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चतरा में अफीम तस्कर को 15 साल की सजा, 1.5 लाख का जुर्माना

चतरा में अफीम तस्कर को 15 साल की सजा, 1.5 लाख का जुर्माना

झारखंड के चतरा जिले से न्याय व्यवस्था को लेकर एक बेहद सख्त और कड़ा संदेश देने वाला फैसला सामने आया है। व्यवहार न्यायालय चतरा स्थित विशेष एनडीपीएस (NDPS) कोर्ट ने अवैध मादक पदार्थों के कारोबार से जुड़े एक चर्चित मामले में अपना अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने अफीम तस्करी के गंभीर जुर्म में संलिप्त पाए गए एक दोषी को पूरे 15 साल के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया है। इस फैसले ने इलाके के आपराधिक तत्वों में हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि कानून अब एनडीपीएस मामलों में किसी भी तरह की नरमी बरतने के मूड में नहीं है।

अदालत का कड़ा रुख और जुर्माने का प्रावधान

विशेष एनडीपीएस कोर्ट ने केवल कैद की सजा पर ही विराम नहीं लगाया, बल्कि दोषी की अवैध कमाई और अपराध की गंभीरता को देखते हुए उस पर भारी आर्थिक दंड भी लगाया है। अदालत के निर्देशानुसार, दोषी रामदेव कुमार साव उर्फ जितेंद्र उर्फ जीतन को कुल 1.50 लाख रुपये का अर्थदंड भरना होगा। न्यायपालिका की यह सख्ती यहीं नहीं रुकती; अदालत ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि यदि दोषी जुर्माना राशि जमा करने में असमर्थ रहता है, तो उसे अपनी सजा के दौरान दो साल की अतिरिक्त अवधि जेल में ही काटनी होगी। यह फैसला समाज में नशा तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

क्या था पूरा मामला और कब हुई थी कार्रवाई?

इस पूरे मामले की जड़ें पांच जुलाई 2021 तक जाती हैं। आज से करीब पांच साल पहले, चतरा जिले के सदर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस महकमे को एक बेहद गोपनीय और पुख्ता सूचना मिली थी। सूचना में यह बताया गया था कि इलाके में अवैध रूप से अफीम का भंडारण और तस्करी का काला कारोबार चल रहा है। इस इनपुट को गंभीरता से लेते हुए, सदर थाना के तत्कालीन पुलिस अवर निरीक्षक दिनेश कुमार हेम्ब्रम के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया।

पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए चिन्हित ठिकानों पर दबिश दी। जब पुलिस ने आरोपी रामदेव कुमार साव के घर पर औचक छापेमारी की, तो वहां से जो बरामदगी हुई, उसने पुलिस अधिकारियों को भी चौंका दिया। तलाशी के दौरान आरोपी के ठिकाने से पांच किलोग्राम गीला अफीम, 1.8 किलोग्राम कट और अवैध कारोबार से जुड़े 20 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। पुलिस ने मौके से ही आरोपी को धर दबोचा और एनडीपीएस एक्ट की सुसंगत धाराओं (धारा 18) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उसे सलाखों के पीछे भेज दिया था।

पांच साल लंबी चली कानूनी लड़ाई और सुनवाई

किसी भी आपराधिक मामले में अदालत से सजा मुकर्रर कराना एक लंबी और तकनीकी प्रक्रिया होती है। इस मामले में भी लगभग पांच वर्षों तक व्यवहार न्यायालय में लगातार सुनवाई का दौर चला। इस दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष के बीच कई कानूनी दलीलें दी गईं। अभियोजन पक्ष की रीढ़ मजबूत बनाए रखने में विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार श्रीवास्तव ने अहम भूमिका निभाई।

सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक ने अदालत के समक्ष एक के बाद एक कई ठोस गवाहों के बयान दर्ज कराए और अभियोजन की ओर से अकाट्य दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों की गवाही ने आरोपी के खिलाफ चक्रव्यूह रच दिया। तमाम कानूनी दांव-पेचों से गुजरने के बाद अंततः अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से सिद्ध होते हैं।

जिला अभियोजन कार्यालय की प्रभावी पैरवी

इस मामले के निपटारे के बाद न्याय जगत में जिला अभियोजन कार्यालय की कार्यशैली की सराहना हो रही है। विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार श्रीवास्तव ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि जिला अभियोजन कार्यालय की ओर से एनडीपीएस और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों में लगातार प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण पैरवी सुनिश्चित की जा रही है। उनका यह भी कहना था कि समाज के लिए लाइलाज नासूर बन चुके नशेडिय़ों और तस्करों के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए पुलिस और न्यायपालिका दोनों ही पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।

नशा तस्करों के लिए कड़ी चेतावनी

वर्तमान समय में मादक पदार्थों की तस्करी युवाओं के भविष्य को दीमक की तरह चाट रही है। ऐसे में न्यायालयों द्वारा इस तरह के कठोर निर्णय लिया जाना बेहद जरूरी हो जाता है। चतरा कोर्ट का यह फैसला उन तमाम लोगों के लिए एक स्पष्ट और कड़ी चेतावनी है, जो अल्प समय में अमीर बनने की चाहत में कानून को ताक पर रखकर अफीम या अन्य ड्रग्स का अवैध व्यापार करते हैं। 15 साल की यह लंबी कैद और आर्थिक दंड तस्करों के मन में कानून का डर पैदा करने के लिए पर्याप्त है।

निष्कर्ष

न्याय मिलने में भले ही पांच साल का वक्त लगा हो, लेकिन अंततः सत्य और कानून की जीत हुई है। इस प्रकार के मामलों में त्वरित जांच और अदालत द्वारा सख्त सजा का प्रावधान ही समाज को अपराध मुक्त बनाने की दिशा में सबसे बड़ा हथियार है। चतरा पुलिस और अभियोजन पक्ष की संयुक्त मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि कानून के लंबे हाथों से बचना किसी भी अपराधी के लिए नामुमकिन है।

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निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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