पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 'जननीति भारत' नाम से अपनी नई राजनीतिक पार्टी का ऐलान कर दिया है। उनकी यह पार्टी आगामी वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार मैदान में उतारेगी।
भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखने और बड़ी सफलता हासिल करने वाले चेहरों का इतिहास पुराना रहा है। देश में कई ऐसे पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं जिन्होंने प्रशासनिक पदों से निकलकर सीधे राजनीतिक दलों की कमान संभाली और मुख्यमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों तक का सफर तय किया। इसी कड़ी में अब उत्तर प्रदेश में पूर्व IAS दिव्या मित्तल की नई राजनीतिक एंट्री चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रशासन से राजनीति का सफर और 'जननीति भारत'
दिव्या मित्तल वर्ष 2013 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा की अधिकारी रही हैं। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जिलाधिकारी यानी जिला मजिस्ट्रेट के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। इसके बाद उन्होंने वर्ष 2026 में प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के तुरंत बाद उन्होंने 'जननीति भारत' नाम से अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी के गठन की घोषणा की।
दिव्या मित्तल के अनुसार उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य जनता की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना, जमीनी जरूरतों के आधार पर नीतिगत फैसले लेना और सरकारी कामकाज में पूर्ण जवाबदेही तय करना है। उन्होंने इन तीनों बिंदुओं को अपनी पार्टी के तीन प्रमुख वचन बताया है। उनकी पार्टी की नजर पूरी तरह से वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर टिकी हुई है, जहां पार्टी अपने चुनावी भाग्य को आजमाएगी।
छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने थे अजीत जोगी
प्रशासनिक सेवा छोड़कर राजनीति में आकर शीर्ष पद तक पहुंचने का सबसे बड़ा उदाहरण अजीत जोगी का है। अजीत जोगी वर्ष 1970 बैच के IAS अधिकारी थे। उन्होंने अपनी प्रशासनिक नौकरी छोड़कर कांग्रेस पार्टी के साथ औपचारिक तौर पर राजनीति में प्रवेश किया था। जब वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश का पुनर्गठन कर छत्तीसगढ़ नया राज्य बनाया गया, तब उन्हें राज्य का पहला मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला।
उन्होंने नवंबर 2000 से दिसंबर 2003 तक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। बाद में कांग्रेस पार्टी से वैचारिक मतभेदों के चलते उन्होंने वर्ष 2016 में अलग होकर 'जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे)' नाम से अपनी क्षेत्रीय पार्टी का गठन किया था। उनकी पार्टी ने वर्ष 2018 का विधानसभा चुनाव भी लड़ा, लेकिन वह सत्ता हासिल करने में कामयाब नहीं हो सकी। लंबी बीमारी के बाद 29 मई 2020 को उनका निधन हो गया था।
आरसीपी सिंह का राजनीतिक सफर और पार्टी विलय
उत्तर प्रदेश कैडर के वर्ष 1984 बैच के पूर्व IAS अधिकारी आरसीपी सिंह भी नौकरशाही से राजनीति में आए प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के साथ अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। वह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद तक पहुंचे और केंद्र सरकार में नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में इस्पात मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाली।
इसके बाद उन्होंने 31 अक्टूबर 2024 को 'आप सब की आवाज' (ASA) के नाम से अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी बनाने की घोषणा की थी। हालांकि उनका यह राजनीतिक दल ज्यादा लंबा सफर तय नहीं कर पाया और मई 2025 में उनकी पार्टी का प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाली 'जन सुराज पार्टी' में आधिकारिक रूप से विलय कर दिया गया।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई शुरुआत
अजीत जोगी ने जहां प्रशासनिक सेवा के बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री का पद संभाला, वहीं आरसीपी सिंह ने अपनी पार्टी बनाने के बाद उसका अन्य दल में विलय किया। अब इसी कड़ी में पूर्व IAS दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में एक नई शुरुआत करने जा रही हैं। प्रशासनिक पृष्ठभूमि से आने वाले ये चेहरे राजनीतिक गलियारों में हमेशा से कौतुक और उम्मीद का विषय रहे हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दिव्या मित्तल की 'जननीति भारत' पार्टी को उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में जनता का कितना समर्थन मिल पाता है।