रस्तुति से लोगों को खूब हंसाया। वहीं, चर्चित गायिका शिवानी सिंह ने अपनी मधुर आवाज और ऊर्जावान गायकी से पूरे माहौल को संगीतमय बना दिया।
कुश्ती दंगल, आधुनिक झूले और पारंपरिक खान-पान
सांस्कृतिक मंच के अलावा मेले के अन्य आकर्षणों ने भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। मेला परिसर में मौत का कुआं, जलपरी शो, बच्चों की मिनी ट्रेन, दिलबाग झूला, राम झूला, ब्रेक डांस और टोरा-टोरा जैसे आधुनिक झूलों पर देर रात तक लंबी कतारें लगी रहीं। परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने स्थानीय व्यंजनों और खान-पान का आनंद लिया। इसके अलावा, युवाओं के लिए पारंपरिक कुश्ती दंगल का भी आयोजन किया गया, जिसमें नामचीन पहलवानों ने अपने दांव-पेच दिखाए।
सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है महोत्सव: पप्पू यादव
आयोजन की सफलता पर सांसद पप्पू यादव और राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन ने सभी कलाकारों, आयोजकों और उपस्थित जनसमूह का आभार जताया। सांसद ने कहा कि खुर्दा महोत्सव का मुख्य उद्देश्य केवल मनोरंजन करना नहीं, बल्कि इलाके में आपसी भाईचारा, कौमी एकता और ग्रामीण लोककला व संस्कृति को संरक्षित करना है। उन्होंने कहा कि बिहार के साथ नेपाल से आए दर्शकों की इतनी बड़ी भागीदारी यह साबित करती है कि यह आयोजन अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है और आने वाले वर्षों में इसे और अधिक भव्य स्वरूप दिया जाएगा।