EV बिक्री में किस राज्य ने मारी बाजी? चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने
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EV बिक्री में किस राज्य ने मारी बाजी? चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने

EV बिक्री में किस राज्य ने मारी बाजी? चौंकाने वाले आंकड़े आए सामने

भारत की सड़कों पर पिछले कुछ समय से एक शांत क्रांति तेजी से आगे बढ़ रही है। पारंपरिक पेट्रोल और डीजल गाड़ियों की गड़गड़ाहट के बीच अब बैटरी से चलने वाले वाहनों यानी इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV) की गूंज सुनाई देने लगी है। साल 2025 के आंकड़ों पर अगर नजर डालें तो देश में 23 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हुए, जो यह बताने के लिए काफी हैं कि भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार का रुख किस तरफ है। नए वाहनों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी अब लगभग 8 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है।

लेकिन जब राज्यों के हिसाब से इन आंकड़ों की गहराई से पड़ताल की जाती है, तो कई ऐसे दिलचस्प तथ्य सामने आते हैं जो पहली नजर में हैरान कर सकते हैं। कुल रजिस्ट्रेशन के मामले में एक राज्य ने भारी अंतर से बाजी मारी है, तो वहीं जब बात 'पेनेट्रेशन' यानी कुल बाजार में हिस्सेदारी की आती है, तो तस्वीर बिल्कुल बदल जाती है। आइए आंकड़ों के जरिए समझते हैं कि भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की असल दौड़ में कौन सा राज्य कहां खड़ा है।

उत्तर प्रदेश ने मारी बाजी या कहानी कुछ और है?

वाहन पोर्टल से सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश में कुल 4,04,908 इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन दर्ज किया गया। यह आंकड़ा देश भर में दर्ज कुल EV रजिस्ट्रेशन का लगभग 18 प्रतिशत बैठता है। संख्या के लिहाज से यूपी ने देश के बाकी सभी राज्यों को पीछे छोड़ दिया है।

यूपी के बाद इस फेहरिस्त में महाराष्ट्र का नाम आता है, जहां 2,66,524 इलेक्ट्रिक वाहन सड़कों पर उतरे। इसके अलावा कर्नाटक में करीब 2 लाख EV रजिस्टर्ड हुए। तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली भी देश के बड़े इलेक्ट्रिक वाहन बाजारों में अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। हालांकि, सिर्फ इन बड़े आंकड़ों को देखकर यह निष्कर्ष निकाल लेना जल्दबाजी होगी कि उत्तर प्रदेश में हर तरह के इलेक्ट्रिक वाहन सबसे तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।

इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर की बड़ी भूमिका

विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तर प्रदेश के कुल EV रजिस्ट्रेशन में एक बहुत बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर यानी ई-रिक्शा और ऑटो का है। राज्य के शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में कम दूरी के सफर के लिए बैटरी वाले तिपहिया वाहनों की मांग में भारी उछाल आया है।

यही वजह है कि यूपी का कुल EV रजिस्ट्रेशन दूसरे कई बड़े राज्यों की तुलना में काफी ज्यादा दिखाई देता है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि किसी भी राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की असली लोकप्रियता का आकलन सिर्फ कुल संख्या के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए बाजार की नब्ज और वाहन के सेगमेंट को भी देखना पड़ता है।

निजी वाहनों की रेस में कर्नाटक और केरल आगे

नीति आयोग के 'इण्डिया इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंडेक्स' के आंकड़े इस पूरी तस्वीर को एक नया आयाम देते हैं। इन आंकड़ों के अनुसार, अगर केवल निजी (Personal) EV रजिस्ट्रेशन की हिस्सेदारी देखी जाए, तो कर्नाटक और केरल बाजी मारते नजर आते हैं।

  • केरल: राज्य के कुल निजी वाहन बाजार में EV की हिस्सेदारी करीब 12 प्रतिशत दर्ज की गई।
  • कर्नाटक: इस दक्षिणी राज्य में निजी EV रजिस्ट्रेशन की हिस्सेदारी लगभग 11 प्रतिशत रही।
  • उत्तर प्रदेश: चौंकाने वाली बात यह है कि भारी कुल रजिस्ट्रेशन के बावजूद, यूपी में निजी वाहनों के बीच EV की हिस्सेदारी महज 4 प्रतिशत के आसपास ही है।

इसका सीधा मतलब यह है कि भले ही उत्तर प्रदेश में सड़कों पर दौड़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल गिनती बहुत ज्यादा है, लेकिन जब राज्य के कुल निजी कार और टू-व्हीलर बाजार से तुलना की जाती है, तो कर्नाटक और केरल जैसे राज्य कहीं अधिक तेजी से व्यक्तिगत स्तर पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को अपना रहे हैं।

छोटे और पहाड़ी राज्यों में क्यों धीमी है रफ्तार?

देश के सभी हिस्से एक जैसी रफ्तार से इलेक्ट्रिक वाहनों को नहीं अपना पा रहे हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट बताती है कि अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और सिक्किम जैसे छोटे और पहाड़ी राज्यों में निजी वाहनों के बीच EV की हिस्सेदारी लगभग शून्य के करीब रही है।

हालांकि, इन दूरदराज के राज्यों की सीधी तुलना उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र या कर्नाटक जैसे विशालकाय बाजारों से करना तार्किक नहीं होगा। किसी भी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार को कई जमीनी कारक प्रभावित करते हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • सार्वजनिक और निजी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता
  • राज्य की भौगोलिक स्थिति और चुनौतीपूर्ण पहाड़ी रास्ते
  • स्थानीय सरकारों की इलेक्ट्रिक वाहन नीतियां और सब्सिडी
  • आम जनता की क्रय शक्ति (Purchasing Power) और वाहन बाजार का कुल आकार

खासकर पूर्वोत्तर और पहाड़ी इलाकों में पर्याप्त चार्जिंग स्टेशनों का अभाव लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने से रोकता है। यही कारण है कि भारत में EV क्रांति की सही तस्वीर देखने के लिए केवल कुल बिक्री के नंबरों पर निर्भर रहने के बजाय, राज्य-दर-राज्य 'EV पेनेट्रेशन' और बुनियादी ढांचे के विकास का अध्ययन करना सबसे सटीक तरीका माना जा रहा है।

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निवेदिता ठाकुर

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Writer (स्थानीय खबरें)

निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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