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जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा पर पलटीं बीजेपी विधायक सर्बरी मुखर्जी, एबीवीपी से बनाई दूरी

जादवपुर यूनिवर्सिटी हिंसा पर पलटीं बीजेपी विधायक सर्बरी मुखर्जी, एबीवीपी से बनाई दूरी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में जादवपुर यूनिवर्सिटी (Jadavpur University) परिसर में हुई हिंसा के बाद भूचाल आ गया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में रहीं जादवपुर से बीजेपी विधायक सर्बरी मुखर्जी ने अपने रुख में अचानक बड़ा बदलाव किया है। शुक्रवार देर रात एक स्पष्टीकरण वीडियो जारी करते हुए उन्होंने न सिर्फ अपने तेवर बदले, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से अपनी पार्टी को पूरी तरह से अलग कर लिया।

बता दें कि इस वीडियो के सामने आने से ठीक दो रात पहले इसी विधायक ने भारी समर्थकों के साथ जादवपुर यूनिवर्सिटी कैंपस के बाहर धावा बोला था और कथित तौर पर पूरी रात हंगामा करने की चेतावनी दी थी। लेकिन महज 48 घंटों के भीतर उनका यह यू-टर्न राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।

'चेहरे पर केसरिया रंग पोतकर पार्टी को बदनाम कर रहे हैं कुछ लोग'

सोशल मीडिया पर जारी अपने वीडियो संदेश में विधायक सर्बरी मुखर्जी ने दावा किया कि कुछ असामाजिक तत्व अंधेरे का फायदा उठाकर बीजेपी को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम उन लोगों की पहचान कर रहे हैं जो अंधेरे में चेहरे पर केसरिया रंग पोतकर और हाथ में बीजेपी का झंडा लेकर जादवपुर में अशांति फैला रहे हैं। हम इसे सहन नहीं करेंगे। जो लोग पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

विधायक ने यह भी दावा किया कि उन्होंने वामपंथी छात्र संगठनों और एबीवीपी के बीच हुई झड़प के बाद यूनिवर्सिटी परिसर में प्रवेश नहीं किया था। उन्होंने कहा, "मैं कैंपस के अंदर कैसे जा सकती हूं? मैं मौके पर थी ही नहीं। मैं तो केवल बुधवार रात को जादवपुर पुलिस स्टेशन के सामने एक शांतिपूर्ण सभा के दौरान वहां मौजूद कुछ बीजेपी युवाओं के साथ थी। उसके बाद मैं वहां से चली गई थी। बीजेपी का कभी भी एबीवीपी से कोई सीधा संबंध नहीं रहा है और मैंने उनके किसी कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया।"

बुधवार रात की वह धमकी और राजनीतिक घमासान

गौरतलब है कि बुधवार रात को जादवपुर पुलिस स्टेशन के बाहर हुई जिस 'शांतिपूर्ण सभा' का विधायक जिक्र कर रही हैं, उसी दौरान उन्होंने खुलेआम चेतावनी दी थी कि जब तक एबीवीपी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हमला करने वाले लोग पुलिस के सामने आत्मसमर्पण नहीं करते, तब तक इलाके में हंगामा जारी रहेगा।

विपक्षी दलों ने इस बात पर सवाल उठाया था कि जादवपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस इलाके में कसबा निर्वाचन क्षेत्र की बीजेपी विधायक क्या कर रही थीं। अपने ताजा वीडियो में मुखर्जी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के उन कार्यकर्ताओं पर ठीकरा फोड़ा जो कथित तौर पर बीजेपी की आड़ में शरण लेने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "रात के अंधेरे में कोई भी बीजेपी का सदस्य नहीं बन सकता। टीएमसी के गुंडे पार्टी को बदनाम करने की फिराक में हैं, मैं उन्हें चेतावनी देती हूं।"

अपने ही कार्यकर्ताओं को दी सख्त चेतावनी

विधायक ने अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को कड़े शब्दों में हिदायत दी है। उन्होंने कहा, "मैं अपने सभी कार्यकर्ताओं से कहूंगी कि वे किसी भी तरह के भ्रष्टाचार में लिप्त न हों। टीएमसी के पार्टी कार्यालयों पर हमला न करें और न ही रंगदारी (extortion) जैसी गतिविधियों में शामिल हों। जादवपुर की जनता ने हमें इसलिए वोट दिया है कि हम इस क्षेत्र को भय और आतंक से मुक्त कर सकें।"

पार्टी के भीतर ही बंटे नजर आए नेता

जादवपुर यूनिवर्सिटी की इस घटना और उसके बाद बने राजनीतिक माहौल पर खुद बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं के सुर अलग-अलग सुनाई दे रहे हैं। पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता स्वप्न दासगुप्ता ने शुक्रवार को एक कड़े संदेश में कहा था कि छात्र राजनीति को छात्रों के लिए ही छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने जादवपुर यूनिवर्सिटी के उस प्रतीक चिह्न (Emblem) के अपमान की भी कड़ी निंदा की जिसे प्रसिद्ध कलाकार नंदलाल बोस ने डिजाइन किया था।

दूसरी ओर, तमलुक से बीजेपी सांसद अभिजीत गांगुली का एक अलग ही बयान सामने आया। उन्होंने दावा किया कि लोगो (Logo) को नुकसान पहुंचाया जाना एक दुर्घटना थी, न कि उसका अपमान। इससे यह साफ जाहिर होता है कि कैंपस हिंसा के मुद्दे पर बंगाल बीजेपी के नेता अभी तक एक पेज पर नहीं आ सके हैं।

अग्निमित्रा पॉल बोलीं- 'कैंपस से राजनीति को दूर रखा जाए'

इस बीच, पश्चिम बंगाल की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में स्पष्ट कहा कि शिक्षण संस्थानों में राजनीति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "कृपया स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में राजनीति न लाएं। राजनीति को बाहर रखें। यूनिवर्सिटी के अंदर मौजूद कुलपति और अधिकारी परिसरों की देखभाल करेंगे।"

मंत्री ने उस तस्वीर को भी साझा किया जिसमें जादवपुर की विधायक एबीवीपी नेता निखिल दास के साथ नजर आ रही थीं, जो बुधवार रात की हिंसा में घायल हो गए थे। अग्निमित्रा पॉल ने कहा कि वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार ने कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को चलाने के लिए कोई राजनीतिक नियुक्तियां नहीं की हैं। उन्होंने यूनिवर्सिटी के ऐतिहासिक प्रतीक चिह्न को नुकसान पहुंचाए जाने की भी कड़ी भर्त्सना की और कहा कि उनकी पार्टी इस तरह के कृत्यों का समर्थन नहीं करती है, भले ही इसमें शामिल लोग उनकी पार्टी के ही क्यों न हों।

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अल्का सिंह

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Senior Content Writer

अल्का सिंह स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर गहन शोध के साथ लेखन करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को केवल सामान्य जानकारी ही नहीं, बल...

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