प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं, लेकिन जब खुद जिम्मेदार अधिकारी औचक निरीक्षण कर दें, तो पोल खुलते देर नहीं लगती। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने महकमे में हड़कंप मचा दिया है। सकलडीहा तहसील में जब उपजिलाधिकारी (SDM) ने अटेंडेंस रजिस्टर की जांच की, तो जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने खुद प्रशासनिक अधिकारियों को हैरान कर दिया। कुल 88 लेखपालों में से दफ्तर से सीधे-सीधे 60 लेखपाल नदारद मिले। इस बड़ी लापरवाही पर एसडीएम का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया और उन्होंने तुरंत सख्त एक्शन लेते हुए सभी गायब कर्मचारियों को नोटिस थमा दिया है।
औचक निरीक्षण में खुली पोल: 88 में से 60 का अता-पता नहीं
घटना चंदौली जनपद के सकलडीहा तहसील क्षेत्र की है। यहां लंबे समय से आम जनता और पीड़ितों द्वारा लेखपालों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही थीं। ग्रामीणों का दर्द यह था कि वे अपने छोटे-छोटे राजस्व कार्यों, दस्तावेजों और प्रमाण पत्रों के लिए दूर-दूर से तहसील मुख्यालय पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें कभी भी उनके क्षेत्र का लेखपाल मौके पर नहीं मिलता। जनता की इन लगातार शिकायतों को उपजिलाधिकारी (SDM) आकांक्षा सिंह ने बेहद गंभीरता से लिया।
स्थिति की सच्चाई जानने के लिए एसडीएम आकांक्षा सिंह ने खुद तहसील पहुंचकर उपस्थिति पंजिका (Attendance Register) की सरसरी और गहरी जांच की। रजिस्टर के पन्ने पलटे गए तो उसमें दर्ज आंकड़ों ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी। तहसील में तैनात कुल 88 लेखपालों में से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए—पूरे 60 लेखपाल अपनी ड्यूटी से गायब पाए गए। इतनी भारी संख्या में कर्मचारियों के एक साथ गायब मिलने से महकमे में अफरा-तफरी मच गई।
कार्रवाई और स्पष्टीकरण नोटिस: अब देना होगा जवाब
तहसील परिसर में इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की गैर-मौजूदगी देखकर एसडीएम ने एक पल की भी देरी नहीं की। उन्होंने सभी 60 अनुपस्थित लेखपालों की हाजिरी को तत्काल 'अनुपस्थित' (Absent) दर्ज किया। इसके साथ ही, सभी लापरवाह कर्मचारियों को कठोर शब्दों में स्पष्टीकरण नोटिस जारी किया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सभी संबंधित लेखपालों को कड़ी हिदायत दी गई है कि वे तय समय के भीतर तहसील में उपस्थित होकर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें। एसडीएम के इस सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि ड्यूटी के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही या मनमानी को अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निलंबन की चेतावनी से राजस्व कर्मियों में मचा हड़कंप
एसडीएम आकांक्षा सिंह द्वारा की गई इस औचक कार्रवाई और निलंबन की चेतावनी के बाद से सकलडीहा तहसील के तमाम राजस्व कर्मचारियों और लेखपालों में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकारी स्तर पर यह स्पष्ट संदेश दे दिया गया है कि यदि कार्यशैली में तुरंत सुधार नहीं किया गया और बिना किसी ठोस व वैध कारण के कार्यस्थल से अनुपस्थित रहने की आदत नहीं बदली गई, तो सीधे तौर पर निलंबन (Suspension) की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
एसडीएम ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जनता के हितों से खिलवाड़ करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। सरकारी तंत्र का मुख्य उद्देश्य जनता को सुविधाएं देना है और यदि कर्मचारी ही गायब रहेंगे, तो शासन की योजनाएं और प्रशासनिक प्रक्रियाएं धरातल पर कैसे उतरेंगी।
क्यों आम जनता के लिए बेहद अहम होते हैं लेखपाल?
भारतीय ग्रामीण व्यवस्था और राजस्व प्रणाली में लेखपाल की भूमिका रीढ़ की हड्डी जैसी होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आम लोग अपनी छोटी-छोटी और बुनियादी जरूरतों के लिए पूरी तरह से लेखपालों पर निर्भर रहते हैं। जरा सोचिए, जब किसी गरीब किसान या आम नागरिक को निम्नलिखित कार्यों के लिए दर-दर भटकना पड़े:
- आय प्रमाण पत्र (Income Certificate) बनवाना हो।
- जाति और निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता हो।
- भूमि विवाद (Land Dispute) या पैमाइश का मामला हो।
- वरासत दर्ज कराने जैसी जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करनी हो।
इन सभी महत्वपूर्ण कार्यों के लिए लेखपाल की रिपोर्ट और मौजूदगी अनिवार्य होती है। ऐसे में, यदि लेखपाल ही अपने दफ्तर या क्षेत्र से गायब मिलेंगे, तो आम जनता का समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। ग्रामीणों को अपने ही हक के कामों के लिए तहसील के अनगिनत चक्कर काटने पड़ते हैं।
'क्षेत्र में होने का बहाना' अब नहीं चलेगा
जांच के दौरान यह बात भी सामने आई कि अक्सर लेखपाल मुख्यालय से नदारद रहने के लिए 'क्षेत्रीय भ्रमण' (Field Work) का बहाना बनाते हैं। कागजों पर तो वे फील्ड में होना दर्शाते हैं, लेकिन न तो वे जनता को फील्ड में मिलते हैं और न ही तहसील कार्यालय में। इसी मनमानी और ढुलमुल रवैये के कारण आम जनता महीनों तक अपने कामों के लिए परेशान होती रहती है।
शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप रहा है कि कई बार फोन करने पर भी ये कर्मचारी कॉल रिसीव नहीं करते, जिससे स्थिति और भी बदतर हो जाती है। एसडीएम के इस कड़े कदम के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि अब लेखपाल अपनी जवाबदेही को समझेंगे और समय पर कार्यालय में बैठकर जनता की समस्याओं का त्वरित निस्तारण करेंगे।
सुधरेंगी व्यवस्थाएं या फिर जारी रहेगा खेल?
फिलहाल, इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई ने पूरे जिले में एक कड़ा संदेश दे दिया है। भ्रष्टाचार और सुस्ती के खिलाफ इस प्रकार के औचक निरीक्षण यदि नियमित रूप से किए जाएं, तो सरकारी दफ्तरों की तस्वीर काफी हद तक बदल सकती है। देखना यह होगा कि इस नोटिस और चेतावनी के बाद सकलडीहा तहसील के लेखपाल अपनी कार्यप्रणाली में कितना सुधार लाते हैं और जनता को कितनी राहत मिलती है।