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विश्व आदिवासी दिवस पर भाजपा की चुप्पी: क्या आदिवासी सिर्फ वोट बैंक हैं? कांग्रेस का बड़ा हमला

विश्व आदिवासी दिवस पर भाजपा की चुप्पी: क्या आदिवासी सिर्फ वोट बैंक हैं? कांग्रेस का बड़ा हमला

क्या आदिवासी समाज सिर्फ चुनाव में ही याद आता है? कांग्रेस ने उठाए सवाल

प.डी.डी.यू नगर, चन्दौली: 9 अगस्त को पूरी दुनिया में 'विश्व आदिवासी दिवस' को एक उत्सव के रूप में मनाया गया। यह दिन आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, गौरवशाली विरासत और उनके संवैधानिक अधिकारों के सम्मान का प्रतीक है। लेकिन भारत की राजनीति में इस दिन ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। उत्तर प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. उमेश चन्द्र ने भाजपा नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे आदिवासी समाज की घोर उपेक्षा करार दिया है।

बधाई संदेश तक से परहेज क्यों?

डॉ. उमेश चन्द्र ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि आदिवासी कल्याण के बड़े-बड़े दावे करने वाली भाजपा सरकार ने इस महत्वपूर्ण अवसर पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने कहा, 'यह केवल बधाई न देने का मामला नहीं है, बल्कि उस मानसिकता का प्रमाण है जो चुनाव के समय आदिवासियों को अपना मानती है और चुनाव बीतते ही उन्हें भूल जाती है।'

कांग्रेस नेता ने जिन प्रमुख नेताओं पर सवाल उठाए, उनमें शामिल हैं:

  • केंद्र सरकार: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जनजाति कार्य मंत्री जुएल ओंराव।
  • विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री: मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम और गुजरात के मुख्यमंत्रियों ने भी बधाई संदेश नहीं दिया।
  • उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'शेर दिवस' पर तो बधाई दी, लेकिन विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज को शुभकामनाएं देना जरूरी नहीं समझा।

लखनऊ के कार्यक्रम में उपेक्षा का आरोप

विज्ञप्ति में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। लखनऊ में अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाजपा के ही कई नेता शामिल थे। डॉ. उमेश चन्द्र ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या ने मुख्य अतिथि के रूप में आने की सहमति दी थी, लेकिन अंतिम समय में वे कार्यक्रम में नहीं पहुंचे। वहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से समय का अभाव बताया गया। इसे आदिवासी समाज का अपमान बताते हुए कांग्रेस ने कहा कि यह दिखाता है कि सत्ता के गलियारों में आदिवासी समाज की क्या अहमियत है।

'वनवासी' बनाम 'आदिवासी': पहचान का बड़ा संकट

डॉ. उमेश चन्द्र ने केवल बधाई न देने पर ही नहीं, बल्कि भाजपा की वैचारिक नीति पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासियों को 'वनवासी' कहकर उनकी मूल पहचान को मिटाने की कोशिश कर रही है।

'यह केवल नाम का सवाल नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज की ऐतिहासिक अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों को मिटाने की एक सोची-समझी साजिश है।' - डॉ. उमेश चन्द्र

कांग्रेस का तर्क है कि जब सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग विश्व आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिन को अनदेखा कर सकते हैं, तो उनसे जल-जंगल-जमीन की रक्षा, युवाओं के रोजगार और बच्चों की शिक्षा की उम्मीद करना व्यर्थ है।

राजनीतिक विमर्श में आदिवासियों की स्थिति

भाजपा के 25 आदिवासी सांसदों में से 20 सांसदों का चुप रहना भी कांग्रेस के निशाने पर है। डॉ. उमेश चन्द्र ने इसे 'आदिवासी प्रेम' की पोल खोलने वाला बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा को 'जनजाति गौरव दिवस' तो याद रहता है, लेकिन 'विश्व आदिवासी दिवस' पर उनकी चुप्पी उनकी वास्तविक मानसिकता को उजागर करती है।

निष्कर्ष

यह घटनाक्रम आने वाले समय में आदिवासी राजनीति को और अधिक धार दे सकता है। क्या भाजपा इस पर अपना पक्ष रखेगी या यह चुप्पी आने वाले चुनावों में उनके लिए चुनौती बनेगी? यह देखना दिलचस्प होगा। फिलहाल, कांग्रेस ने इस मुद्दे को सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक उठाने का मन बना लिया है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: विश्व आदिवासी दिवस कब मनाया जाता है?

उत्तर: विश्व आदिवासी दिवस हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है।

Q2: कांग्रेस ने भाजपा पर क्या आरोप लगाए हैं?

उत्तर: कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भाजपा नेतृत्व ने विश्व आदिवासी दिवस पर बधाई न देकर आदिवासी समाज की उपेक्षा की है और उनकी पहचान को मिटाने का प्रयास किया जा रहा है।

Q3: उत्तर प्रदेश में किस कार्यक्रम को लेकर विवाद हुआ?

उत्तर: लखनऊ में अखिल भारतीय गोंड आदिवासी संघ के कार्यक्रम में उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के न पहुंचने को लेकर कांग्रेस ने नाराजगी जताई है।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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