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फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के सहारे यूपी में चल रहे 3000 करोड़ के काम, जीएस एक्सप्रेस का ठेका रद्द करने की नोटिस

फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के सहारे यूपी में चल रहे 3000 करोड़ के काम, जीएस एक्सप्रेस का ठेका रद्द करने की नोटिस

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उत्तर प्रदेश में तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के निर्माण कार्य हासिल करने वाली जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड पर शिकंजा कस गया है। नियोजन विभाग के ईपीसीसी मिशन के तकनीकी प्रकोष्ठ ने कंपनी को ठेका रद्द करने का नोटिस जारी करते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे राज्य में चल रहे कई बड़े और महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में जीएस एक्सप्रेस प्रा.लि. को वर्तमान में 3,002.99 करोड़ रुपये की लागत वाले कुल 41 कार्य सौंपे गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन आवंटित कार्यों में से आधे से अधिक यानी 1,818.01 करोड़ रुपये के काम कंपनी खुद न करके अन्य एजेंसियों से मोटी रकम लेकर उन्हें सौंप रही है। इस मामले में नियोजन विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है, जिसके पीछे कुछ प्रभावशाली अधिकारियों और नेताओं के गठजोड़ की चर्चा है। जब इस अनियमितता की शिकायत मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव नियोजन, प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी और विभिन्न कार्यदायी विभागों के प्रमुख इंजीनियरों तक पहुंची, तब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत प्रशासनिक अमला हरकत में आया।

फर्जीवाड़े का ऐसे हुआ खुलासा

इस पूरे घोटाले की परतें तब खुलीं जब उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम की अयोध्या इकाई ने आठ अक्टूबर 2026 को जारी अपने पत्र में यह आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया कि 21 अक्टूबर 2019 को जारी किया गया अनुभव प्रमाण पत्र उनके कार्यालय द्वारा जारी ही नहीं किया गया था। इस खुलासे के बाद से ही विभिन्न सरकारी निर्माण परियोजनाओं की निविदाओं में प्रस्तुत किए जाने वाले अनुभव प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नियोजन विभाग के ईपीसीसी मिशन के तकनीकी प्रकोष्ठ ने 12 अक्टूबर 2026 को कंपनी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया है। तकनीकी सेल के अधीक्षण अभियंता राजेश कुमार के अनुसार, नोटिस में निविदा की शर्तों और इंटीग्रिटी पैक्ट के प्रावधानों का कड़ाई से हवाला दिया गया है। कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है। निर्धारित समयावधि में संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में कंपनी को अयोग्य घोषित करने, निविदाएं निरस्त करने, अनुबंध समाप्त करने और भविष्य की सभी सरकारी निविदाओं से स्थायी रूप से प्रतिबंधित करने की बड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कूटरचित ईमेल और महाप्रबंधक स्तर से खुद का सत्यापन

राजकीय निर्माण निगम के मुख्यालय द्वारा नौ अक्टूबर 2026 को जारी पत्र से एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसके अनुसार, प्रमाण पत्र के सत्यापन के लिए जिस ईमेल पते का इस्तेमाल किया गया था, वह संबंधित इकाई कार्यालय के आधिकारिक ईमेल पते से पूरी तरह भिन्न था। कंपनी ने खुद ही एक कूटरचित ईमेल तैयार किया और संबंधित महाप्रबंधक स्तर के फर्जी माध्यम से अपने प्रमाण पत्र को सत्यापित करा लिया। यही वजह है कि अब यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब संबंधित निर्माण इकाई ने ऐसा कोई प्रमाण पत्र जारी ही नहीं किया था, तो यह दस्तावेज तकनीकी पात्रता मूल्यांकन के दौरान टेंडर प्रक्रिया में कैसे स्वीकार कर लिया गया।

इलाहाबाद हाईकोर्ट के पुराने आदेशों की अनदेखी

सरकारी निर्माण परियोजनाओं के ठेके देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बरतने के बजाय नियमों को ताक पर रखा गया। यदि समय रहते अदालती आदेशों का पालन किया जाता, तो यह स्थिति काफी पहले टल सकती थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 17 अप्रैल 2023 को जीएस एक्सप्रेस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक अन्य मामले में सुनवाई करते हुए टेंडर प्रक्रिया में गलत तथ्य प्रस्तुत करने और निर्माण कार्यों से जुड़ी लंबित प्रतिबद्धताओं का खुलासा न करने पर कड़ी टिप्पणी की थी।

उस दौरान लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने कंपनी को जारी कार्यादेश वापस ले लिया था। अदालत के उस फैसले में यह साफ उल्लेख किया गया था कि निविदा दस्तावेजों में कंपनी ने भविष्य में पीडब्ल्यूडी के अंतर्गत किसी भी प्रकार की बोली लगाने से स्थायी रूप से वंचित किए जाने की शर्त को स्वीकार किया था। उच्च न्यायालय ने मामले की गहराई से जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने उन निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया।

प्रभावित होने वाले प्रमुख प्रोजेक्ट्स

इस पूरी कार्रवाई और ठेका रद्द होने की प्रक्रिया के दायरे में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कई ड्रीम प्रोजेक्ट्स भी आ रहे हैं। इनमें गोरखपुर वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय का निर्माण कार्य भी शामिल है। कंपनी के पास प्रदेशभर में फैले 41 बड़े प्रोजेक्ट्स का जिम्मा है, जिनके काम अब बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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