अंतरिक्ष अभियानों की दुनिया में तारीखों और समय का खेल बेहद नपे-तुले गणित पर आधारित होता है। हाल ही में चीन की अंतरिक्ष एजेंसी ने अपने महत्वाकांक्षी मून मिशन 'चांग्ई-7' (Chang'e-7) के लॉन्च को इस साल के निर्धारित समय पर आगे बढ़ाने का फैसला किया है। सुरक्षा और तकनीकी शुद्धता को प्राथमिकता देते हुए यह कदम उठाया गया है। लेकिन, आम लोगों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर अंतरिक्ष यान के लॉन्च में कुछ दिनों की देरी क्यों नहीं की जा सकती? क्या रॉकेट को कुछ दिन बाद दोबारा लॉन्च नहीं किया जा सकता?
इस सवाल का जवाब पृथ्वी की कक्षाओं और अंतरिक्ष की दूरियों से जुड़े बेहद जटिल नियमों में छिपा है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि अंतरिक्ष विज्ञान में 'ल लॉन्च विंडो' (Launch Window) का क्या अर्थ है और चांग्ई-7 के मामले में यह इतनी संवेदनशील क्यों है।
आखिर क्या होती है 'लॉन्च विंडो'?
सरल शब्दों में कहें तो लॉन्च विंडो वह तयशुदा समय होता है, जिसके दौरान किसी अंतरिक्ष यान को उसकी इच्छित कक्षा (Orbit) में भेजने के लिए सबसे अनुकूल परिस्थितियां मिलती हैं। इसमें खगोलीय स्थिति, पृथ्वी का घूर्णन, ट्रैकिंग की सुविधाएं और मिशन की अन्य जरूरतें शामिल होती हैं।
पृथ्वी के करीब, यानी लो अर्थ ऑर्बिट (Low Earth Orbit) में भेजे जाने वाले उपग्रहों के मामले में यह विंडो थोड़ी लचीली हो सकती है। यदि किसी तकनीकी खराबी या मौसम के कारण लॉन्च टल जाए, तो कुछ दिनों बाद दूसरा मौका मिल जाता है। लेकिन, जब बात पृथ्वी से मीलों दूर अंतरिक्ष में जाने वाले मिशनों की होती है, तो यह नियम पूरी तरह बदल जाता है।
चांग्ई-7 मिशन का मकसद और दक्षिणी ध्रुव की चुुनौती
चीन का चांग्ई-7 मिशन साधारण नहीं है। यह चांद के दक्षिणी ध्रुव (Lunar South Pole) पर उतरने वाला है, जहां वैज्ञानिक पानी की बर्फ (Water Ice) की तलाश करना चाहते हैं। चांद का यह इलाका सौर मंडल की सबसे रहस्यमयी जगहों में से एक है।
चूंकि चंद्रमा की घूर्णन धुरी (Rotational Axis) का झुकाव बहुत कम है, इसलिए दक्षिणी ध्रुव के पास सूरज की किरणें क्षितिज के काफी करीब से गुजरती हैं। यहां कुछ ऐसे ऊंचे इलाके हैं जहां सालभर में 80% से ज्यादा समय तक धूप रहती है, जिन्हें 'लगातार रोशनी वाले क्षेत्र' कहा जाता है। इसके ठीक उलट, पास के गड्ढे (Impact Craters) हमेशा के लिए अंधेरे में डूबे रहते हैं और वहां का तापमान माइनस 230 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है। इन्हीं बेहद ठंडी जगहों पर पानी की बर्फ संरक्षित होने की उम्मीद है।
क्यों सिर्फ 'कुछ दिन की देरी' काम नहीं आ सकती?
चांग्ई-7 मुख्य रूप से सौर ऊर्जा (Solar Power) पर निर्भर है। इसका मतलब साफ है कि अंतरिक्ष यान को चांद पर ठीक उसी समय पहुंचना होगा जब वहां अनुकूल रोशनी मिल सके। मिशन से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार:
- यान को दक्षिणी ध्रुव पर उस समय से पहले लैंड करना होगा जब वहां लगातार धूप की अनुकूल अवधि शुरू होती है।
- प्रारंभिक अनुमानों के मुताबिक, सालभर में केवल 105 दिन ही ऐसे होते हैं जब वहां स्थिर अन्वेषण (Stable Exploration) के लिए सबसे अच्छी रोशनी मिलती है।
- यह सुनहरे अवसर हर महीने नहीं आते, और इन्हें केवल दो-चार दिन लॉन्च टालकर वापस नहीं पाया जा सकता।
यदि इस अनुकूल अवधि को मिस कर दिया जाए, तो चांग्ई-7 चांद के दक्षिणी ध्रुव पर तब पहुंचेगा जब वहां धूप बेहद कमजोर हो चुकी होगी। इससे अंतरिक्ष यान की बिजली की आपूर्ति (Power Supply) और नेविगेशन पर सीधा असर पड़ेगा। नतीजतन, सतह पर रिसर्च करने का समय या तो बहुत कम रह जाएगा या बिल्कुल खत्म हो जाएगा।
